
#चैनपुर #गुमला #वन_महोत्सव : सामुदायिक वन अधिकार मिलने की खुशी में झर गांव में पारंपरिक रीति से हुआ आयोजन।
गुमला जिले के चैनपुर प्रखंड अंतर्गत रामपुर पंचायत के झर गांव में 158 एकड़ सामुदायिक वन पट्टा मिलने की खुशी में वन महोत्सव मनाया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और वन विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में ग्रामीणों ने जंगल संरक्षण की शपथ ली। पेसा कानून के तहत मिले अधिकार को जिम्मेदारी से निभाने का संकल्प दोहराया गया।
- झर गांव को मिला 158 एकड़ का सामुदायिक वन पट्टा।
- मुख्य अतिथि मेरी लकड़ा, बिजेंद्र जी, विवेक खलखो एवं ललित कुमार महतो रहे उपस्थित।
- ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति से ‘नदी दीपा’ कर अतिथियों का स्वागत किया।
- जंगल में आग नहीं लगाने और हरे पेड़ों की कटाई पर रोक की शपथ।
- कृषि विभाग द्वारा 10 किसानों को बीज वितरण की जानकारी।
गुमला जिले के चैनपुर प्रखंड स्थित रामपुर पंचायत के झर गांव में भव्य वन महोत्सव का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम गांव को मिले 158 एकड़ सामुदायिक वन पट्टा की खुशी और इसके संरक्षण के संकल्प को लेकर आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हुई, जिससे आयोजन में सांस्कृतिक रंग भी देखने को मिला।
पारंपरिक स्वागत और सम्मान
मुख्य अतिथि जिला परिषद सदस्य मेरी लकड़ा, कुरूमगढ़ के वनपाल बिजेंद्र जी, विवेक खलखो और फिया फाउंडेशन के प्रखंड समन्वयक ललित कुमार महतो का ग्रामीणों ने ‘नदी दीपा’ से पैर पखार कर मंच तक स्वागत किया। सभी अतिथियों को अंग वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
ग्रामीणों की बड़ी भागीदारी ने यह स्पष्ट किया कि सामुदायिक वन अधिकार उनके लिए सिर्फ कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि स्वाभिमान और अस्तित्व का प्रतीक है।
पेसा कानून से मिला अधिकार
कार्यक्रम के दौरान राजेश एक्का ने कहा:
“158 एकड़ का सामुदायिक वन पट्टा मिलना गांव के लिए गौरव की बात है। झारखंड में पेसा कानून लागू होने से हमें अपना अधिकार मिला है, अब जंगल को संजोना हमारी जिम्मेदारी है।”
उन्होंने कहा कि यह अधिकार लंबे संघर्ष का परिणाम है और इसे संरक्षित रखना सभी ग्रामीणों का दायित्व है।
प्रखंड समन्वयक ललित कुमार महतो ने बताया कि चैनपुर क्षेत्र में कड़े संघर्ष के बाद यह पट्टा मिला है। इसमें जिला उपायुक्त, वन प्रमंडल पदाधिकारी और जिला कल्याण पदाधिकारी का विशेष सहयोग रहा।
उन्होंने कहा:
“अधिकार मिलने के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ी है। यदि हम जंगल की रक्षा नहीं करेंगे तो यह अधिकार भी कमजोर पड़ सकता है।”
“जंगल हमारा है” का नारा
जिला परिषद सदस्य मेरी लकड़ा ने “जंगल हमारा है” का नारा देकर ग्रामीणों में उत्साह भरा। उन्होंने भविष्य में भी हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि सामुदायिक सहभागिता से ही जंगल और गांव दोनों का विकास संभव है।
वनपाल बिजेंद्र जी और ललित कुमार महतो ने ग्रामीणों को जंगल संरक्षण की शपथ दिलाई। शपथ में यह संकल्प लिया गया कि—
- जंगल में किसी भी हाल में आग नहीं लगाई जाएगी।
- हरे पेड़ों की कटाई पर पूर्ण रोक रहेगी।
- सामुदायिक प्रबंधन योजना के तहत गांव के विकास और जंगल संरक्षण में सक्रिय सहयोग किया जाएगा।
तकनीकी जानकारी और कृषि सहयोग
कार्यक्रम में बेदोरा पंचायत समन्वयक ऊषा सरिता मिंज ने जंगल रक्षा और प्रबंधन के तकनीकी पहलुओं को साझा किया। उन्होंने बताया कि सामुदायिक वन प्रबंधन के तहत योजनाबद्ध तरीके से संरक्षण और उपयोग दोनों संभव हैं।
कृषि विभाग की ओर से 10 किसानों को बीज वितरण की जानकारी भी दी गई, जिससे ग्रामीणों को कृषि क्षेत्र में भी प्रोत्साहन मिला।
कार्यक्रम में संजय टोप्पो, अमरेंद्र प्रसाद, ग्राम प्रधान मिखाईल टोप्पो, रजनी केरकेट्टा, नीलम इक्का, कमल कुजूर, पोलिकर टोप्पो, आलखमणि इक्का, मंजू तिग्गा सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे।
न्यूज़ देखो: अधिकार के साथ जिम्मेदारी की शुरुआत
झर गांव का वन महोत्सव यह संकेत देता है कि जब समुदाय को अधिकार मिलता है, तो संरक्षण की भावना भी मजबूत होती है। 158 एकड़ वन पट्टा केवल भूमि का अधिकार नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन की जिम्मेदारी भी है। यदि ग्रामीण एकजुट होकर संकल्प निभाते हैं तो यह मॉडल अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।
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जंगल बचेंगे तो भविष्य बचेगा
जंगल हमारी सांसों की डोर हैं।
सामुदायिक भागीदारी से ही प्रकृति और विकास का संतुलन संभव है।
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