
#खलारी #अलविदा_नमाज : रमजान के आखिरी जुमा पर बड़ी संख्या में नमाजियों ने मस्जिदों में अदा की नमाज।
रांची जिले के मैकलुस्कीगंज और खलारी क्षेत्र की मस्जिदों में रमजान माह के आखिरी जुमा के अवसर पर अलविदा की नमाज अदा की गई। इस दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग बड़ी संख्या में मस्जिदों में पहुंचे और देश-दुनिया में अमन-शांति तथा तरक्की की दुआ मांगी। नमाज को लेकर मस्जिदों में विशेष व्यवस्था की गई थी और सुरक्षा के लिए पुलिस प्रशासन भी मुस्तैद रहा।
- मैकलुस्कीगंज और खलारी क्षेत्र की मस्जिदों में अदा की गई अलविदा की नमाज।
- लपरा, मायापुर, हुटाप, खलारी, बाजार टांड़ डकरा, राय और धमधमिया की मस्जिदों में उमड़ी भीड़।
- नमाजियों ने देश में अमन, शांति और तरक्की के लिए मांगी दुआ।
- मस्जिदों में नमाज को लेकर विशेष व्यवस्था, पुलिस प्रशासन भी रहा मुस्तैद।
- मदीना मस्जिद के मोतवल्ली अब्बुल अजीज ने रमजान की अहमियत पर डाली रोशनी।
रांची जिले के मैकलुस्कीगंज, खलारी और आसपास के क्षेत्रों में शुक्रवार को रमजान माह के आखिरी जुमा के अवसर पर अलविदा की नमाज अकीदत और एहतराम के साथ अदा की गई। इस मौके पर प्रखंड क्षेत्र की विभिन्न मस्जिदों में मुस्लिम समुदाय के लोग बड़ी संख्या में पहुंचे और नमाज अदा की।
नमाज के दौरान लोगों ने अपने वतन भारत की खुशहाली, तरक्की और अमन-शांति के लिए दुआ मांगी। साथ ही यह कामना की कि देश विश्व में सबसे ऊंचा मुकाम हासिल करे।
कई मस्जिदों में उमड़ी नमाजियों की भीड़
अलविदा की नमाज को लेकर क्षेत्र की कई मस्जिदों में सुबह से ही तैयारियां की गई थीं। लपरा, मायापुर, हुटाप, खलारी, बाजार टांड़ डकरा, राय और धमधमिया सहित कई स्थानों की मस्जिदों में बड़ी संख्या में नमाजी पहुंचे।
मस्जिदों में नमाजियों के लिए वुजू, पानी और बैठने की समुचित व्यवस्था की गई थी, ताकि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
सुरक्षा व्यवस्था में पुलिस रही मुस्तैद
अलविदा की नमाज के दौरान क्षेत्र में शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन भी सक्रिय रहा। मस्जिदों और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे।
प्रशासन की मौजूदगी में नमाज शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई।
रमजान की अहमियत पर दी गई जानकारी
मैकलुस्कीगंज स्थित मदीना मस्जिद के मोतवल्ली अब्बुल अजीज ने रमजान माह की अहमियत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जहां सभी धर्मों और उनके पर्व-त्योहारों को समान भाव से देखा जाता है।
उन्होंने बताया कि रमजान का महीना अल्लाह की तरफ से एक खास इनाम है। इस पवित्र महीने में नमाज, रोजा, फितरा, जकात और इबादत का विशेष महत्व होता है।
उन्होंने कहा कि इस्लाम धर्म में रमजान के महीने में पड़ने वाले आखिरी जुमा को अलविदा जुमा कहा जाता है। ‘अलविदा’ का अर्थ किसी के विदा होने से है, यानी रमजान का पवित्र महीना अब हमसे रुखसत होने वाला है।
ईद-उल-फितर की तैयारियां शुरू
अब्बुल अजीज ने बताया कि यदि रमजान के 30 रोजे पूरे होते हैं, तो 20 मार्च को एक बार फिर अलविदा की नमाज अदा की जाएगी और 21 मार्च को ईद-उल-फितर का त्यौहार मनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस मौके पर लोग अल्लाह से यह दुआ भी करते हैं कि आने वाला रमजान भी सभी को नसीब हो।
न्यूज़ देखो: रमजान का संदेश है भाईचारा और इंसानियत
रमजान का महीना केवल इबादत का ही नहीं बल्कि इंसानियत, सब्र और भाईचारे का भी संदेश देता है। अलविदा की नमाज के अवसर पर लोगों का एक साथ इकट्ठा होकर अमन-शांति की दुआ मांगना समाज में सौहार्द और एकता की भावना को मजबूत करता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
इबादत से मिलता है आत्मिक सुकून
रमजान का पवित्र महीना लोगों को संयम, सेवा और इंसानियत का पाठ सिखाता है। इस दौरान की गई इबादत और नेक काम समाज में सकारात्मक ऊर्जा फैलाते हैं।
ऐसे धार्मिक अवसर समाज में प्रेम और भाईचारे का संदेश देने का काम करते हैं।
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