Latehar

नई शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षकों का सशक्तिकरण, चंदवा में विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित

#चंदवा #शिक्षा_नीति : एनईपी 2020 और एनसीएफ 2023 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर शिक्षकों को व्यवहारिक प्रशिक्षण।

लातेहार जिले के चंदवा में नई शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया गया। ग्लिटर त्रिवेणी पब्लिक स्कूल परिसर में हुई इस एकदिवसीय कार्यशाला में शिक्षण पद्धतियों को आधुनिक और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने पर जोर दिया गया। दिल्ली से आए वरिष्ठ शिक्षाविद् कमल कांडपाल ने शिक्षकों को नई नीति के व्यवहारिक पहलुओं से अवगत कराया। यह कार्यक्रम शिक्षकों को समयानुकूल और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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  • ग्लिटर त्रिवेणी पब्लिक स्कूल, चंदवा में एकदिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला।
  • नई शिक्षा नीति 2020 और एनसीएफ 2023 के प्रावधानों पर फोकस।
  • दिल्ली के वरिष्ठ शिक्षाविद् कमल कांडपाल ने किया मार्गदर्शन।
  • गतिविधि आधारित और विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण पर विशेष बल।
  • प्रधानाचार्य हिमांशु सिंह ने कार्यशाला को बताया उपयोगी।
  • निदेशिका कादम्बरी सिंह के मार्गदर्शन में सफल आयोजन।

चंदवा स्थित ग्लिटर त्रिवेणी पब्लिक स्कूल परिसर में नई शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर शिक्षकों के लिए एकदिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस शैक्षणिक कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को नवीन शिक्षण पद्धतियों से अपडेट करना और कक्षा शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाना रहा।

इस कार्यशाला का आयोजन रचना सागर पब्लिकेशन के तत्वावधान में किया गया, जिसमें दिल्ली से आए वरिष्ठ शिक्षाविद् श्री कमल कांडपाल ने मुख्य प्रशिक्षक के रूप में अपनी भूमिका निभाई। कार्यक्रम में विद्यालय के सभी शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता निभाई और नई शिक्षा नीति से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गहन चर्चा की।

नई शिक्षा नीति और एनसीएफ 2023 पर विस्तृत चर्चा

कार्यशाला के दौरान नई शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 के मूल उद्देश्यों, दृष्टिकोण और व्यवहारिक पक्षों पर विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशिक्षक श्री कमल कांडपाल ने बताया कि नई शिक्षा नीति का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों के नैतिक, सामाजिक, बौद्धिक और भावनात्मक विकास को भी समान महत्व देती है। उन्होंने शिक्षकों को पारंपरिक रटंत शिक्षा से आगे बढ़कर नवाचार आधारित शिक्षण अपनाने के लिए प्रेरित किया।

गतिविधि आधारित और अनुभवात्मक शिक्षण पर जोर

कार्यशाला में गतिविधि आधारित शिक्षण, अनुभवात्मक सीखने, परियोजना कार्य, समूह चर्चा और समस्या समाधान आधारित शिक्षण पद्धतियों पर विशेष फोकस किया गया। प्रशिक्षक ने उदाहरणों के माध्यम से बताया कि किस प्रकार कक्षा में रोचक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों की समझ और रुचि को बढ़ाया जा सकता है।

श्री कांडपाल ने कहा,

“शिक्षक की भूमिका अब केवल ज्ञान देने वाले की नहीं, बल्कि मार्गदर्शक और सुगमकर्ता की होनी चाहिए।”

उन्होंने शिक्षकों को आलोचनात्मक चिंतन और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देने वाली शिक्षण विधियों को अपनाने की सलाह दी।

प्रधानाचार्य और निदेशिका ने जताई संतुष्टि

इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री हिमांशु सिंह ने कार्यशाला की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को समय के अनुरूप अपडेट रखने में सहायक होते हैं। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रशिक्षित और जागरूक शिक्षक अत्यंत आवश्यक हैं।

वहीं विद्यालय की निदेशिका श्रीमती कादम्बरी सिंह ने रचना सागर पब्लिकेशन और मुख्य प्रशिक्षक का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यालय सदैव गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शिक्षक विकास को प्राथमिकता देता रहा है। उनके मार्गदर्शन में इस कार्यशाला का सफल आयोजन संपन्न हुआ।

शिक्षा गुणवत्ता सुधार की दिशा में सकारात्मक पहल

गौरतलब है कि ग्लिटर त्रिवेणी पब्लिक स्कूल में समय-समय पर इस प्रकार के शैक्षणिक प्रशिक्षण और कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है। इन प्रयासों से न केवल शिक्षकों की शिक्षण क्षमता में वृद्धि होती है, बल्कि विद्यार्थियों को भी आधुनिक, प्रभावी और मूल्यपरक शिक्षा प्राप्त होती है।

क्षेत्र के शिक्षाविदों और अभिभावकों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए इसे शिक्षा की गुणवत्ता सुधार की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया है।

न्यूज़ देखो: शिक्षा सुधार की जमीनी पहल

नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन को लेकर इस तरह की कार्यशालाएं यह दर्शाती हैं कि निजी विद्यालय भी शिक्षा सुधार में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। शिक्षकों को व्यवहारिक प्रशिक्षण देकर कक्षा शिक्षण को प्रभावी बनाया जा सकता है। अब देखना होगा कि इस प्रशिक्षण का दीर्घकालिक प्रभाव विद्यार्थियों के सीखने पर कैसे दिखाई देता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

शिक्षित शिक्षक, सशक्त भविष्य

शिक्षा का स्तर तभी ऊंचा उठता है जब शिक्षक निरंतर सीखते रहें। ऐसे प्रयासों को प्रोत्साहित करना समाज की जिम्मेदारी है। शिक्षा से जुड़ी सकारात्मक खबरों पर अपनी राय साझा करें, लेख को आगे बढ़ाएं और बेहतर शैक्षणिक माहौल के निर्माण में भागीदार बनें।

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Ravikant Kumar Thakur

चंदवा, लातेहार

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