
#बोकारो #डुमरी #भेड़रां_मेला : पारंपरिक कारीगरी, स्थानीय उद्योग और आजीविका से जुड़ा ऐतिहासिक मेला, आधुनिक विकास की ओर बढ़ता कदम।
गिरिडीह जिले में 94 वर्षों से चली आ रही ऐतिहासिक और पारंपरिक भेड़रां मेला को आज नई पहचान मिली, जब माननीय डुमरी विधायक श्री जयराम कुमार महतो ने मेले का विधिवत उद्घाटन किया। लौह-युक्त उत्पादों, पारंपरिक औजारों और स्थानीय कारीगरी के लिए प्रसिद्ध यह मेला न केवल सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, बल्कि स्थानीय कारीगरों और श्रमिकों की आजीविका का मजबूत आधार भी रहा है।
- 94 वर्षों पुरानी परंपरा वाला ऐतिहासिक भेड़रां मेला
- लौह-युक्त औजारों और पारंपरिक कारीगरी के लिए प्रसिद्ध
- लोहार समुदाय, श्रमिकों और व्यापारियों की आजीविका का केंद्र
- औद्योगिक पार्क के रूप में विकसित करने की विधायक की पहल
- स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर
पारंपरिक मेले से आधुनिक पहचान की ओर
भेड़रां मेला वर्षों से पारंपरिक औजारों, कृषि उपकरणों और लोहे से बने उपयोगी उत्पादों के लिए पूरे क्षेत्र में जाना जाता रहा है। यहां निर्मित औजार आज भी अपनी मजबूती, गुणवत्ता और उपयोगिता के लिए खास पहचान रखते हैं। यह मेला केवल खरीद-बिक्री का केंद्र नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही कारीगरी और हुनर का जीवंत उदाहरण है।
औद्योगिक पार्क के रूप में विकास का प्रस्ताव
मेले की औद्योगिक और आर्थिक संभावनाओं को देखते हुए विधायक जयराम कुमार महतो ने बताया कि पिछले विधानसभा सत्र में उन्होंने भेड़रां मेला क्षेत्र को औद्योगिक पार्क के रूप में विकसित करने का मुद्दा मजबूती से सदन में उठाया था। उनका कहना है कि योजनाबद्ध विकास से इस क्षेत्र को नई दिशा मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि यदि भेड़रां क्षेत्र को आधुनिक सुविधाओं, बेहतर बाजार व्यवस्था और आधारभूत संरचना से जोड़ा जाए, तो यह स्थानीय कारीगरों को स्थायी बाजार, युवाओं को रोजगार और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर सकता है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़
विधायक जयराम कुमार महतो ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भेड़रां मेला
“केवल एक मेला नहीं, बल्कि स्थानीय कारीगरों, श्रमिकों और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को सशक्त करने का मजबूत आधार है।”
उन्होंने इस ऐतिहासिक पहचान को संरक्षित रखते हुए आधुनिक विकास से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।
जनसहभागिता और उत्साह
उद्घाटन अवसर पर बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, कारीगर, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल को क्षेत्र के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास के लिए दूरदर्शी कदम बताया।
न्यूज़ देखो: परंपरा और विकास का संगम
भेड़रां मेला आज भी परंपरा, कारीगरी और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। यदि इसे औद्योगिक पार्क के रूप में विकसित किया जाता है, तो यह क्षेत्र के लिए विकास का नया द्वार खोल सकता है। सवाल यही है कि क्या यह ऐतिहासिक मेला आने वाले समय में आधुनिक उद्योग और रोजगार का केंद्र बन पाएगा। हर अपडेट पर रहेगी हमारी नजर।
परंपरा का सम्मान, भविष्य की तैयारी
स्थानीय कारीगरी को बढ़ावा और रोजगार का विस्तार—
भेड़रां मेला नई पहचान की ओर बढ़ रहा है।
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