#महुआडांड़ #शिक्षा_संकट : संत जोसेफ +2 विद्यालय में ही 350 छात्र उपस्थिति कम होने से फॉर्म भरने से वंचित होने की आशंका—अभिभावक व विद्यार्थी में बढ़ी बेचैनी
- JAC के 75% उपस्थिति नियम से मैट्रिक–इंटर के सैकड़ों छात्रों पर परीक्षा न देने का खतरा।
- संत जोसेफ +2 विद्यालय, महुआडांड़ में करीब 350 विद्यार्थी फॉर्म भरने से वंचित।
- पूरे प्रखंड में यह संख्या 500 से अधिक होने का अनुमान।
- दूर-दराज के गाँव व आर्थिक दिक्कतें—कम उपस्थिति की प्रमुख वजह।
- विद्यार्थी–अभिभावक में तनाव, मानवीय छूट व शपथ-पत्र आधारित फॉर्म स्वीकारने की मांग।
- मामले में जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग के तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत।
महुआडांड़। झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) द्वारा लागू की गई 75% अनिवार्य उपस्थिति की शर्त ने महुआडांड़ प्रखंड में शिक्षा को लेकर गंभीर संकट पैदा कर दिया है। विशेष रूप से संत जोसेफ +2 विद्यालय के लगभग 350 छात्र-छात्राएं इस नियम के कारण मैट्रिक और इंटर बोर्ड परीक्षा से वंचित होने की कगार पर पहुँच गए हैं। परीक्षा फॉर्म भरने की अंतिम तिथि नजदीक है, जिससे बच्चों और अभिभावकों की चिंता कई गुना बढ़ गई है।
JAC के कठोर नियम से बढ़ी मुश्किलें
हाल ही में JAC ने निर्देश जारी किया है कि केवल उन्हीं नियमित छात्रों के फॉर्म स्वीकार किए जाएं, जिनकी उपस्थिति कम से कम 75% हो। संत जोसेफ विद्यालय के रिकॉर्ड में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की उपस्थिति निर्धारित मानक से कम पाई गई, जिसके कारण फॉर्म भरने में तकनीकी बाधाएँ उत्पन्न हो रही हैं।
विद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह समस्या सिर्फ एक स्कूल तक सीमित नहीं है। महुआडांड़ प्रखंड के सभी सरकारी व गैर-सरकारी स्कूलों का डेटा जोड़ा जाए तो परीक्षा से वंचित होने वाले छात्रों की संख्या 500 के पार पहुँच सकती है।
बच्चों और अभिभावकों में तनाव—भविष्य पर संकट
कम उपस्थिति वाले छात्रों पर परीक्षा से बाहर होने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे वे गहरे तनाव में हैं। कई विद्यार्थी बताते हैं कि वे बोर्ड परीक्षा की तैयारी में पूरी तरह जुटे थे, लेकिन अचानक आए इस नियम से उनका भविष्य दांव पर लग गया है।
दूर-दराज के इलाकों से आने वाले छात्रों ने कहा कि लंबी दूरी, बारिश के दिनों में रास्तों की हालत और आर्थिक समस्याओं के कारण रोज स्कूल पहुँचना संभव नहीं हो पाया। अभिभावकों का कहना है कि उनकी सीमित आय और ग्रामीण परिस्थितियाँ बच्चों की उपस्थिति को प्रभावित करती हैं।
क्या कह रहे हैं छात्र–अभिभावक?
विद्यार्थियों और उनके माता-पिता ने JAC व राज्य सरकार से इस वर्ष मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगें हैं—
- इस साल 75% नियम में विशेष छूट दी जाए।
- विलंबित फॉर्म स्वीकार किए जाएं।
- कम उपस्थिति वाले छात्रों को शपथ पत्र देकर फॉर्म भरने की अनुमति मिले।
क्या कर सकते हैं विद्यालय और प्रशासन?
स्थानीय शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि विद्यालयों को चाहिए कि वे कम उपस्थिति वाले बच्चों के मामलों को JAC के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उठाएं, ताकि विशेष अनुमति लेकर इन छात्रों को परीक्षा में शामिल कराया जा सके।
प्रखंड स्तर पर यह समस्या इतनी बड़ी हो चुकी है कि अब जिला प्रशासन और राज्य शिक्षा विभाग को हस्तक्षेप करना होगा। यदि समय रहते निर्णय नहीं लिया गया तो सैकड़ों बच्चों का शैक्षणिक भविष्य बर्बाद हो सकता है।
न्यूज़ देखो: शिक्षा व्यवस्था में लचीलापन जरूरी—नियम से पहले ज़मीनी वास्तविकता देखें
ग्रामीण इलाकों में शिक्षा संसाधन सीमित हैं, दूरी और आर्थिक समस्याएँ उपस्थिति को प्रभावित करती हैं। ऐसे में 75% उपस्थिति का नियम सही है, पर इसके क्रियान्वयन में मानव संवेदना की कमी विद्यार्थियों का भविष्य रोक सकती है। प्रशासन को तत्काल समाधान निकालना चाहिए, ताकि मेहनत कर रहे छात्र अपनी बोर्ड परीक्षा दे सकें।
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छात्रों की सुनें—उनके भविष्य को प्राथमिकता दें
शिक्षा अधिकार है, अवसर नहीं। ऐसे समय में समाज, विद्यालय और प्रशासन का दायित्व है कि कोई भी बच्चा बोर्ड परीक्षा से वंचित न हो। अपने क्षेत्र में ऐसी समस्या दिखे तो विद्यालय व प्रशासन से संवाद करें और बच्चों के हित में आवाज उठाएं।
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