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महुआडांड़ के छगराही स्कूल में पेयजल संकट, बंद जलमीनार के कारण नदी का पानी पीने को मजबूर बच्चे

#महुआडांड़ #पेयजल_संकट : लाखों की लागत से बना जलमीनार बंद, बच्चों के स्वास्थ्य पर खतरा।

लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड अंतर्गत दूरूप पंचायत के छगराही गांव स्थित उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय में पेयजल संकट गहराया हुआ है। लाखों की लागत से बना जलमीनार बंद पड़ा है, जिससे बच्चे नदी का असुरक्षित पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की है।

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  • उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय, छगराही में पेयजल की गंभीर समस्या।
  • लाखों की लागत से बना जलमीनार पूरी तरह बंद।
  • बच्चे नदी का गंदा पानी पीने को मजबूर।
  • मिड-डे मील भी असुरक्षित पानी से तैयार होने का आरोप।
  • ग्रामीणों ने आंदोलन की दी चेतावनी।

लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड के दूरूप पंचायत अंतर्गत छगराही गांव स्थित उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यहां पढ़ने वाले मासूम बच्चों को बुनियादी सुविधा—पेयजल—के लिए रोज जूझना पड़ रहा है। विद्यालय परिसर के ठीक बगल में लाखों रुपये की लागत से बना जलमीनार खड़ा है, लेकिन वह शोपीस बनकर रह गया है।

जलमीनार बंद, सिस्टम फेल

विद्यालय में स्थापित जलमीनार से नलों में पानी नहीं आ रहा है। टंकी खाली पड़ी है और मोटर काम नहीं कर रही। परिणामस्वरूप बच्चों को रोजाना नदी का पानी पीना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार संबंधित विभाग को सूचना दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

स्कूल में पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चे मजबूरी में असुरक्षित जल का सेवन कर रहे हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।

बीमार पड़ रहे बच्चे

ग्रामीणों के अनुसार, नदी का पानी पीने से कई बच्चे पेट दर्द, बुखार और संक्रमण जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं। इसके बावजूद शिक्षा विभाग और पेयजल विभाग की ओर से कोई पहल नहीं की गई है। शिकायतें करने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जलमीनार की मरम्मत कर दी जाती, तो बच्चों को इस परेशानी से नहीं गुजरना पड़ता। बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला होने के बावजूद प्रशासन की चुप्पी सवाल खड़े कर रही है।

मिड-डे मील पर भी संकट

स्थिति की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि विद्यालय में बनने वाला मध्याह्न भोजन भी नदी के पानी से तैयार किया जा रहा है। ऐसे में बच्चों के पोषण कार्यक्रम पर भी खतरा मंडरा रहा है। स्वच्छ जल के अभाव में मिड-डे मील योजना का उद्देश्य भी प्रभावित हो रहा है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द जलमीनार चालू नहीं किया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगे। उनका कहना है कि बच्चों की सेहत के साथ लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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संकट के बीच खुशियों की झलक

इन तमाम अव्यवस्थाओं के बीच विद्यालय के प्राचार्य सुरेश चोराठ ने बच्चों के बीच स्कूल ड्रेस का वितरण किया। नई ड्रेस पाकर बच्चों के चेहरे खिल उठे। तालियों और मुस्कान के बीच कुछ समय के लिए जल संकट की चिंता पीछे छूट गई।

हालांकि, अभिभावकों का कहना है कि ड्रेस वितरण सराहनीय पहल है, लेकिन मूल समस्या—पेयजल—का समाधान होना अधिक जरूरी है।

न्यूज़ देखो: बुनियादी सुविधाओं पर कब होगा ठोस कदम

ग्रामीण स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। जब जलमीनार जैसी योजनाएं धरातल पर बंद पड़ी रहें, तो बच्चों के भविष्य पर असर पड़ना स्वाभाविक है। प्रशासन को प्राथमिकता के आधार पर समाधान सुनिश्चित करना होगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

बच्चों का हक, सुरक्षित भविष्य

स्वच्छ पेयजल हर बच्चे का अधिकार है। सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित हों।

आइए, हम सब मिलकर बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए आवाज उठाएं।

आप इस मुद्दे पर अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें और खबर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं।

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