Dumka

दुमका में झामुमो की प्रमंडलीय बैठक, झारखंड दिवस को भव्य बनाने पर हुआ मंथन

#दुमका #राजनीतिक_बैठक : मुख्यमंत्री के निर्देश पर संथाल परगना प्रमंडल की एकदिवसीय बैठक में संगठनात्मक रणनीति तय।

झारखंड की उपराजधानी दुमका स्थित दुमका क्लब में माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देशानुसार झारखंड मुक्ति मोर्चा की एकदिवसीय संथाल परगना प्रमंडलीय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता माननीय विधायक बसंत सोरेन ने की, जबकि कई सांसद, मंत्री और विधायक इसमें शामिल हुए। बैठक में आगामी 02 फरवरी को मनाए जाने वाले झारखंड दिवस को भव्य और सफल बनाने को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। संगठनात्मक जिम्मेदारियों, जनभागीदारी और प्रचार-प्रसार को लेकर स्पष्ट दिशा तय की गई।

Join News देखो WhatsApp Channel
  • दुमका क्लब में आयोजित हुई झामुमो की संथाल परगना प्रमंडलीय बैठक
  • बैठक की अध्यक्षता विधायक बसंत सोरेन ने की।
  • 02 फरवरी झारखंड दिवस को भव्य रूप से मनाने पर जोर।
  • कार्यक्रम की शुरुआत दिशोम गुरु शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि से।
  • सांसद, मंत्री, विधायक और जिला परिषद अध्यक्ष सहित बड़ी संख्या में नेता मौजूद।
  • संगठनात्मक जिम्मेदारी और प्रचार-प्रसार की रणनीति पर चर्चा।

झारखंड मुक्ति मोर्चा द्वारा दुमका में आयोजित संथाल परगना प्रमंडलीय बैठक राजनीतिक और संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर आयोजित इस बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से लेकर जमीनी कार्यकर्ताओं तक की उपस्थिति रही। बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी झारखंड दिवस को सफल बनाना और राज्य निर्माण के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना रहा। कार्यक्रम के दौरान संगठन की एकजुटता और भविष्य की रणनीतियों पर भी गंभीर चर्चा हुई।

दिशोम गुरु को श्रद्धांजलि से हुई बैठक की शुरुआत

बैठक की शुरुआत झारखंड के जननायक और दिशोम गुरु आदरणीय स्वर्गीय शिबू सोरेन के तैलीय चित्र पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। उपस्थित नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके संघर्ष, विचार और झारखंड राज्य निर्माण में उनके योगदान को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि दिशोम गुरु के विचार आज भी झारखंड की राजनीति और सामाजिक चेतना की दिशा तय करते हैं।

वरिष्ठ नेताओं की गरिमामयी उपस्थिति

इस महत्वपूर्ण बैठक में दुमका लोकसभा सांसद माननीय नलिन सोरेन, झारखंड सरकार के मंत्री माननीय हाफिजुल हुसैन, विधायक स्टीफन मरांडी, हेमलाल मुर्मू, लुईस मरांडी, आलोक कुमार सोरेन, धनंजय सोरेन सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। साथ ही दुमका जिला परिषद अध्यक्ष श्रीमती जॉयस बेशरा, पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता भी बैठक में शामिल हुए। नेताओं की मौजूदगी से बैठक को राजनीतिक मजबूती और स्पष्ट दिशा मिली।

झारखंड दिवस को लेकर विस्तृत मंथन

बैठक का प्रमुख एजेंडा आगामी 02 फरवरी को मनाए जाने वाले झारखंड दिवस को भव्य, संगठित और जनभागीदारी के साथ मनाना रहा। इस दौरान कार्यक्रम की रूपरेखा, मंच व्यवस्था, सांस्कृतिक कार्यक्रम, जनसमूह की भागीदारी और मीडिया व प्रचार-प्रसार की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। नेताओं ने कहा कि झारखंड दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि राज्य निर्माण के संघर्ष और बलिदान को याद करने का अवसर है।

आदिवासी-मूलवासी अधिकारों पर जोर

वक्ताओं ने झारखंड राज्य निर्माण के संघर्ष, आदिवासी-मूलवासी अधिकारों और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना पार्टी की वैचारिक जिम्मेदारी है। बैठक में यह भी कहा गया कि झारखंड दिवस के माध्यम से युवाओं और नई पीढ़ी को राज्य के इतिहास और संघर्ष से जोड़ना आवश्यक है।

संगठनात्मक जिम्मेदारियों का निर्धारण

बैठक के दौरान संगठनात्मक जिम्मेदारियों पर भी चर्चा हुई। पार्टी नेताओं ने कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपने और समन्वय के साथ काम करने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए प्रखंड, पंचायत और बूथ स्तर तक तैयारी करने पर सहमति बनी। नेताओं ने कहा कि मजबूत संगठन ही जनआंदोलनों की सफलता की कुंजी है।

संचालन और पदाधिकारियों की सक्रिय भूमिका

कार्यक्रम का संचालन झारखंड मुक्ति मोर्चा के जिला अध्यक्ष शिव कुमार बास्की ने किया। बैठक में जिला सचिव निशित वरन गोलदार, जिला प्रवक्ता अब्दुश सलाम अंसारी सहित पार्टी के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता सक्रिय रूप से मौजूद रहे। संचालन के दौरान सभी वक्ताओं को अपनी बात रखने का अवसर मिला, जिससे बैठक सार्थक और संवादपरक बनी।

न्यूज़ देखो: झारखंड दिवस के बहाने संगठन की ताकत का प्रदर्शन

दुमका में हुई यह प्रमंडलीय बैठक झामुमो की संगठनात्मक सक्रियता को दर्शाती है। झारखंड दिवस को लेकर की गई तैयारी यह संकेत देती है कि पार्टी राज्य निर्माण की भावना को नए सिरे से मजबूत करना चाहती है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि तय की गई रणनीतियां जमीन पर कितनी प्रभावी ढंग से उतरती हैं। राजनीतिक संदेश और जनभागीदारी दोनों इस आयोजन की सफलता तय करेंगे। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

संघर्ष की विरासत, जिम्मेदारी हमारी

झारखंड दिवस केवल एक तारीख नहीं, बल्कि संघर्ष, पहचान और अधिकारों की याद है। इसे सफल बनाना केवल राजनीतिक दलों की नहीं, बल्कि समाज की भी जिम्मेदारी है। जब विचार और संगठन साथ चलते हैं, तभी बदलाव संभव होता है।
इस आयोजन से जुड़ी आपकी राय भी अहम है। कमेंट में अपने विचार साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और झारखंड के इतिहास व भविष्य को लेकर जागरूकता फैलाएं, ताकि संघर्ष की विरासत आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचे।

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 0 / 5. कुल वोट: 0

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!

IMG-20250723-WA0070
IMG-20251223-WA0009
आगे पढ़िए...

नीचे दिए बटन पर क्लिक करके हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें


Saroj Verma

दुमका/देवघर

ये खबर आपको कैसी लगी, अपनी प्रतिक्रिया दें

Back to top button
error: