
#रांची #महादेवमठमांग : ऐतिहासिक धरोहर को विश्व पहचान दिलाने पर चर्चा हुई।
राजभवन रांची में चतरा विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक प्रत्याशी एवं सामाजिक कार्यकर्ता इंजी सुबोध पासवान ने राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से शिष्टाचार मुलाकात की। उन्होंने कुंदा प्रखंड स्थित ऐतिहासिक महादेव मठ बाबा बैजनाथ मंदिर को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने की मांग रखी। राज्यपाल ने विषय की गंभीरता स्वीकारते हुए संबंधित विभागों से रिपोर्ट मंगाने का आश्वासन दिया। इसे क्षेत्रीय पहचान और पर्यटन विकास से जुड़ा अहम मुद्दा बताया गया।
- इंजी सुबोध पासवान, पूर्व विधायक प्रत्याशी व JLKM नेता ने की मुलाकात।
- राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से राजभवन रांची में चर्चा।
- कुंदा प्रखंड स्थित महादेव मठ बाबा बैजनाथ मंदिर को विश्व धरोहर में शामिल करने की मांग।
- धरोहर के संरक्षण और पहचान को लेकर चिंता व्यक्त।
- राज्यपाल ने संबंधित विभागों से तथ्यात्मक रिपोर्ट मंगाने का आश्वासन दिया।
राजभवन रांची में हुई इस महत्वपूर्ण मुलाकात ने चतरा जिले के कुंदा प्रखंड स्थित ऐतिहासिक महादेव मठ बाबा बैजनाथ मंदिर को लेकर एक नई चर्चा को जन्म दिया है। चतरा विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक प्रत्याशी एवं सामाजिक कार्यकर्ता, JLKM नेता इंजी सुबोध पासवान ने राज्यपाल से मिलकर इस धरोहर को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने की मांग रखी। उन्होंने इसे केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बताया। मुलाकात के दौरान राज्यपाल ने भी विषय की गंभीरता को स्वीकार किया और आवश्यक पहल का आश्वासन दिया।
राजभवन में शिष्टाचार मुलाकात और मुख्य मांग
इंजी सुबोध पासवान ने झारखंड के माननीय राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से राजभवन रांची में शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कुंदा प्रखंड के ऐतिहासिक महादेव मठ बाबा बैजनाथ मंदिर को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने की औपचारिक मांग प्रस्तुत की।
उन्होंने राज्यपाल को बताया कि यह मठ न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि भी अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली रही है। उन्होंने कहा कि वर्षों से यह स्थल क्षेत्रीय पहचान का प्रतीक रहा है और हजारों श्रद्धालुओं की आस्था इससे जुड़ी हुई है।
इंजी सुबोध पासवान ने कहा: “महादेव मठ केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक पहचान का जीवंत प्रतीक है। इसे विश्व धरोहर सूची में शामिल कर संरक्षित किया जाना चाहिए।”
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर जोर
इंजी पासवान ने राज्यपाल को अवगत कराया कि महादेव मठ का इतिहास हजारों वर्षों पुराना माना जाता है। विभिन्न राजाओं और महापुरुषों द्वारा समय-समय पर इसके संरक्षण और विकास में योगदान दिया गया है।
उन्होंने कहा कि इस धरोहर का धार्मिक महत्व तो है ही, साथ ही यह क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां आयोजित होने वाले धार्मिक अनुष्ठान और पारंपरिक आयोजन स्थानीय समुदाय को एक सूत्र में बांधने का कार्य करते हैं।
उपेक्षा को लेकर चिंता
मुलाकात के दौरान इंजी सुबोध पासवान ने चिंता व्यक्त की कि पिछले कुछ वर्षों में इस ऐतिहासिक स्थल पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया है। उनके अनुसार, संरक्षण की कमी के कारण इसकी प्राचीन पहचान प्रभावित हो रही है।
इंजी सुबोध पासवान ने कहा: “यदि समय रहते संरक्षण और संवर्धन की ठोस पहल नहीं की गई, तो आने वाली पीढ़ियां अपनी इस अमूल्य धरोहर से वंचित हो सकती हैं।”
उन्होंने आग्रह किया कि राज्य सरकार और संबंधित विभाग इस दिशा में ठोस कदम उठाएं और विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया प्रारंभ करें।
राज्यपाल का आश्वासन
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने विषय की गंभीरता को समझते हुए कहा कि राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण सरकार की प्राथमिकता है।
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा: “राज्य की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है। संबंधित विभागों से तथ्यात्मक रिपोर्ट लेकर आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।”
उन्होंने संबंधित विभागों को इस विषय में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने और आवश्यक कार्रवाई की दिशा में पहल करने का आश्वासन दिया।
पर्यटन और रोजगार से जुड़ा मुद्दा
इंजी सुबोध पासवान ने कहा कि यह मांग केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय विकास का भी महत्वपूर्ण आधार बन सकती है। यदि महादेव मठ को विश्व धरोहर सूची में स्थान मिलता है, तो इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि पर्यटन विकास से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे और क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा। इससे सड़क, आधारभूत संरचना और अन्य सुविधाओं का विकास भी संभव होगा।
क्षेत्रीय पहचान को वैश्विक मंच पर लाने की पहल
मुलाकात के माध्यम से इंजी पासवान ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि स्थानीय धरोहरों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि झारखंड की कई ऐतिहासिक धरोहरें अभी भी व्यापक पहचान से वंचित हैं, जिन पर गंभीर पहल की जरूरत है।
इस संदर्भ में महादेव मठ को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने की मांग को क्षेत्रीय जनभावना से भी जोड़ा जा रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इससे चतरा जिले की पहचान मजबूत होगी।
न्यूज़ देखो: विरासत संरक्षण की दिशा में उठता महत्वपूर्ण कदम
राजभवन में हुई यह मुलाकात यह दर्शाती है कि क्षेत्रीय धरोहरों को संरक्षित करने की मांग अब गंभीर रूप ले रही है। यदि संबंधित विभाग तथ्यात्मक रिपोर्ट के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ाते हैं, तो यह झारखंड की सांस्कृतिक विरासत के लिए महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है। अब देखना होगा कि प्रशासनिक स्तर पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है और क्या यह पहल ठोस परिणाम तक पहुंचती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
विरासत बचाएं, भविष्य संवारें
हमारी ऐतिहासिक धरोहरें केवल पत्थर और इमारतें नहीं, बल्कि हमारी पहचान और इतिहास की जीवित कहानी हैं। उन्हें संरक्षित करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
जरूरत है कि समाज और प्रशासन मिलकर अपनी सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए आगे आएं।






