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राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय कुसुम बानो में सेवानिवृत शिक्षिका दयामनी समद को भावपूर्ण विदाई

#बानो #विदाई_समारोह : शिक्षिका दयामनी समद के सम्मान में विद्यालय परिवार और ग्रामीणों ने मिलकर आयोजित किया गरिमामय कार्यक्रम
  • राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय कुसुम बानो में शिक्षिका दयामनी समद के सम्मान में विदाई समारोह।
  • झारखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ सिमडेगा के जिला अध्यक्ष मनोज कुमार भगत ने शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया।
  • विद्यालय परिवार ने स्मृतिचिह्न भेंट कर दी शुभकामनाएँ।
  • ग्रामीणों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
  • वक्ताओं ने शिक्षिका की सरलता, निष्ठा और योगदान को याद करते हुए दी भावपूर्ण विदाई।

बानो, सिमडेगा। प्रखंड क्षेत्र के राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय कुसुम बानो में शुक्रवार को सेवानिवृत शिक्षिका श्रीमती दयामनी समद के सम्मान में एक गरिमामय और भावनात्मक विदाई समारोह का आयोजन किया गया। विद्यालय परिवार के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों और विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर समारोह को खास बना दिया।

समारोह की शुरुआत अतिथियों के स्वागत और शिक्षिका के दीर्घ सेवाकाल को याद करने के साथ हुई। मंच पर उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि श्रीमती दयामनी समद ने अपने कार्यकाल में न सिर्फ शिक्षा प्रदान की, बल्कि अनुशासन, संवेदना और मानवीय मूल्यों की उत्कृष्ट सीख भी दी।

सम्मान और शुभकामनाओं से भरा आयोजन

झारखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ, सिमडेगा के जिला अध्यक्ष मनोज कुमार भगत ने श्रीमती समद को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया और उनके अथक प्रयासों, समर्पण और सेवाभाव की सराहना की। विद्यालय परिवार की ओर से उन्हें स्मृतिचिह्न भेंट कर उज्ज्वल और स्वस्थ भविष्य की कामना की गई।

समारोह में वक्ताओं ने कहा कि श्रीमती दयामनी समद का योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उनकी सरलता, संवेदनशीलता और विद्यार्थियों के प्रति मातृसुलभ स्वभाव हमेशा स्मरणीय रहेंगे।

विद्यार्थियों और ग्रामीणों की भावनात्मक भागीदारी

विद्यार्थियों ने शिक्षिका के साथ बिताए पलों को याद करते हुए तालियों और स्वागत गीतों के माध्यम से अपना प्रेम व्यक्त किया। ग्रामीणों ने भी कहा कि श्रीमती समद ने शिक्षा के माध्यम से गांव के बच्चों के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

वातावरण भावुकता और सम्मान से भर गया जब शिक्षिका ने स्वयं भी विद्यालय परिवार और ग्रामीणों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।

न्यूज़ देखो: शिक्षा में समर्पण का प्रेरक उदाहरण

दयामनी समद जैसी शिक्षिकाएँ ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ होती हैं, जो वर्षों तक समाज के भविष्य को संवारने में लगी रहती हैं। उनकी सेवाएँ आने वाले समय में भी प्रेरणा देती रहेंगी। ऐसे आयोजन शिक्षकों के सम्मान को और मजबूत बनाते हैं।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

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गुरु सम्मान ही समाज का सम्मान—आइए शिक्षकों को प्रेरणा दें

समाज में शिक्षकों का योगदान अमूल्य है।
ऐसे सम्मान समारोह से युवा पीढ़ी को भी प्रेरणा मिलती है।
आप भी कमेंट कर बताएं—आपके पसंदीदा शिक्षक कौन हैं और उन्होंने आपको क्या सीख दी?
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Shivnandan Baraik

बानो, सिमडेगा

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