
#सिमडेगा #शिक्षा_संस्कार : भारतीय संस्कृति, अनुशासन और प्रतिभा का भव्य संगम बना विद्यालय का वार्षिकोत्सव
- सरस्वती शिशु विद्या मंदिर सलडेगा में स्थापना दिवस सह वार्षिकोत्सव का गरिमामय आयोजन।
- डॉ. भानु प्रताप साहू रहे मुख्य अतिथि, प्रांत शिक्षा प्रमुखों की विशिष्ट उपस्थिति।
- मां सरस्वती, ओउम एवं भारत माता के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से कार्यक्रम का शुभारंभ।
- विद्यार्थियों द्वारा परेड, योग, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं पारंपरिक नृत्य की शानदार प्रस्तुति।
- विभिन्न प्रतियोगिताओं में एकलव्य दल समग्र विजेता घोषित।
- संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का दिया गया सशक्त संदेश।
सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, सलडेगा सिमडेगा का परिसर उस समय उल्लास, अनुशासन और भारतीय संस्कृति की अनुपम छटा से आलोकित हो उठा, जब विद्यालय का स्थापना दिवस सह वार्षिकोत्सव अत्यंत गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। वनवासी कल्याण केंद्र, झारखंड की शैक्षिक इकाई श्रीहरि वनवासी विकास समिति झारखंड द्वारा संचालित इस विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम ने शिक्षा के साथ संस्कार की मजबूत झलक प्रस्तुत की।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्या की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती, ओउम तथा भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्चन के साथ हुआ, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक गरिमा और सांस्कृतिक चेतना से भर दिया।
मुख्य एवं विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर डॉ. भानु प्रताप साहू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं प्रांत शिक्षा प्रमुख श्री सुभाष चंद्र दुबे जी तथा प्रांत सह शिक्षा प्रमुख श्री जगमोहन बड़ाईक जी विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुए। अतिथियों का स्वागत एवं परिचय संकुल प्रमुख श्री संतोष दास जी द्वारा आत्मीय शब्दों में कराया गया।
मुख्य अतिथि डॉ. भानु प्रताप साहू ने अपने संबोधन में विद्यालय के शैक्षिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि सरस्वती शिशु विद्या मंदिर केवल कक्षाओं का समूह नहीं, बल्कि भारत के भविष्य के निर्माण का केंद्र है। उन्होंने कहा कि ऐसे विद्यालय राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव रखते हैं।
विशिष्ट अतिथि प्रांत शिक्षा प्रमुख श्री सुभाष चंद्र दुबे जी ने सरस्वती शिशु विद्या मंदिर सलडेगा को उपलब्धियों से भरा विद्यालय बताते हुए भैया-बहनों से आह्वान किया कि वे सदैव इस लक्ष्य के साथ आगे बढ़ें कि भारत को विश्व गुरु बनाने में अपना योगदान दें।
विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने मोहा मन
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण विद्यालय के चारों दल — छत्रपति शिवाजी दल, एकलव्य दल, आरुणि दल और भरत दल — के भैया-बहनों द्वारा प्रस्तुत भव्य परेड, योग प्रदर्शन, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं रूप सज्जा रहे। विद्यार्थियों का अनुशासन, तालमेल और आत्मविश्वास दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर गया।
दंड चालन, डमकच गीत और पारंपरिक नृत्य की प्रस्तुतियों ने भारतीय लोकसंस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत करते हुए पूरे वातावरण को रोमांच और उत्साह से भर दिया।
संस्कारवान शिक्षा पर दिया गया बल
प्रांत सह शिक्षा प्रमुख श्री जगमोहन बड़ाईक जी ने अपने उद्बोधन में श्रीहरि वनवासी विकास समिति के उद्देश्यों और कार्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और सांस्कृतिक चेतना का विकास करते हैं, जो उन्हें जीवन में सही दिशा प्रदान करता है।
प्रतियोगिताओं में दिखी स्वस्थ प्रतिस्पर्धा
प्रतियोगिताओं के परिणाम भी अत्यंत रोचक रहे।
परेड प्रतियोगिता में शिवाजी दल ने प्रथम, आरुणि दल ने द्वितीय और एकलव्य दल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
योग प्रदर्शन में आरुणि दल प्रथम, शिवाजी दल द्वितीय तथा भरत दल तृतीय रहा।
तंबू निरीक्षण में एकलव्य दल प्रथम, आरुणि दल द्वितीय और शिवाजी दल तृतीय स्थान पर रहे।
रूप सज्जा प्रतियोगिता में एकलव्य दल प्रथम, शिवाजी दल द्वितीय तथा भरत दल तृतीय स्थान पर रहा।
एकलव्य दल बना समग्र विजेता
कुल अंकों के आधार पर 1080 अंक प्राप्त कर एकलव्य दल समग्र विजेता घोषित हुआ। 755 अंकों के साथ भरत दल द्वितीय तथा 735 अंकों के साथ आरुणि दल तृतीय स्थान पर रहा। विजेताओं को अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया, जिससे विद्यार्थियों में उत्साह और आत्मविश्वास का संचार हुआ।
आभार ज्ञापन के साथ हुआ समापन
समापन अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री जितेंद्र कुमार पाठक जी ने सभी अतिथियों, अभिभावकों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में विद्यालय प्रबंध कार्यकारिणी समिति के अध्यक्ष श्री हनुमान बुंदिया जी, सचिव श्री चंदेश्वर मुंडा जी, उपाध्यक्ष श्री विद्या विधायक जी, श्री हरिश्चंद्र भगत जी, सहसचिव श्री रामकृष्ण महतो जी, विद्यालय परिवार के आचार्य-आचार्या तथा भैया-बहन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
न्यूज़ देखो: शिक्षा के साथ संस्कार का सशक्त उदाहरण
सरस्वती शिशु विद्या मंदिर सलडेगा का यह वार्षिकोत्सव स्पष्ट करता है कि विद्यालय शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन और संस्कृति को समान महत्व देता है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
संस्कार से सशक्त भविष्य की ओर
ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, नेतृत्व और राष्ट्रभक्ति का विकास होता है। अपने क्षेत्र के विद्यालयों और प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करें। इस खबर को साझा करें और अपने विचार कमेंट के माध्यम से हमारे साथ जरूर साझा करें।







