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उसरी नदी के पानी पर फैक्ट्री की नजर, पाइपलाइन योजना के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध तेज

#गिरिडीह #उसरी_नदी : फैक्ट्री द्वारा पाइपलाइन से पानी ले जाने की योजना पर ग्रामीणों में आक्रोश।

गिरिडीह में उसरी नदी के पानी को पाइपलाइन के जरिए फैक्ट्री तक पहुंचाने की योजना को लेकर विवाद गहरा गया है। माले नेता राजेश सिन्हा और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसका कड़ा विरोध किया है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे नदी और उसरी फॉल के अस्तित्व पर खतरा मंडरा सकता है। मामले को लेकर जल्द जिला प्रशासन से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की जाएगी।

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  • उसरी नदी के पानी को फैक्ट्री तक ले जाने की योजना का विरोध।
  • 2 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाने का आदेश मिलने का दावा।
  • माले नेता राजेश सिन्हा ने कहा – किसी भी हालत में नहीं होने देंगे।
  • सामाजिक कार्यकर्ता विजय विशाल राय, शुभांकर कुमार भी विरोध में शामिल।
  • ग्रामीणों ने पर्यावरण और जलस्रोत बचाने की उठाई मांग।
  • जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर हस्तक्षेप की मांग

गिरिडीह में उसरी नदी के पानी को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि एक फैक्ट्री प्रबंधन पाइपलाइन के जरिए उसरी नदी का पानी अपने उपयोग के लिए ले जाने की तैयारी कर रहा है। इस योजना के खिलाफ स्थानीय ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि इससे क्षेत्र के एकमात्र प्राकृतिक जलस्रोत पर संकट खड़ा हो सकता है।

पाइपलाइन से पानी ले जाने की योजना

माले नेता सह उसरी बचाव अभियान के संयोजक राजेश सिन्हा ने आरोप लगाया कि बालमुकुंद फैक्ट्री, जो बाला जी फैक्ट्री से जुड़ी है, पथ निर्माण विभाग से अनुमति लेकर करीब 2 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाने की योजना बना रही है। इस पाइपलाइन के जरिए उसरी नदी का पानी सीधे फैक्ट्री तक पहुंचाया जाएगा।

राजेश सिन्हा ने कहा: “उसरी नदी गिरिडीह की जीवनदायिनी है, इसे किसी भी हालत में फैक्ट्री के लिए नहीं जाने देंगे।”

नदी और उसरी फॉल पर खतरे की आशंका

सामाजिक कार्यकर्ताओं विजय विशाल राय और शुभांकर कुमार ने कहा कि उसरी नदी ही उसरी वॉटरफॉल का एकमात्र स्रोत है। यदि इस नदी का पानी बड़े पैमाने पर पाइपलाइन के जरिए निकाला गया, तो इसका सीधा असर नदी के प्रवाह और वॉटरफॉल के अस्तित्व पर पड़ेगा।

उन्होंने यह भी बताया कि पहले भी इस मुद्दे को उठाने पर विरोध करने वालों पर मुकदमा दर्ज किया गया था, लेकिन अब ग्रामीण पीछे हटने वाले नहीं हैं।

उन्होंने कहा: “अगर हम अपनी नदी और पर्यावरण के लिए भी आवाज नहीं उठाएंगे, तो यहां रहने का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।”

फैक्ट्री पर अवैध जल दोहन का आरोप

राजेश सिन्हा ने यह भी आरोप लगाया कि बाला जी फैक्ट्री पहले से ही उसरी नदी के किनारे से पानी निकालकर टैंकरों के जरिए सप्लाई कर रही है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जिला प्रशासन को जानकारी दी जा चुकी है।

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पर्यावरण और खेती पर असर की चिंता

असंगठित मजदूर मोर्चा और माले के प्रखंड नेताओं किशोर राय और मसूदन कोल ने कहा कि फैक्ट्री के प्रदूषण और गहरी बोरिंग के कारण पहले ही भूजल स्तर गिर चुका है। अब यदि नदी का पानी भी लिया गया, तो स्थिति और गंभीर हो जाएगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि फैक्ट्री के कारण खेतों और पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है और अब उसरी नदी को भी खतरे में डाला जा रहा है।

ग्रामीणों ने सौंपा ज्ञापन

गादी श्रीरामपुर पंचायत के गंगापुर, चतरो, महुआटांड़ और आसपास के ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों तथा असंगठित मजदूर मोर्चा ने संयुक्त रूप से जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर पाइपलाइन कार्य पर रोक लगाने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि उसरी नदी क्षेत्र का एकमात्र बचा हुआ जलस्रोत है और इसे बचाना सभी की जिम्मेदारी है।

मौके पर मौजूद लोग

इस विरोध प्रदर्शन में आजाद आलम, शिंकु मरांडी, विजय विशाल राय, शुभांकर कुमार, धनेश्वर राय उर्फ मिस्त्री, अजय तूरी, अजय टुडू, बुंदीलाल टुडू, प्रकाश टुडू, प्रमोद रवानी समेत कई स्थानीय युवा और ग्रामीण मौजूद रहे।

न्यूज़ देखो: विकास बनाम पर्यावरण की जंग

उसरी नदी का मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। यदि फैक्ट्री के लिए प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किया जाता है, तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ेगा। प्रशासन के लिए जरूरी है कि वह दोनों पक्षों को सुनकर पारदर्शी निर्णय ले। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जल और प्रकृति बचाना हम सबकी जिम्मेदारी

पानी और पर्यावरण केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का आधार हैं। यदि इन्हें आज नहीं बचाया गया, तो भविष्य में इसका खामियाजा सभी को भुगतना पड़ेगा।

आइए, हम अपने आसपास के प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए आगे आएं और जागरूक बनें। किसी भी गलत कार्य के खिलाफ आवाज उठाना ही सच्ची जिम्मेदारी है।

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