
#डुमरी #पेयजल_संकट : ग्रामीणों की शिकायत पर इंटेकवेल निरीक्षण — महीनों से जलापूर्ति ठप होने का आरोप।
गिरिडीह जिले के डुमरी क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति ठप होने को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। झारखंड एकता किसान मजदूर यूनियन के केंद्रीय अध्यक्ष गंगाधर महतो के नेतृत्व में इंटेकवेल का निरीक्षण किया गया। ग्रामीणों ने कई गांवों में महीनों से पानी नहीं मिलने की शिकायत की। इस मुद्दे पर जल्द समाधान की मांग उठी है।
- डुमरी क्षेत्र में पेयजल संकट, कई गांवों में महीनों से आपूर्ति बंद।
- गंगाधर महतो के नेतृत्व में इंटेकवेल का निरीक्षण।
- रांगामाटी, बरमसिया में चार साल से पानी नहीं मिलने का आरोप।
- खेराटुंडा, रोशनाटुंडा में भी जलापूर्ति ठप होने की शिकायत।
- ग्रामीणों ने कहा पाइप बिछने के बावजूद नहीं मिल रहा पानी।
- यूनियन ने जल्द समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।
गिरिडीह जिले के डुमरी प्रखंड में पेयजल संकट को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। लंबे समय से पानी की आपूर्ति बाधित होने के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी को लेकर झारखंड एकता किसान मजदूर यूनियन के पदाधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
इंटेकवेल का किया गया निरीक्षण
ग्रामीणों के आग्रह पर पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल गिरिडीह-2 के तहत बनाए गए इंटेकवेल का निरीक्षण करने के लिए यूनियन के केंद्रीय अध्यक्ष गंगाधर महतो पहुंचे। उनके साथ लक्ष्मण टुंडा सहित अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं विस्तार से बताईं और आरोप लगाया कि विभाग द्वारा बनाई गई योजनाएं जमीन पर प्रभावी नहीं हैं।
कई गांवों में वर्षों से जलापूर्ति बाधित
ग्रामीणों ने बताया कि रांगामाटी और बरमसिया गांवों में पाइपलाइन बिछाए जाने के बावजूद पिछले चार वर्षों से पानी की आपूर्ति नहीं की जा रही है। वहीं खेराटुंडा में पिछले पांच से छह महीनों से पानी सप्लाई पूरी तरह बंद है।
इसके अलावा रोशनाटुंडा के ग्रामीणों ने भी शिकायत की कि लंबे समय से जलापूर्ति नहीं हो रही है, जिससे रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो गया है।
ग्रामीणों ने कहा: “पाइपलाइन बिछी हुई है, लेकिन पानी नहीं मिलता, जिससे हमें भारी परेशानी हो रही है।”
किसानों और मजदूरों को सबसे ज्यादा परेशानी
पानी की कमी का सबसे अधिक असर किसानों और मजदूरों पर पड़ रहा है। खेती, पशुपालन और घरेलू उपयोग के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलने से लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है।
यूनियन के नेताओं ने कहा कि यह स्थिति गंभीर है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
यूनियन ने दी चेतावनी
निरीक्षण के दौरान यूनियन के केंद्रीय अध्यक्ष गंगाधर महतो ने कहा कि यदि जल्द ही जलापूर्ति बहाल नहीं की गई तो संगठन आंदोलन करने को मजबूर होगा।
गंगाधर महतो ने कहा: “ग्रामीणों की मूलभूत जरूरतों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी, जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन तेज किया जाएगा।”
कई पदाधिकारी और ग्रामीण रहे मौजूद
इस मौके पर यूनियन के केंद्रीय उपाध्यक्ष भगतु रविदास उर्फ रवि कुमार, केंद्रीय महासचिव रवींद्र कुमार, प्रखंड अध्यक्ष राजेंद्र यादव, प्रखंड महासचिव भोला मिस्त्री, विजय रविदास, अजय कुमार यादव और संजय कुमार ठाकुर सहित कई गणमान्य ग्रामीण उपस्थित थे।
सभी ने एकजुट होकर प्रशासन से समस्या के त्वरित समाधान की मांग की।
विभागीय लापरवाही पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि योजनाएं तो बनाई जाती हैं, लेकिन उनका सही क्रियान्वयन नहीं होता, जिससे आम जनता को लाभ नहीं मिल पाता।
न्यूज़ देखो: मूलभूत जरूरतों पर गंभीर लापरवाही
डुमरी का यह मामला बताता है कि आज भी कई ग्रामीण इलाकों में पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा पूरी तरह से उपलब्ध नहीं है। चार-चार साल तक पाइपलाइन होने के बावजूद पानी नहीं मिलना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। अब यह देखना होगा कि संबंधित विभाग इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेता है और कब तक इसका स्थायी समाधान करता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
पानी है जीवन, इसे सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी
पानी हर इंसान की बुनियादी जरूरत है और इसका अभाव जीवन को कठिन बना देता है। डुमरी के ग्रामीणों की स्थिति हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम सभी तक समान रूप से सुविधाएं पहुंचा पा रहे हैं।
आइए, हम इस मुद्दे को गंभीरता से लें और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं। प्रशासन से जवाब मांगें और जरूरत पड़ने पर एकजुट होकर समाधान की दिशा में कदम बढ़ाएं।
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