
#कोलेबिरा #सिमडेगा #शैक्षणिकनवाचार : बैगलेस डे पर कक्षा सात के विद्यार्थियों ने डूडलिंग आर्ट से दिखाई रचनात्मक अभिव्यक्ति।
सिमडेगा जिले के पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, कोलेबिरा में पीएम श्री योजना के तहत बैगलेस डे कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर कक्षा सातवीं के छात्र-छात्राओं ने डूडलिंग आर्ट गतिविधि में उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को पुस्तक-केन्द्रित पढ़ाई से हटकर रचनात्मक सोच और कल्पनाशीलता विकसित करने का अवसर देना था। कला आधारित इस गतिविधि ने बच्चों में आत्म-अभिव्यक्ति, नवाचार और आत्मविश्वास को मजबूत किया।
- पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, कोलेबिरा में बैगलेस डे का आयोजन।
- कक्षा सातवीं के छात्र-छात्राओं ने डूडलिंग आर्ट में लिया सक्रिय भाग।
- रेखा, रंग और आकृतियों से बच्चों ने व्यक्त की अपनी कल्पनाएं व भावनाएं।
- विजय कुमार भुइयां ने डूडलिंग आर्ट के शैक्षणिक व मानसिक लाभ बताए।
- प्राचार्य संजय कुमार सिन्हा सहित शिक्षकों ने विद्यार्थियों का किया उत्साहवर्धन।
पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, कोलेबिरा में आयोजित बैगलेस डे कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए सीखने का एक अलग और प्रेरणादायक अनुभव बनकर सामने आया। इस दिन कक्षा सातवीं के छात्र-छात्राओं ने पुस्तकों के बोझ से मुक्त होकर डूडलिंग आर्ट के माध्यम से अपनी रचनात्मकता को खुलकर अभिव्यक्त किया। विद्यालय परिसर में बैनर के नीचे आयोजित यह गतिविधि न केवल सुव्यवस्थित थी, बल्कि बच्चों के लिए उत्साह और आनंद से भरपूर भी रही।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों की कल्पनाशीलता, सृजनात्मक क्षमता और अभिव्यक्ति कौशल को विकसित करना था। डूडलिंग आर्ट के दौरान बच्चों ने अपने मन में उठने वाले विचारों, भावनाओं और कल्पनाओं को रंगों और रेखाओं के जरिए कागज पर उतारा। उनकी कलाकृतियों में नवाचार, मौलिक सोच और आत्मविश्वास स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
डूडलिंग आर्ट से भावनाओं की अभिव्यक्ति
डूडलिंग आर्ट गतिविधि ने विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर दिया कि कला केवल सुंदर चित्र बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मन की भावनाओं को स्वतंत्र रूप से व्यक्त करने का एक प्रभावी माध्यम भी है। बच्चों द्वारा बनाई गई आकृतियों, प्रतीकों और रंग संयोजन में उनकी आंतरिक सोच और कल्पनाशील दृष्टिकोण झलक रहा था। कई विद्यार्थियों ने पहली बार इस प्रकार की कला गतिविधि में भाग लेकर अपनी छिपी प्रतिभा को पहचाना।
तकनीकी पहलुओं की दी गई जानकारी
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को डूडलिंग आर्ट की विभिन्न तकनीकी विधियों के बारे में भी विस्तार से बताया गया। इसमें रेखाओं का संतुलन, रंगों का सही संयोजन, आकृतियों की संरचना और कल्पनाशील प्रस्तुति जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर मार्गदर्शन दिया गया। बच्चों ने इन तकनीकों को पूरे मनोयोग से सीखा और अपने चित्रों में प्रयोग भी किया, जिससे उनकी कलाकृतियां और अधिक प्रभावशाली बन सकीं।
मानसिक विकास में सहायक है डूडलिंग आर्ट
बैगलेस डे के प्रभारी विजय कुमार भुइयां ने बच्चों को डूडलिंग आर्ट के महत्व से अवगत कराते हुए कहा:
विजय कुमार भुइयां ने कहा: “डूडलिंग आर्ट मानसिक तनाव को कम करने, एकाग्रता बढ़ाने और आत्म-अभिव्यक्ति को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि बच्चे नियमित रूप से ऐसी गतिविधियों में भाग लें तो उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता है।”
उन्होंने विद्यार्थियों को निरंतर अभ्यास करने और अपनी रचनात्मक क्षमताओं को पहचानने के लिए प्रेरित किया। उनके मार्गदर्शन से बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला।
शिक्षकों की सक्रिय भूमिका
इस कार्यक्रम में अन्नू गुप्ता और गीता कुमारी की गरिमामयी उपस्थिति रही। दोनों शिक्षिकाओं ने विद्यार्थियों की कलाकृतियों की सराहना करते हुए उन्हें आगे भी इस प्रकार की रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। शिक्षकों के सहयोग और मार्गदर्शन से कार्यक्रम को सफल और प्रभावशाली बनाया गया।
विद्यालय के प्राचार्य श्री संजय कुमार सिन्हा ने भी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए डूडलिंग आर्ट के शैक्षणिक और मानसिक लाभों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियां बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहायक होती हैं और भविष्य में उनकी नवाचार क्षमता को मजबूत करती हैं।
बैगलेस डे बना सीखने का आनंददायक माध्यम
कुल मिलाकर, बैगलेस डे के अवसर पर आयोजित यह डूडलिंग आर्ट कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए शिक्षाप्रद, आनंददायक और प्रेरणादायक अनुभव साबित हुआ। इससे न केवल बच्चों की कलात्मक प्रतिभा निखरी, बल्कि उनमें आत्मनिर्भरता, रचनात्मक सोच और आत्मविश्वास की भावना भी विकसित हुई।
न्यूज़ देखो: शिक्षा में नवाचार की सकारात्मक पहल
पीएम श्री योजना के तहत बैगलेस डे जैसे कार्यक्रम यह दर्शाते हैं कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है। डूडलिंग आर्ट जैसी गतिविधियां विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और सृजनात्मक विकास के लिए बेहद जरूरी हैं। विद्यालय द्वारा इस प्रकार की पहल सराहनीय है और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकती है।
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रचनात्मक बनें, सीखने को बनाएं आनंददायक
जब शिक्षा में कला और रचनात्मकता जुड़ती है, तब सीखना बोझ नहीं बल्कि आनंद बन जाता है। ऐसे कार्यक्रम बच्चों को भविष्य के लिए आत्मविश्वासी और नवाचारी नागरिक बनाते हैं।
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