
#सिमडेगा #मानवीय_सेवा : गंभीर अवस्था में भर्ती मरीजों को जेएमएम युवा कार्यकर्ताओं की सक्रियता से समय रहते रक्त उपलब्ध कराया गया।
सिमडेगा सदर अस्पताल में भर्ती दो मरीजों को गंभीर स्थिति में B प्लस रक्त की तत्काल आवश्यकता थी। समय पर रक्त उपलब्ध नहीं होने से स्थिति चिंताजनक हो गई थी। इसी बीच जेएमएम युवा कार्यकर्ताओं की तत्परता और समन्वय से रक्त की व्यवस्था कर मरीजों की जान बचाई जा सकी। यह घटना मानवीय सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई।
- सदर अस्पताल सिमडेगा में भर्ती मरीजों को B+ रक्त की तत्काल आवश्यकता।
- अंजली बाड़ा और सौरव कुमार इलाज के दौरान गंभीर अवस्था में थे।
- जेएमएम युवा कार्यकर्ताओं की सक्रियता से समय पर रक्त की व्यवस्था।
- जिला परिषद अध्यक्ष के पीए वैभव कुमार ने निभाई अहम भूमिका।
- अस्पताल प्रशासन और स्थानीय लोगों ने की पहल की सराहना।
सिमडेगा सदर अस्पताल में उस समय अफरा-तफरी की स्थिति बन गई, जब भर्ती दो मरीजों को गंभीर अवस्था में B प्लस रक्त की तत्काल आवश्यकता पड़ी। अस्पताल में उस समय आवश्यक रक्त उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी। परिजनों की चिंता बढ़ती जा रही थी और समय के साथ हालात और नाजुक हो रहे थे।
मरीजों की हालत बनी चिंताजनक
मिली जानकारी के अनुसार, अंजली बाड़ा और सौरव कुमार इलाज के दौरान ऐसे चरण में पहुंच गए थे, जहां रक्त चढ़ाना अत्यंत आवश्यक हो गया था। डॉक्टरों ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि समय पर रक्त नहीं मिला, तो मरीजों की जान को गंभीर खतरा हो सकता है। ऐसे में परिजनों द्वारा हर संभव प्रयास किया जा रहा था, लेकिन तत्काल रक्त की व्यवस्था नहीं हो पा रही थी।
सूचना मिलते ही सक्रिय हुए जेएमएम युवा कार्यकर्ता
स्थिति की जानकारी जैसे ही झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) से जुड़े युवा कार्यकर्ताओं तक पहुंची, उन्होंने बिना देर किए पहल शुरू की। मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी को प्राथमिकता देते हुए युवा कार्यकर्ताओं ने रक्त की व्यवस्था के लिए त्वरित संपर्क और समन्वय किया।
इस दौरान जिला परिषद अध्यक्ष के पीए वैभव कुमार ने विशेष तत्परता दिखाई। उन्होंने अपने स्तर से प्रयास कर B प्लस रक्त की व्यवस्था सुनिश्चित कराई। उनके प्रयासों से समय रहते मरीजों को आवश्यक रक्त उपलब्ध कराया जा सका।
समय पर रक्त मिलने से बची जान
रक्त उपलब्ध होते ही चिकित्सकों ने तत्काल मरीजों को रक्त चढ़ाया, जिसके बाद उनकी स्थिति में सुधार देखा गया। डॉक्टरों के अनुसार, यदि कुछ समय और देरी होती, तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। समय पर रक्त मिलना मरीजों के लिए जीवन रक्षक साबित हुआ।
मरीजों के परिजनों ने राहत की सांस ली और इस मानवीय पहल के लिए जेएमएम युवा कार्यकर्ताओं एवं सहयोगियों का आभार जताया।
मानवता की मिसाल बनी यह पहल
यह पूरा घटनाक्रम केवल एक रक्तदान की व्यवस्था नहीं, बल्कि “जान सेवा” की भावना का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया। जेएमएम से जुड़े युवा कार्यकर्ताओं ने यह साबित किया कि राजनीतिक पहचान से ऊपर मानवता है और जरूरत के समय एकजुट होकर सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आज के समय में जब लोग अक्सर अपने कामों में व्यस्त रहते हैं, ऐसे में इस तरह की त्वरित और निस्वार्थ मदद समाज में सकारात्मक संदेश देती है।
अस्पताल प्रशासन और स्थानीय लोगों की सराहना
इस मानवीय पहल की सदर अस्पताल प्रशासन द्वारा भी सराहना की गई। अस्पताल कर्मियों ने कहा कि यदि समाज और जनप्रतिनिधि इस तरह सहयोग करें, तो आपात स्थितियों में मरीजों को समय पर मदद मिल सकती है।
स्थानीय नागरिकों ने भी जेएमएम युवा कार्यकर्ताओं की सक्रियता की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास युवाओं को समाज के प्रति और अधिक जिम्मेदार बनाते हैं।
न्यूज़ देखो: संकट में काम आई मानवीय संवेदना
सिमडेगा सदर अस्पताल की यह घटना बताती है कि संकट की घड़ी में यदि संवेदनशीलता और तत्परता हो, तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। रक्त की कमी जैसी समस्याओं से निपटने में सामाजिक संगठनों और जागरूक युवाओं की भूमिका बेहद अहम है। यह पहल समाज में सहयोग, सेवा और मानवता की भावना को मजबूत करती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सेवा और संवेदना से ही बनता है बेहतर समाज
जरूरत के समय एक कदम आगे बढ़ाना किसी की जिंदगी बचा सकता है। यदि आप भी रक्तदान कर सकते हैं या किसी जरूरतमंद की मदद कर सकते हैं, तो अवश्य आगे आएं। इस खबर को साझा करें और समाज में सेवा की इस भावना को और मजबूत बनाएं।





