समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए जलडेगा में वातावरण अनुकूलन कार्यक्रम, दिव्यांग बच्चों ने कला और प्रतिभा से जीता दिल

समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए जलडेगा में वातावरण अनुकूलन कार्यक्रम, दिव्यांग बच्चों ने कला और प्रतिभा से जीता दिल

author Satyam Kumar Keshri
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#जलडेगा #समावेशी_शिक्षा : प्रखंड संसाधन केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में दिव्यांग बच्चों ने पेंटिंग, गायन और नृत्य के माध्यम से दिखाई अपनी प्रतिभा और आत्मविश्वास

सिमडेगा जिले के जलडेगा प्रखंड में समावेशी शिक्षा के तहत वातावरण अनुकूलन निर्माण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न विद्यालयों के दिव्यांग बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना और उनके आत्मविश्वास व प्रतिभा को मंच प्रदान करना रहा।

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  • प्रखंड संसाधन केंद्र, जलडेगा में समावेशी शिक्षा के तहत विशेष कार्यक्रम आयोजित।
  • विभिन्न विद्यालयों के दिव्यांग बच्चों, प्रधानाध्यापक एवं अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी।
  • पेंटिंग, गायन और नृत्य प्रतियोगिता में बच्चों ने दिखाई उत्कृष्ट प्रतिभा।
  • जमीला लुगुन, साहिल हीरो एवं भजन प्रधान को उत्कृष्ट प्रदर्शन पर सम्मानित किया गया।
  • कार्यक्रम में प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी मनमोहन कुमार गोस्वामी ने किया मार्गदर्शन।
  • जिला समन्वयक, रिसोर्स शिक्षक एवं शिक्षकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

सिमडेगा। जलडेगा प्रखंड मुख्यालय स्थित प्रखंड संसाधन केंद्र में समावेशी शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत वातावरण अनुकूलन निर्माण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जलडेगा प्रखंड के विभिन्न विद्यालयों में नामांकित दिव्यांग बच्चों, उनके अभिभावकों, प्रधानाध्यापकों तथा शिक्षकों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना, उनके भीतर आत्मविश्वास विकसित करना तथा उनके लिए अनुकूल शैक्षणिक वातावरण तैयार करना था।

कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने उत्साहपूर्वक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया और यह साबित किया कि अवसर मिलने पर दिव्यांग बच्चे भी किसी से कम नहीं होते। आयोजन ने समावेशी शिक्षा की भावना को मजबूत करने का महत्वपूर्ण संदेश दिया।

दिव्यांग बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने पर दिया गया विशेष जोर

कार्यक्रम में प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी मनमोहन कुमार गोस्वामी ने उपस्थित बच्चों, अभिभावकों एवं शिक्षकों को समावेशी शिक्षा के महत्व के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार सभी बच्चों के लिए समान है और दिव्यांग बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ उचित मार्गदर्शन और सहयोग मिलना चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि विद्यालयों में ऐसा वातावरण तैयार करना आवश्यक है, जहां दिव्यांग बच्चे सहज रूप से सीख सकें और अपनी क्षमताओं का विकास कर सकें।

पेंटिंग, गायन और नृत्य प्रतियोगिता में दिखा बच्चों का उत्साह

कार्यक्रम के अंतर्गत दिव्यांग बच्चों के लिए पेंटिंग, गायन एवं नृत्य प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। बच्चों ने पूरे आत्मविश्वास और उत्साह के साथ इन गतिविधियों में भाग लिया।
रंगों से सजी पेंटिंग, मधुर गायन और मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियों ने उपस्थित सभी लोगों का मन मोह लिया। अभिभावकों और शिक्षकों ने बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

इन प्रतियोगिताओं का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि बच्चों की छिपी प्रतिभा को पहचानना और उन्हें मंच प्रदान करना भी था, ताकि वे आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बन सकें।

उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को किया गया सम्मानित

कार्यक्रम में बेहतर प्रदर्शन करने वाले बच्चों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
प्रथम स्थान प्राप्त करने वालों में संत जेवियर विद्यालय जलडेगा की जमीला लुगुन, राजकीय कृत उत्क्रमित मध्य विद्यालय तिलाई जरा के साहिल हीरो तथा राजकीय कृत मध्य विद्यालय लमडेगा के भजन प्रधान को पुरस्कृत किया गया।
पुरस्कार वितरण के दौरान बच्चों के चेहरे पर खुशी और गर्व साफ झलक रहा था, जिससे कार्यक्रम का वातावरण और भी प्रेरणादायक बन गया।

शिक्षकों और समन्वयकों की रही महत्वपूर्ण भूमिका

इस अवसर पर रिसोर्स शिक्षक रोहित कुमार पटेल (टाटा सिन्नी) से जिला समन्वयक इम्तियाज अंसारी, मांगा मुंडा, शेखर महतो, शिक्षिका पार्वती कुमारी, मनोज गुप्ता, अमित कुमार दास, किशोर सिंह तथा संकुल साधन सेवी भगवती प्रसाद समेत कई शिक्षक एवं शिक्षा कर्मी उपस्थित रहे।
सभी शिक्षकों ने मिलकर बच्चों का मार्गदर्शन किया और उनके साथ संवाद कर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

समावेशी शिक्षा से मजबूत होगा शिक्षा का आधार

समावेशी शिक्षा का उद्देश्य केवल शिक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि हर बच्चे को समान अवसर देना है। ऐसे कार्यक्रम दिव्यांग बच्चों को सामाजिक रूप से सशक्त बनाते हैं और उन्हें आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं।
विद्यालयों में अनुकूल वातावरण, विशेष शिक्षकों की उपलब्धता और अभिभावकों की सहभागिता से ही समावेशी शिक्षा को वास्तविक रूप दिया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रारंभिक स्तर पर ही दिव्यांग बच्चों को सही दिशा, संसाधन और सहयोग मिले, तो वे शिक्षा, कला, खेल और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।

न्यूज़ देखो: समावेशी शिक्षा की दिशा में सकारात्मक पहल

जलडेगा में आयोजित यह कार्यक्रम शिक्षा के क्षेत्र में एक सराहनीय कदम है, जो समाज में समानता और संवेदनशीलता का संदेश देता है। दिव्यांग बच्चों को मंच देकर उनके आत्मविश्वास को बढ़ाना ही सच्ची समावेशी शिक्षा का उद्देश्य है। ऐसे प्रयास शिक्षा व्यवस्था को और अधिक मानवीय और प्रभावी बनाते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

हर बच्चे को मिले समान अवसर, यही सच्ची शिक्षा की पहचान

दिव्यांग बच्चे भी समाज की अमूल्य धरोहर हैं।
उन्हें प्रोत्साहन और अवसर देकर हम एक संवेदनशील समाज का निर्माण कर सकते हैं।
ऐसे कार्यक्रम उनके आत्मविश्वास और प्रतिभा को नई उड़ान देते हैं।
समाज, अभिभावक और विद्यालय मिलकर समावेशी शिक्षा को मजबूत बना सकते हैं।

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