महुआडांड़ में डीएमएफटी योजना पर सवाल, शिलापट्ट गांव में और सड़क कहीं दूसरी जगह बनाने का आरोप

महुआडांड़ में डीएमएफटी योजना पर सवाल, शिलापट्ट गांव में और सड़क कहीं दूसरी जगह बनाने का आरोप

author Ramprawesh Gupta
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#महुआडांड़ #डीएमएफटी_विवाद : ग्रामीणों ने अधूरी सड़क और फंड गड़बड़ी की जांच मांगी।

महुआडांड़ के कुरुंद गांव में डीएमएफटी फंड से स्वीकृत पीसीसी सड़क निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर अनियमितता का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस सड़क का शिलान्यास उनके गांव में हुआ, उसका निर्माण अधूरा छोड़कर राशि से दूसरी जगह सड़क बना दी गई। मामले को लेकर लोगों ने उपायुक्त से तकनीकी जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

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  • कुरुंद गांव में डीएमएफटी योजना के तहत सड़क निर्माण पर उठे सवाल।
  • ग्रामीणों ने आरोप लगाया — गांव में अधूरी सड़क, दूसरी जगह पूरा निर्माण।
  • 150 मीटर हिस्सा अब भी कच्चा, बरसात में दलदल बनने की शिकायत।
  • शिलापट्ट पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत कई जनप्रतिनिधियों के नाम अंकित।
  • ग्रामीणों ने फंड दुरुपयोग और सरकारी राशि बंदरबांट का लगाया आरोप।
  • उपायुक्त से तकनीकी जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग।

महुआडांड़ प्रखंड के चंपा पंचायत अंतर्गत कुरुंद गांव में डीएमएफटी फंड से स्वीकृत पीसीसी सड़क निर्माण योजना को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि योजना का शिलान्यास उनके गांव में किया गया, लेकिन सड़क निर्माण अधूरा छोड़कर उसी राशि से किसी दूसरी जगह सड़क बना दी गई।

ग्रामीणों का कहना है कि नवीन के घर से सिविरियुस कुजूर के घर तक बनने वाली सड़क का कार्य केवल आंशिक रूप से किया गया और करीब 150 मीटर हिस्सा आज भी अधूरा पड़ा हुआ है। बरसात के दिनों में यह रास्ता दलदल में तब्दील हो जाता है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

डीएमएफटी योजना के तहत स्वीकृत थी सड़क

ग्रामीणों के अनुसार यह सड़क P.M.K.K.K.Y. (D.M.F.T) योजना के तहत स्वीकृत की गई थी। योजना का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विकास करना था।

कुरुंद गांव में लगे शिलापट्ट के अनुसार सड़क निर्माण कार्य का शिलान्यास मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, चतरा सांसद कालीचरण सिंह और मनिका विधायक रामचन्द्र सिंह की मौजूदगी में किया गया था। उस दौरान तत्कालीन जिला उपायुक्त उत्कर्ष गुप्ता भी उपस्थित थे।

ग्रामीणों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर योजना की घोषणा के बावजूद गांव के लोग आज भी अधूरी सड़क और कीचड़ भरे रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं।

“हमारे गांव का पैसा दूसरी जगह खर्च हुआ”

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कुरुंद गांव के नाम पर स्वीकृत सड़क निर्माण की राशि से पंचायत की किसी दूसरी जगह सड़क बना दी गई।

ग्रामीणों के मुताबिक नवीन के घर से आगे कुछ दूरी तक ही पीसीसी कार्य हुआ, जबकि सिविरियुस कुजूर के घर तक पहुंचने वाला लगभग 150 मीटर हिस्सा छोड़ दिया गया।

ग्रामीणों ने कहा: “हमारे नाम पर पैसा आया, शिलापट्ट हमारे गांव में लगा, लेकिन सड़क कहीं और बन गई। हमारा हिस्सा अधूरा छोड़ दिया गया।”

लोगों का आरोप है कि यह केवल निर्माण में लापरवाही नहीं, बल्कि सरकारी राशि के दुरुपयोग का मामला है।

बरसात में बढ़ जाती है परेशानी

ग्रामीणों ने बताया कि अधूरी सड़क के कारण बारिश के मौसम में हालात और खराब हो जाते हैं। कच्चा छोड़ा गया हिस्सा पूरी तरह कीचड़ और दलदल में बदल जाता है।

इसका सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों पर पड़ता है। लोगों को आने-जाने में भारी कठिनाई होती है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि पूरी सड़क बन जाती तो गांव के लोगों को काफी राहत मिलती।

“गरीबों के हक पर डाका”

स्थानीय लोगों ने इसे डीएमएफटी फंड का खुला दुरुपयोग बताते हुए नाराजगी जाहिर की।

आक्रोशित ग्रामीणों ने कहा: “खनन प्रभावित क्षेत्र के विकास का पैसा था। हमारे हिस्से की सड़क दूसरी जगह बनाकर हमारे साथ धोखा किया गया। सरकार के कागज में सड़क है, लेकिन हकीकत में कीचड़ है।”

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि योजनाओं का लाभ जरूरतमंद क्षेत्रों तक सही तरीके से नहीं पहुंच पा रहा है।

उपायुक्त से उच्चस्तरीय जांच की मांग

मामले को लेकर ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि तकनीकी टीम भेजकर स्थल निरीक्षण कराया जाए और यह पता लगाया जाए कि आखिर कुरुंद गांव की सड़क अधूरी क्यों छोड़ दी गई।

साथ ही यह भी जांच की जाए कि उसी योजना की राशि से दूसरी जगह सड़क निर्माण कैसे किया गया।

ग्रामीणों ने दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए अधूरा छोड़ा गया 150 मीटर सड़क निर्माण जल्द पूरा कराने की अपील की है।

विकास योजनाओं की निगरानी पर उठे सवाल

इस पूरे मामले ने ग्रामीण विकास योजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि योजनाओं की नियमित जांच और निगरानी होती तो इस प्रकार की शिकायतें सामने नहीं आतीं।

लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि विकास योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और ग्रामीणों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए।

न्यूज़ देखो: विकास के नाम पर गड़बड़ी तो नहीं?

महुआडांड़ के कुरुंद गांव से सामने आया यह मामला विकास योजनाओं की जमीनी सच्चाई पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। यदि ग्रामीणों के आरोप सही हैं, तो यह केवल एक अधूरी सड़क का मामला नहीं, बल्कि सरकारी फंड के उपयोग और निगरानी व्यवस्था की बड़ी विफलता है। खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए बने डीएमएफटी फंड का सही उपयोग सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच होती है या मामला केवल कागजों तक सीमित रह जाता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जागरूक ग्रामीण और पारदर्शी व्यवस्था से ही होगा सही विकास

सरकारी योजनाएं तभी सफल मानी जाएंगी, जब उनका लाभ सही लोगों तक पहुंचे।

ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पानी और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का सही तरीके से विकास होना बेहद जरूरी है।

क्या आपके क्षेत्र में भी विकास योजनाओं को लेकर ऐसी शिकायतें हैं? अपनी बात कमेंट में साझा करें। खबर को आगे बढ़ाएं और जनहित से जुड़े मुद्दों को आवाज दें।

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Written by

महुवाडांड, लातेहार

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