Palamau

पलामू के सीताचुआं जंगलों में दहशत का अंत: नक्सली दस्ते पर कार्रवाई में टॉप कमांडर तुलसी भुइंया ढेर

#पलामू #नक्सली_मुठभेड़ – सीमा पार बड़ी साजिश को नाकाम करने जंगलों में घुसी पुलिस, नितेश यादव को लेकर सर्च ऑपरेशन तेज

  • पलामू के सीमावर्ती सीताचुआं इलाके में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच भारी मुठभेड़
  • टॉप नक्सली कमांडर तुलसी भुइंया मारा गया, मौके से SLR राइफल जब्त
  • 15 लाख के इनामी नक्सली नितेश यादव को गोली लगने की सूचना, आधिकारिक पुष्टि नहीं
  • मोहम्मदगंज-हैदरनगर सीमांत क्षेत्र में सोमवार शाम से मंगलवार सुबह तक चला ऑपरेशन
  • पलामू एसपी रीष्मा रमेशन के नेतृत्व में सर्च अभियान अभी भी जारी
  • 10 लाख का इनामी संजय गोदराम भी दस्ते में शामिल बताया गया

रणनीति और साहस से भरी जंगलों की जंग

सोमवार शाम करीब 7 बजे से शुरू हुआ यह सुरक्षा अभियान पलामू और बिहार की सीमा पर स्थित सीताचुआं जंगलों में चला, जहां नक्सल सरगना नितेश यादव अपने दस्ते के साथ डेरा जमाए हुए था। मोहम्मदगंज और हैदरनगर थाना क्षेत्र की पहाड़ियों में यह इलाका माओवादियों के लिए सुरक्षित गढ़ माना जाता है।

सुरक्षाबलों ने पुख्ता गुप्त सूचना पर कार्रवाई की, जिससे तुलसी भुइंया को मार गिराया गया। उसके शव के पास एक SLR राइफल बरामद हुई है। हालांकि नितेश यादव को गोली लगने की सूचना है, लेकिन पुलिस इसकी औपचारिक पुष्टि से बच रही है।

पलामू एसपी की अगुवाई में मोर्चाबंदी

इस बड़े ऑपरेशन का नेतृत्व पलामू एसपी रीष्मा रमेशन कर रही हैं। खुफिया एजेंसियों से इनपुट मिला था कि नितेश यादव किसी बड़ी साजिश की तैयारी में है। इसके बाद सीआरपीएफ, झारखंड जगुआर और जिला पुलिस की संयुक्त टुकड़ियों ने सीताचुआं को चारों ओर से घेर लिया।

इलाके की भूगोलिक जटिलता और नक्सल प्रभाव को देखते हुए यह ऑपरेशन काफी जोखिम भरा था। मगर सुरक्षाबलों की सटीक रणनीति और तेज़ प्रतिक्रिया ने स्थिति को नियंत्रण में रखा।

दस्ते में शामिल थे बड़े इनामी माओवादी

सूत्रों के अनुसार, मुठभेड़ के दौरान करीब आधा दर्जन माओवादी दस्ते में सक्रिय थे। इनमें 10 लाख का इनामी संजय गोदराम भी शामिल था। वहीं नितेश यादव, जो पिछले 15 वर्षों से पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ है, बिहार और झारखंड में कई हिंसक वारदातों का मास्टरमाइंड रह चुका है।

जंगलों में जारी है चौकसी और तलाशी

मुठभेड़ के बाद भी पूरे इलाके में सघन तलाशी अभियान जारी है। पुलिस को शक है कि कुछ नक्सली जंगलों में घायल या छिपे हो सकते हैं। आसपास के सभी गांवों की नाकेबंदी कर दी गई है, ताकि किसी भी संदिग्ध को बचने का मौका न मिले।

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