
#गिरिडीह #बगोदर #प्रवासी_मजदूर : नाइजर में अपहरण के बाद स्वदेश लौटे मजदूरों का भाकपा माले नेतृत्व ने किया भावनात्मक स्वागत।
नाइजर में अपहरण की घटना का शिकार होकर लंबे संघर्ष के बाद सुरक्षित स्वदेश लौटे बगोदर के पांचों मजदूरों का आज सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया। भाकपा माले के राष्ट्रीय महासचिव श्री दीपंकर भट्टाचार्य ने अंग वस्त्र देकर और माला पहनाकर मजदूरों का अभिनंदन किया। इस अवसर पर प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा, विदेश में काम कर रहे श्रमिकों की स्थिति और सरकार की जिम्मेदारी को लेकर भी चर्चा हुई। यह कार्यक्रम अपहरण पीड़ित मजदूरों के हौसले और संघर्ष का प्रतीक बना।
- नाइजर में अपहरण के बाद सुरक्षित लौटे बगोदर के पांचों मजदूर।
- भाकपा माले राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने किया स्वागत।
- अंग वस्त्र और माला पहनाकर सम्मान।
- प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और अधिकार पर चर्चा।
- कार्यक्रम में स्थानीय नेता व परिजन रहे उपस्थित।
नाइजर में अपहरण की गंभीर घटना के बाद जब बगोदर के पांचों मजदूर सुरक्षित अपने देश लौटे, तो उनके स्वागत का दृश्य बेहद भावनात्मक रहा। यह स्वागत न केवल सम्मान का प्रतीक था, बल्कि उन कठिन परिस्थितियों की भी याद दिलाता है, जिनसे गुजरकर ये मजदूर वापस अपने घर पहुंचे हैं। कार्यक्रम में भाकपा माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य स्वयं उपस्थित रहे और उन्होंने मजदूरों का अंग वस्त्र व माला पहनाकर स्वागत किया।
अपहरण की घटना और संघर्ष की कहानी
बगोदर के ये पांचों मजदूर रोजगार की तलाश में नाइजर गए थे, जहां वे अपहरण का शिकार हो गए। अपहरण के बाद उनका परिवार, गांव और पूरा क्षेत्र गहरी चिंता में डूब गया था। लंबे समय तक अनिश्चितता और डर के माहौल के बाद, विभिन्न प्रयासों के चलते मजदूरों की सुरक्षित वापसी संभव हो सकी।
यह घटना एक बार फिर प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा, विदेशों में काम करने की मजबूरी और जोखिमों को उजागर करती है। मजदूरों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि अपहरण के दौरान मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
सम्मान और संवेदना का संदेश
स्वागत कार्यक्रम के दौरान भाकपा माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने मजदूरों को अंग वस्त्र देकर और माला पहनाकर सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा:
दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा: “ये मजदूर केवल अपने परिवार के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए संघर्ष का प्रतीक हैं। विदेश में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।”
उन्होंने मजदूरों की हिम्मत और धैर्य की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे हालात में भी उन्होंने साहस नहीं खोया।
प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा पर सवाल
कार्यक्रम के दौरान प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल उठे। नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि विदेश में काम करने वाले भारतीय मजदूरों के लिए मजबूत सुरक्षा तंत्र और त्वरित सहायता व्यवस्था जरूरी है।
इस मौके पर यह भी चर्चा हुई कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए सरकार को ठोस नीति बनानी चाहिए, ताकि मजदूर सुरक्षित माहौल में काम कर सकें।
परिवार और क्षेत्र में खुशी का माहौल
मजदूरों की सुरक्षित वापसी से उनके परिवारों और पूरे बगोदर क्षेत्र में राहत और खुशी का माहौल है। परिजनों ने कहा कि यह उनके जीवन का सबसे कठिन समय था, लेकिन आज सम्मान के साथ अपने लोगों को लौटते देख भावुक हो उठे।
कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि, पार्टी कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने मजदूरों के साहस को सलाम किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
न्यूज़ देखो: सुरक्षित वापसी, लेकिन सवाल बरकरार
बगोदर के मजदूरों की सुरक्षित वापसी राहत की खबर है, लेकिन यह घटना प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा पर बड़े सवाल छोड़ जाती है। सम्मान और स्वागत जरूरी है, पर उससे भी जरूरी है कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। सरकार और व्यवस्था को इससे सबक लेने की जरूरत है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
संघर्ष से सम्मान तक की यात्रा
अपहरण जैसी त्रासदी से लौटे मजदूरों का यह स्वागत साहस और एकजुटता का प्रतीक है।
प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा हम सबकी जिम्मेदारी है।
इस खबर को साझा करें, अपनी राय कमेंट करें और मजदूरों के अधिकारों के लिए जागरूकता फैलाएं।
सजग बनें, सवाल उठाएं और बदलाव का हिस्सा बनें।

