
#पलामू #फर्जी_आईएएस_गिरफ्तार : हुसैनाबाद थाना में पूछताछ के दौरान खुली नकली अधिकारी की पोल।
पलामू जिले के हुसैनाबाद से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां खुद को आईएएस अधिकारी बताने वाला युवक फर्जी निकला। आरोपी ने खुद को 2014 बैच का ओडिशा कैडर आईएएस बताकर पुलिस पर प्रभाव डालने की कोशिश की थी। संदेह होने पर पुलिस ने जब दस्तावेजों की जांच की, तो फर्जीवाड़े का खुलासा हो गया। यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था की सतर्कता और कानून के प्रति सजगता का अहम उदाहरण बनकर सामने आया है।
- हुसैनाबाद थाना में खुद को 2014 बैच ओडिशा कैडर आईएएस बताकर पहुंचा युवक।
- आरोपी की पहचान राजेश कुमार, निवासी कुकही गांव, हैदरनगर थाना क्षेत्र।
- तलाशी में मिला फर्जी आईएएस पहचान पत्र।
- गाड़ी पर लिखा था गवर्नमेंट ऑफ इंडिया सीएओ टेलीकम्युनिकेशन डिपार्टमेंट।
- 6–7 वर्षों से आईएएस अधिकारी बनकर घूमने की पुष्टि।
- हुसैनाबाद थाना में गंभीर धाराओं में दर्ज हुई एफआईआर।
पलामू जिले में प्रशासनिक व्यवस्था को चुनौती देने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। जिले के हुसैनाबाद थाना में एक युवक खुद को भारतीय प्रशासनिक सेवा का अधिकारी बताकर पहुंचा और पुलिस अधिकारियों से बातचीत करने लगा। उसकी बातों और दावों में जब विरोधाभास नजर आया, तो पुलिस को संदेह हुआ और यहीं से पूरे फर्जीवाड़े की परतें खुलने लगीं।
खुद को आईएएस बताकर थाना पहुंचा था आरोपी
जानकारी के अनुसार आरोपी राजेश कुमार दो जनवरी को हुसैनाबाद थाना पहुंचा। उसने खुद को 2014 बैच का ओडिशा कैडर आईएएस अधिकारी बताते हुए कहा कि वह ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में खरेवाला नगर में सीएओ अधिकारी के पद पर कार्यरत है।
थाना प्रभारी से बातचीत के दौरान उसने दावा किया कि वह भुवनेश्वर के अलावा देहरादून और हैदराबाद में भी काम कर चुका है। उसकी बातें सुनकर थाना प्रभारी को संदेह हुआ, क्योंकि एक ही अधिकारी का अलग-अलग राज्यों में इस तरह पदस्थापन सामान्य नहीं माना जाता।
सवालों में उलझा फर्जी अधिकारी
थाना प्रभारी द्वारा जब यह पूछा गया कि तीन अलग-अलग राज्यों में पोस्टिंग कैसे हुई, तो आरोपी ने जवाब दिया कि वह आईएएस अधिकारी है, जिसका चयन यूपीएससी कैडर से होता है, इसलिए उसे कहीं भी पोस्ट किया जा सकता है।
उसके जवाबों में असंगति और व्यवहार में असामान्यता देखकर पुलिस को शक और गहरा हो गया। इसके बाद उससे उसकी नियुक्ति पत्र, पहचान पत्र और अन्य आधिकारिक दस्तावेज मांगे गए, जिन्हें वह प्रस्तुत नहीं कर सका।
तलाशी में मिला फर्जी पहचान पत्र
पुलिस द्वारा की गई तलाशी के दौरान आरोपी के पास से एक फर्जी आईएएस अधिकारी का पहचान पत्र बरामद हुआ। इसके अलावा यह भी सामने आया कि वह जिस वाहन से चलता था, उस पर बड़े अक्षरों में गवर्नमेंट ऑफ इंडिया सीएओ टेलीकम्युनिकेशन डिपार्टमेंट लिखा हुआ था, ताकि लोगों पर प्रभाव डाला जा सके।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी का उद्देश्य खुद को एक बड़े अधिकारी के रूप में प्रस्तुत कर प्रभावशाली काम निकलवाना था।
छह से सात वर्षों से चला रहा था फर्जीवाड़ा
पूरे मामले की जानकारी देते हुए हुसैनाबाद एसडीपीओ मोहम्मद याकूब ने बताया कि आरोपी राजेश कुमार खुद को लंबे समय से आईएएस अधिकारी बताकर घूम रहा था।
एसडीपीओ मोहम्मद याकूब ने कहा: “जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि राजेश कुमार फर्जी तरीके से आईएएस अधिकारी बना हुआ था और पिछले 6 से 7 वर्षों से इसी पहचान के साथ लोगों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा था।”
उन्होंने बताया कि आरोपी के पिता का सपना था कि उसका बेटा आईएएस बने। इसी सपने को पूरा करने के लिए राजेश कुमार ने यूपीएससी परीक्षा में चार बार प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हो सका। इसके बाद उसने गलत रास्ता अपनाते हुए खुद को आईएएस अधिकारी के रूप में प्रस्तुत करना शुरू कर दिया।
गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ मामला
फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हुसैनाबाद थाना में गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपी ने इस फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर अब तक किन-किन जगहों पर क्या लाभ उठाया और क्या किसी सरकारी या निजी व्यक्ति को गुमराह किया गया।
पुलिस का कहना है कि इस तरह का कृत्य न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है।
आगे की जांच में जुटी पुलिस
फिलहाल पुलिस आरोपी के मोबाइल, दस्तावेजों और उसके पिछले गतिविधियों की जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि कहीं उसने इस फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर आर्थिक लाभ तो नहीं उठाया। पुलिस अन्य जिलों और राज्यों से भी संपर्क कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उसने कहां-कहां खुद को आईएएस अधिकारी बताया।
न्यूज़ देखो: सतर्कता ने टाला बड़ा फर्जीवाड़ा
यह मामला दिखाता है कि अगर पुलिस और प्रशासन सतर्क न हों, तो इस तरह के फर्जी अधिकारी सिस्टम का दुरुपयोग कर सकते हैं। हुसैनाबाद पुलिस की सूझबूझ से एक बड़ा फर्जीवाड़ा समय रहते सामने आ गया। अब यह जरूरी है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई हो, ताकि कोई भी व्यक्ति प्रशासनिक पदों की गरिमा से खिलवाड़ करने की हिम्मत न करे। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सच और कानून के साथ खड़े रहना ही जिम्मेदारी
फर्जी पहचान और दिखावे के जरिए समाज में भ्रम फैलाने वालों से सतर्क रहना जरूरी है। अगर कहीं भी ऐसे संदिग्ध लोग नजर आएं, तो तुरंत प्रशासन को सूचना दें। इस खबर को साझा करें, चर्चा करें और जागरूकता फैलाएं, ताकि कानून और व्यवस्था मजबूत बनी रहे।





