
#जमशेदपुर #शिक्षा_जागरूकता : पूर्व सैनिक अनुभवों से होगी नई पीढ़ी का निर्माण।
जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में जमशेदपुर के आर डी टाटा एजुकेशन सेंटर में पूर्व सैनिकों द्वारा संचालित शैक्षणिक जागरूकता अभियान की शुरुआत की गई है। इस अभियान का नेतृत्व अधिवक्ता और वरिष्ठ पूर्व सैनिक कार्यकर्ता वरुण कुमार कर रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान यातायात नियम, राष्ट्रबोध, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़े पंपलेट मोहनपुर क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर वितरित किए गए। पूर्व सैनिक सेवा परिषद के लगभग 300 सदस्य इस अभियान से सक्रिय रूप से जुड़े हैं, जिससे ग्रामीण और शहरी विद्यार्थियों को सही मार्गदर्शन मिल रहा है।
- वरुण कुमार के नेतृत्व में शिक्षा जागरूकता अभियान प्रारंभ।
- अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद, जमशेदपुर के लगभग 300 सदस्य शामिल।
- आर डी टाटा एजुकेशन सेंटर के माध्यम से छात्रों को दिया जा रहा करियर मार्गदर्शन।
- नियम पालन करने वाले वाहन चालकों को गुलाब पुष्प देकर किया गया सम्मान।
- मोहनपुर क्षेत्र के चौपामोड़, बाजार, जमुनिया गांव और हिंडोलावरण में पंपलेट वितरण।
- युवाओं में अनुशासन, नैतिकता और राष्ट्रसेवा का भाव विकसित करने पर जोर।
सेना की वर्दी भले ही उतार दी जाए, पर मेरा विश्वास है कि अनुशासन, कर्तव्यबोध और राष्ट्रसेवा की भावना कभी सेवानिवृत्त नहीं होती। इसी विचार को जीवन का उद्देश्य बनाकर मैं शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हूं। अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद, जमशेदपुर से जुड़कर तथा एनटीटीएफ आर डी टाटा एजुकेशन सेंटर, जमशेदपुर के माध्यम से शैक्षणिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहा हूं।
सेवा से शिक्षा तक की मेरी यात्रा
सेना में रहते हुए मैंने नेतृत्व, समय-प्रबंधन और सामूहिक जिम्मेदारी को बहुत करीब से देखा। वर्षों तक सीमा पर देश की सेवा करने के बाद जब सेवानिवृत्ति का समय आया, तब मेरे सामने सबसे बड़ा सवाल था कि आगे समाज के लिए क्या किया जाए। मैंने अनुभव किया कि देश की वास्तविक शक्ति केवल हथियारों से नहीं, बल्कि शिक्षित और संस्कारित नागरिकों से बनती है। इसलिए मैंने तय किया कि सैन्य जीवन से मिले अनुशासन को शिक्षा के क्षेत्र में उतारना ही आगे की सच्ची राष्ट्रसेवा होगी।
पूर्व सैनिक सेवा परिषद से जुड़ने के बाद मुझे यह स्पष्ट दिखाई दिया कि हमारे अनुभव यदि कक्षा-कक्षों तक पहुंचें, तो वे नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक प्रकाश बन सकते हैं। इसी उद्देश्य से मैं जमशेदपुर में शिक्षा-केंद्रित कार्यक्रमों को संगठित रूप देने में लगा हुआ हूं।
महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दिवसों पर विशेष कार्यक्रम
हमारे संगठन के माध्यम से वनभोज दिवस, विजय दिवस, कारगिल विजय दिवस, आर्मी दिवस, नौसेना दिवस, वायुसेना दिवस तथा नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती जैसे अवसरों पर विशेष शैक्षणिक संवाद सत्र आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों में पूर्व सैनिक विद्यार्थियों के साथ सीधा संवाद करते हैं, अपने संघर्ष के अनुभव साझा करते हैं और उन्हें जीवन में अनुशासन के महत्व को समझाते हैं। मेरा मानना है कि ऐसे आयोजन छात्रों के भीतर आत्मविश्वास और लक्ष्य के प्रति दृढ़ता पैदा करते हैं।
एनटीटीएफ आर डी टाटा एजुकेशन सेंटर से जुड़ी भूमिका
आर डी टाटा एजुकेशन सेंटर में मेरी सहभागिता केवल औपचारिक स्तर की नहीं है। मैं नियमित रूप से छात्रों से मिलता हूं, उन्हें करियर चयन, व्यक्तित्व विकास और प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रति जागरूक करता हूं। यहां आयोजित प्रेरणा सत्रों में युवाओं को यह समझाया जाता है कि शिक्षा केवल परीक्षा पास करने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने का सशक्त साधन है।
इन सत्रों के दौरान जब मैं विद्यार्थियों से कहता हूं कि कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और अनुशासन कैसे काम आता है, तो वे इसे किताबों के उपदेश के रूप में नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक सत्य के रूप में ग्रहण करते हैं।
पूर्व सैनिकों की संगठित शक्ति
मेरा प्रयास व्यक्तिगत सीमा तक रुकने वाला नहीं है। मैं चाहता हूं कि अधिक से अधिक पूर्व सैनिक शिक्षा और समाज निर्माण के कार्य से जुड़ें। पूर्व सैनिकों की भूमिका समाज में संरक्षक और मार्गदर्शक की होनी चाहिए। इसी विचार को लेकर सेवा परिषद के लगभग 300 सदस्य मेरे साथ मोहनपुर क्षेत्र सहित जिले के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।
हम पंपलेट वितरण, जागरूकता कार्यक्रम और गुलाब पुष्प सम्मान जैसे अभियानों के माध्यम से यह संदेश देते हैं कि नियम पालन ही सुरक्षित भविष्य का आधार है। जब किसी जिम्मेदार वाहन चालक या विद्यार्थी को सम्मानित किया जाता है, तो वह केवल एक फूल नहीं होता, बल्कि अनुशासन के प्रति समाज का सम्मान होता है।
राष्ट्र निर्माण की मेरी स्पष्ट दृष्टि
मैं पूरी दृढ़ता के साथ मानता हूं कि यदि विद्यार्थियों में प्रारंभ से ही नैतिकता, अनुशासन और देश के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित कर दिया जाए, तो समाज स्वतः सशक्त बनेगा। मेरे शब्द अक्सर यही रहते हैं—
“सीमा पर देश की रक्षा करने के बाद अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम कक्षा-कक्षों में देश का भविष्य तैयार करें।”
यही विचार मेरी कार्यशैली का मूल है। पूर्व सैनिक समाज के लिए बोझ नहीं, बल्कि दिशा देने वाली शक्ति हैं और शिक्षा उस शक्ति को प्रभावी बनाने का सबसे सशक्त माध्यम है।
न्यूज़ देखो: राष्ट्रबोध का शैक्षणिक विस्तार
यह पूरी पहल दर्शाती है कि जमशेदपुर में पूर्व सैनिकों द्वारा शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी को जोड़ने का ठोस प्रयास किया जा रहा है। इस अभियान से ग्रामीण और शहरी युवाओं को व्यावहारिक मार्गदर्शन मिल रहा है। यह कार्यक्रम प्रशासन और समाज के बीच बेहतर तालमेल का उदाहरण है। आगे इस अभियान के परिणामों और प्रभाव की निरंतर समीक्षा आवश्यक होगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सजग नागरिकता के निर्माण में सहभागी बनें
आज का समय मांग करता है कि हम सभी अपनी-अपनी जिम्मेदारी समझें।
यातायात नियमों का पालन करें, सुरक्षित वाहन चलाएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।
विद्यार्थियों को सही मार्गदर्शन देना हम सबका कर्तव्य है।
पूर्व सैनिकों के अनुभवों से सीखें और उन्हें सम्मान दें।
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खबर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं और जागरूक समाज निर्माण में सहभागी बनें।
आपकी सहभागिता से ही ऐसे अभियानों को वास्तविक मजबूती मिलती है।






