
#लातेहार #होली_मिलन : केचकी संगम में पीटीआर नॉर्थ के वनकर्मियों ने उत्साहपूर्वक मनाया रंगों का पर्व
लातेहार जिले के बरवाडीह स्थित केचकी संगम की प्राकृतिक वादियों में पीटीआर नॉर्थ के वनकर्मियों ने पारंपरिक तरीके से होली मिलन समारोह का आयोजन किया। कार्यक्रम में वन अधिकारियों और कर्मियों ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं और सामाजिक एकता तथा आपसी भाईचारे का संदेश दिया।
- केचकी संगम, बरवाडीह (लातेहार) में पीटीआर नॉर्थ के वनकर्मियों ने मनाया होली मिलन समारोह।
- कार्यक्रम में डिप्टी डायरेक्टर पीके जेना, रेंजर उमेश कुमार दूबे और अन्य वनाधिकारी रहे मौजूद।
- अधिकारियों और कर्मचारियों ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर दी होली की शुभकामनाएं।
- समारोह में फगुआ गीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से बना उत्सवमय माहौल।
- वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए समर्पित भाव से कार्य करने का लिया सामूहिक संकल्प।
- कार्यक्रम के अंत में सामूहिक भोज के साथ हुआ समारोह का समापन।
लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड स्थित केचकी संगम की खूबसूरत और शांत वादियों में सोमवार को पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) नॉर्थ के वनकर्मियों द्वारा होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली की बधाई दी। प्राकृतिक वातावरण के बीच आयोजित इस समारोह में भाईचारे, सौहार्द और सहयोग की भावना देखने को मिली।
प्राकृतिक वादियों में गूंजे होली के रंग
केचकी संगम अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। इसी मनोहारी स्थल पर आयोजित होली मिलन समारोह में वनकर्मियों ने पारंपरिक तरीके से होली का आनंद लिया। रंगों के इस पर्व पर सभी ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर शुभकामनाएं दीं और आपसी मतभेद भुलाकर एकजुटता का संदेश दिया।
वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस मौके पर प्रकृति की गोद में बैठकर उत्सव का आनंद लिया। रंगों और खुशियों से भरे इस आयोजन ने सभी के बीच आपसी सहयोग और मित्रता की भावना को और मजबूत किया।
डिप्टी डायरेक्टर पीके जेना ने दिया संदेश
कार्यक्रम में डिप्टी डायरेक्टर पीके जेना मुख्य रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने सभी वनकर्मियों को होली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व केवल रंग खेलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एकता और प्रेम का प्रतीक भी है।
“होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह आपसी मतभेदों को भुलाकर प्रेम, सौहार्द और सामाजिक एकता को मजबूत करने का पर्व है।”
उन्होंने कहा कि वन विभाग के कर्मचारियों को हमेशा मिल-जुलकर काम करना चाहिए, ताकि जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा बेहतर तरीके से सुनिश्चित की जा सके।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजा कार्यक्रम
होली मिलन समारोह के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, जिसने पूरे माहौल को और भी आनंदमय बना दिया। वनकर्मियों ने पारंपरिक फगुआ गीत गाकर कार्यक्रम में रंग भर दिया। मांदर और लोकधुनों की ताल पर गाए गए गीतों ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया।
केचकी संगम की प्राकृतिक छटा के बीच गूंजते फगुआ गीतों ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया। इस दौरान वनकर्मियों ने एक-दूसरे के साथ नृत्य और गीतों के माध्यम से उत्सव की खुशी साझा की।
वन एवं वन्यजीव संरक्षण का लिया संकल्प
कार्यक्रम के दौरान सभी वनकर्मियों ने सामूहिक रूप से वन और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए और अधिक जिम्मेदारी से कार्य करने का संकल्प लिया। अधिकारियों ने कहा कि जंगलों की सुरक्षा और वन्यजीवों का संरक्षण केवल विभाग की जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज के हर व्यक्ति का दायित्व है।
वनकर्मियों ने यह भी कहा कि आने वाले समय में वे और अधिक समर्पण के साथ जंगलों की सुरक्षा और संरक्षण के कार्य में जुटे रहेंगे।
सामूहिक भोज के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन
होली मिलन समारोह के अंत में सभी वनकर्मियों के लिए सामूहिक भोज का आयोजन किया गया। इसमें सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने एक साथ बैठकर विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का आनंद लिया।
इस आयोजन की सफलता में वन विभाग के कई कर्मियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम को सफल बनाने में दीपक मिश्रा, देवेंद्र देव, नंदलाल साहू, देवपाल भगत, रजनीश सिंह, गुलशन सुरीन, धीरज और विद्या सहित अन्य वनकर्मियों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
अंत में रेंजर उमेश कुमार दूबे ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को धन्यवाद देते हुए कार्यक्रम के समापन की घोषणा की।
न्यूज़ देखो: प्रकृति के बीच त्योहार ने बढ़ाया भाईचारा
केचकी संगम की वादियों में आयोजित यह होली मिलन समारोह केवल एक उत्सव नहीं बल्कि आपसी सहयोग और टीम भावना को मजबूत करने का अवसर भी बना। वन विभाग के कर्मचारियों के बीच इस तरह के आयोजन कार्यस्थल पर सकारात्मक माहौल बनाते हैं और जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से निभाने की प्रेरणा देते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
त्योहारों से मजबूत होती है सामाजिक एकता
त्योहार केवल खुशियां मनाने का अवसर नहीं होते, बल्कि यह समाज को जोड़ने का भी माध्यम बनते हैं।
ऐसे आयोजन हमें यह सिखाते हैं कि मतभेदों को भुलाकर एक-दूसरे के साथ मिलकर आगे बढ़ना ही असली उत्सव है।
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