
#बरवाडीह #ग्रामीण_आंदोलन : पीटीआर क्षेत्र में मशीन से कार्य कराए जाने के विरोध में ग्रामीणों ने काम रुकवाया।
लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत पलामू टाइगर रिजर्व क्षेत्र में वन विभाग द्वारा मजदूरों के स्थान पर जेसीबी मशीन से डोभा खुदाई कराए जाने का मामला सामने आया है। इस निर्णय के विरोध में गाड़ी और मतनाग गांव के सैकड़ों ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर काम बंद करा दिया। ग्रामीणों का कहना है कि इससे स्थानीय मजदूरों का रोजगार छिन रहा है। विरोध के बाद फिलहाल कार्य रोक दिया गया है।
- पीटीआर गाड़ी पीएफ क्षेत्र में जेसीबी से डोभा खुदाई का मामला।
- गाड़ी व मतनाग गांव के सैकड़ों ग्रामीणों ने किया विरोध प्रदर्शन।
- मजदूरों के रोजगार छिनने का ग्रामीणों ने लगाया आरोप।
- हंगामे के बाद जेसीबी से चल रहा कार्य बंद।
- जिला प्रशासन से हस्तक्षेप और जांच की मांग।
बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत पलामू टाइगर रिजर्व के गाड़ी पीएफ क्षेत्र में उस समय तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई, जब वन विभाग द्वारा मजदूरों की बजाय जेसीबी मशीन से डोभा की खुदाई कराई जाने लगी। जानकारी मिलते ही गाड़ी और मतनाग गांव के ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचे और कड़ा विरोध दर्ज कराया। ग्रामीणों के विरोध के बाद जेसीबी से हो रहा कार्य तत्काल रोकना पड़ा।
मजदूरों की जगह मशीन, ग्रामीणों में रोष
ग्रामीणों का कहना है कि डोभा खुदाई जैसे कार्य परंपरागत रूप से स्थानीय मजदूरों से कराए जाते रहे हैं। इससे गरीब और जरूरतमंद परिवारों को कुछ दिनों का रोजगार मिल जाता था। लेकिन इस बार बिना किसी सूचना और ग्राम स्तर की सहमति के सीधे जेसीबी मशीन लगाकर काम शुरू कर दिया गया, जिससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश फैल गया।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब यह कार्य मानव श्रम से संभव है, तो फिर भारी मशीनों की आवश्यकता क्यों पड़ी। उनका आरोप है कि सरकार एक ओर ग्रामीण रोजगार बढ़ाने और पलायन रोकने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर विभागीय स्तर पर मशीनों से काम कराकर मजदूरों के हक को छीना जा रहा है।
वर्षों से मजदूरी में गड़बड़ी का आरोप
विरोध कर रहे ग्रामीणों ने वन विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मजदूरी भुगतान में वर्षों से अनियमितता चली आ रही है। कई मजदूरों ने दावा किया कि उनके नाम पर भुगतान दिखाया जाता है, लेकिन वास्तविक रूप से उन्हें पूरा पैसा नहीं मिलता। कुछ मामलों में तो काम किए बिना ही खातों से राशि निकलने की बात भी सामने आई है।
ग्रामीणों का कहना है कि इन गड़बड़ियों को लेकर कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मशीनों के इस्तेमाल से यह आशंका और बढ़ गई है कि मजदूरी से जुड़ी पारदर्शिता पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
पीटीआर से प्रभावित गांवों की पीड़ा
गाड़ी, मतनाग सहित आसपास के कई गांव पलामू टाइगर रिजर्व से सीधे तौर पर प्रभावित हैं। इन गांवों के लोगों को जंगल से लकड़ी, जलावन, पत्ता और अन्य वन उत्पाद लेने पर कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है। जंगली जानवरों द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाना आम बात है, लेकिन मुआवजे की प्रक्रिया जटिल और लंबी बताई जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि पीटीआर से उन्हें कोई स्थायी लाभ नहीं मिल रहा है। कभी-कभार मिलने वाली मजदूरी ही उनके लिए आय का एकमात्र सहारा होती है। यदि वही अवसर भी मशीनों के कारण समाप्त हो जाएंगे, तो ग्रामीणों के सामने पलायन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
हंगामे के बाद रुका काम
ग्रामीणों के उग्र विरोध और मौके पर हुए हंगामे के बाद आखिरकार जेसीबी से चल रहा डोभा खुदाई कार्य रोक दिया गया। ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक स्थानीय मजदूरों को काम नहीं दिया जाएगा, तब तक किसी भी प्रकार का मशीन कार्य स्वीकार नहीं किया जाएगा।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में इस तरह की मनमानी दोहराई गई, तो वे और बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों से इस पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि पीटीआर प्रबंधन की गतिविधियों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और मजदूरी से जुड़ी अनियमितताओं को उजागर किया जाना चाहिए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि स्थानीय स्तर पर होने वाले सभी कार्यों में प्राथमिकता स्थानीय मजदूरों को ही दी जाए।
ग्रामीणों ने यह भी मांग उठाई कि पीटीआर से प्रभावित गांवों के लिए स्थायी रोजगार योजनाएं बनाई जाएं, ताकि लोग अपने गांव में रहकर सम्मानजनक जीवन यापन कर सकें।
वन विभाग का पक्ष
इस पूरे मामले में वन विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि सूत्रों के अनुसार विभाग का कहना है कि कार्य में तेजी लाने के उद्देश्य से मशीनों का उपयोग किया गया था। ग्रामीणों के विरोध के बाद फिलहाल काम रोक दिया गया है। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि कार्य नियमों के तहत ही कराया जा रहा था।
न्यूज़ देखो: वर्षों की पीड़ा अब विरोध में बदली
यह मामला केवल जेसीबी से डोभा खुदाई का नहीं, बल्कि पीटीआर से प्रभावित गांवों की वर्षों पुरानी नाराजगी और उपेक्षा का प्रतीक बन गया है। रोजगार, पारदर्शिता और अधिकारों को लेकर उठे सवाल प्रशासन और वन विभाग के लिए गंभीर चेतावनी हैं। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो यह असंतोष बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
रोजगार का सवाल, गांव का भविष्य
स्थानीय संसाधनों पर पहला अधिकार स्थानीय लोगों का होता है।
मशीन नहीं, मेहनत से गांवों का विकास संभव है।
रोजगार छीना गया तो पलायन मजबूरी बन जाएगा।
समय है कि प्रशासन ग्रामीणों की आवाज सुने।






