महुआ चुनने के लिए सूखे पत्तों में लगाई जा रही आग से जंगलों को खतरा, वन विभाग ने लोगों से की अपील

महुआ चुनने के लिए सूखे पत्तों में लगाई जा रही आग से जंगलों को खतरा, वन विभाग ने लोगों से की अपील

author Jitendra Giri
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#खलारी #रांची #जंगलसुरक्षा : महुआ बिनने के लिए लगाई जा रही आग से पर्यावरण और वन्यजीवों पर संकट।

रांची जिले के खलारी क्षेत्र में महुआ चुनने के लिए सूखे पत्तों में आग लगाने की घटनाएं जंगलों के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही हैं। कुछ ग्रामीण जमीन साफ करने के उद्देश्य से पत्तों में आग लगा देते हैं, जिससे कई बार आग तेजी से फैलकर जंगल के बड़े हिस्से को नुकसान पहुंचा देती है। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि इस तरह की लापरवाही से बचें और जंगलों की सुरक्षा में सहयोग करें।

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  • खलारी क्षेत्र के जंगलों में महुआ चुनने के लिए सूखे पत्तों में आग लगाने की घटनाएं बढ़ीं।
  • जमीन साफ करने के उद्देश्य से लगाई गई आग तेजी से फैलकर जंगल को नुकसान पहुंचा सकती है।
  • आग लगने से छोटे पौधे, पेड़-पौधे और मिट्टी के सूक्ष्म जीवाणु नष्ट हो जाते हैं।
  • जंगलों में रहने वाले वन्यजीवों के आश्रय स्थल भी प्रभावित होते हैं।
  • वन क्षेत्र पदाधिकारी सुरेन्द्र सिंह ने लोगों से जंगलों में आग न लगाने की अपील की।

रांची जिले के खलारी क्षेत्र के जंगलों में इन दिनों महुआ चुनने का मौसम चल रहा है। इस दौरान कुछ ग्रामीण महुआ बिनने में आसानी के लिए पेड़ों के नीचे गिरे सूखे पत्तों में आग लगा देते हैं। हालांकि यह तरीका देखने में भले ही आसान लगे, लेकिन इससे जंगल और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी के मौसम में जंगल पहले से ही अत्यधिक संवेदनशील होते हैं। ऐसे में सूखे पत्तों में लगाई गई छोटी-सी आग भी कुछ ही समय में बड़े क्षेत्र में फैल सकती है और जंगलों के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।

जमीन साफ करने के लिए लगाई जाती है आग

स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ ग्रामीण महुआ चुनने से पहले पेड़ों के नीचे गिरे सूखे पत्तों को साफ करने के लिए उनमें आग लगा देते हैं। उनका मानना होता है कि पत्ते जल जाने से जमीन साफ हो जाएगी और महुआ चुनना आसान हो जाएगा।

लेकिन कई बार यह आग नियंत्रण से बाहर हो जाती है और आसपास के पेड़-पौधों तक फैल जाती है। इससे जंगल के बड़े हिस्से को नुकसान पहुंच सकता है।

जंगल की हरियाली और छोटे पौधों को नुकसान

विशेषज्ञों के अनुसार जंगल में लगी आग का असर केवल पेड़ों तक ही सीमित नहीं रहता। इससे छोटे-छोटे पौधे जलकर नष्ट हो जाते हैं, जो भविष्य में बड़े पेड़ों का रूप लेते।

इसके अलावा मिट्टी में रहने वाले कई प्रकार के सूक्ष्म जीवाणु और कीट भी आग के कारण नष्ट हो जाते हैं। ये जीवाणु जंगल के प्राकृतिक संतुलन और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

जब ये नष्ट हो जाते हैं तो जंगल के प्राकृतिक विकास पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

वन्यजीवों के आश्रय स्थल भी होते हैं प्रभावित

जंगल में आग लगने से वहां रहने वाले कई वन्यजीवों के आश्रय स्थल भी नष्ट हो जाते हैं। छोटे जानवर, पक्षी और अन्य जीव-जंतु आग से बच नहीं पाते और उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

कई बार आग इतनी तेजी से फैलती है कि वन्यजीवों को सुरक्षित स्थान पर जाने का मौका भी नहीं मिल पाता। इससे जैव विविधता पर भी असर पड़ता है।

वन विभाग ने लोगों से की अपील

इस मामले को गंभीरता से लेते हुए वन क्षेत्र पदाधिकारी सुरेन्द्र सिंह ने लोगों से अपील की है कि महुआ बिनने के लिए जंगलों में आग लगाने से बचें और जंगलों की सुरक्षा में सहयोग करें।

सुरेन्द्र सिंह ने कहा: “महुआ चुनने के लिए जंगलों में सूखे पत्तों में आग लगाने से बचें। छोटी-सी लापरवाही भी कई बार पूरे जंगल में भयंकर आग का रूप ले सकती है, जिससे पेड़-पौधों और वन्यजीवों को भारी नुकसान होता है।”

उन्होंने कहा कि जंगल हमारी अमूल्य प्राकृतिक संपदा हैं और इन्हें सुरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

आग दिखे तो तुरंत दें सूचना

वन विभाग ने लोगों से यह भी अपील की है कि यदि कहीं जंगल में आग लगती दिखाई दे तो तुरंत इसकी सूचना विभाग को दें, ताकि समय रहते आग पर काबू पाया जा सके।

अधिकारियों का कहना है कि समय पर जानकारी मिलने से बड़े नुकसान को रोका जा सकता है।

उन्होंने लोगों को यह भी याद दिलाया कि जंगलों में रहने वाले पशु-पक्षी और अन्य जीव-जंतु भी प्रकृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनकी सुरक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है।

न्यूज़ देखो: जागरूकता से ही बचेंगे जंगल और पर्यावरण

महुआ चुनने के लिए सूखे पत्तों में आग लगाने की परंपरा कई जगहों पर देखने को मिलती है, लेकिन बदलते पर्यावरणीय हालात में यह तरीका बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। छोटी-सी लापरवाही जंगल की बड़ी तबाही का कारण बन सकती है।

जरूरी है कि ग्रामीणों के बीच इस विषय पर जागरूकता बढ़ाई जाए और जंगलों की सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएं। जंगल सुरक्षित रहेंगे तभी पर्यावरण और वन्यजीव भी सुरक्षित रहेंगे।

हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

प्रकृति की रक्षा करना हम सबकी जिम्मेदारी

जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं होते, बल्कि यह पूरी पृथ्वी के जीवन तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। जंगलों की सुरक्षा से ही जल, हवा और पर्यावरण का संतुलन बना रहता है।

इसलिए हमें छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर प्रकृति की रक्षा करनी चाहिए। यदि आप भी अपने आसपास जंगलों में आग लगते देखें तो तुरंत प्रशासन या वन विभाग को सूचना दें।

इस खबर को अधिक से अधिक लोगों तक साझा करें और जंगलों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने में अपना योगदान दें।

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Written by

खलारी, रांची

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