
#बरवाडीह #अलविदा_नमाज : रमजान के आखिरी जुमे पर मस्जिदों में उमड़ी नमाजियों की भीड़।
लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड में पवित्र रमजान माह के आखिरी जुमे पर अलविदा की नमाज अकीदत और एहतराम के साथ अदा की गई। मस्जिदों में बड़ी संख्या में नमाजी जुटे और देश-दुनिया में अमन-चैन, खुशहाली तथा भाईचारे की दुआ मांगी। नमाज से पहले उलेमाओं ने रमजान के महत्व, रोजे की फजीलत और जकात की अहमियत पर विस्तार से प्रकाश डाला। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर प्रेम और सौहार्द का संदेश दिया।
- बरवाडीह प्रखंड में रमजान के आखिरी जुमे पर अदा की गई अलविदा की नमाज।
- मस्जिदों में नमाजियों की भारी भीड़, अकीदत के साथ हुई इबादत।
- नमाज के बाद अमन-चैन, खुशहाली और भाईचारे के लिए मांगी गई दुआ।
- उलेमाओं ने रमजान की अहमियत, रोजे की फजीलत और जकात पर दिया संदेश।
- नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर सौहार्द का संदेश दिया।
लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड सहित आसपास के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में शुक्रवार को पवित्र रमजान माह के आखिरी जुमे पर अलविदा की नमाज अकीदत और एहतराम के साथ अदा की गई। इस मौके पर मस्जिदों में सुबह से ही नमाजियों की भीड़ उमड़ पड़ी और लोगों ने पूरे श्रद्धा भाव के साथ इबादत की।
नमाज के बाद देश और दुनिया में अमन-चैन, खुशहाली और आपसी भाईचारे की दुआ मांगी गई। पूरे क्षेत्र में धार्मिक आस्था और भाईचारे का वातावरण देखने को मिला।
मस्जिदों में की गई विशेष तैयारियां
अलविदा की नमाज को लेकर सुबह से ही मस्जिदों में विशेष तैयारियां की गई थीं। मस्जिद परिसरों की साफ-सफाई कर नमाजियों के लिए बेहतर व्यवस्था की गई थी।
नमाजियों के लिए वुजू करने की सुविधा, पेयजल और बैठने की समुचित व्यवस्था की गई थी ताकि लोग आराम से नमाज अदा कर सकें।
बरवाडीह प्रखंड क्षेत्र के सरईडीह, पोखरी कलां, बेतला, बगीचा, अहिरपुरवा, छेचा, पोखरी खुर्द और बरवाडीह समेत कई गांवों और मोहल्लों की मस्जिदों में मुस्लिम समुदाय के लोग बड़ी संख्या में नमाज अदा करने पहुंचे।
रमजान माह की अहमियत पर उलेमाओं की तकरीर
नमाज से पहले उलेमाओं ने तकरीर करते हुए रमजान माह की अहमियत और रोजे की फजीलत पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रमजान का महीना इबादत, सब्र और इंसानियत की सेवा का महीना है।
उलेमाओं ने कहा कि इस पाक महीने में मुसलमानों को पूरे एहतराम और सच्चे दिल से रोजा रखना चाहिए तथा ज्यादा से ज्यादा इबादत करनी चाहिए।
उन्होंने लोगों से अपील की कि रमजान के इस पवित्र समय में समाज के जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए आगे आएं और इंसानियत की भावना को मजबूत करें।
जकात की अहमियत पर दिया गया संदेश
उलेमाओं ने जकात के महत्व पर भी जोर देते हुए कहा कि अल्लाह ने नमाज और रोजे की तरह ही जकात को भी फर्ज किया है।
उन्होंने कहा कि जकात का मकसद समाज के गरीब, मिस्कीन और जरूरतमंद लोगों की मदद करना है। इससे जरूरतमंदों को सहारा मिलता है और समाज में भाईचारा मजबूत होता है।
उलेमाओं ने आर्थिक रूप से सक्षम लोगों से अपील की कि वे जरूरतमंदों की मदद करें और समाज में सहयोग और सद्भाव की भावना को बढ़ाएं।
नमाज के बाद गले मिलकर दिया भाईचारे का संदेश
अलविदा की नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर आपसी प्रेम, सौहार्द और भाईचारे का संदेश दिया। पूरे क्षेत्र में रमजान की पवित्रता और धार्मिक आस्था का माहौल देखने को मिला।
लोगों ने एक-दूसरे को दुआएं दीं और समाज में शांति और सौहार्द बनाए रखने का संकल्प लिया।
न्यूज़ देखो: अलविदा की नमाज देती है भाईचारे का संदेश
बरवाडीह में अदा की गई अलविदा की नमाज केवल एक धार्मिक परंपरा ही नहीं बल्कि समाज में शांति, भाईचारे और इंसानियत का संदेश भी देती है। रमजान का महीना लोगों को संयम, सेवा और सहयोग की भावना सिखाता है। ऐसे अवसर समाज को एकजुट करने और आपसी सद्भाव को मजबूत करने का काम करते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
प्रेम और इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म
रमजान का पवित्र महीना हमें यह सिखाता है कि इंसानियत, सेवा और आपसी प्रेम ही जीवन की सबसे बड़ी ताकत है।
जब लोग एक-दूसरे की खुशियों और दुखों में साथ खड़े होते हैं तो समाज मजबूत बनता है।
आप भी इस भाईचारे और सौहार्द के संदेश को आगे बढ़ाएं। इस खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक साझा करें और समाज में प्रेम और एकता का संदेश फैलाने में अपनी भागीदारी निभाएं।






