
#गढ़वा #सामूहिक_विवाह : बाबा खोनहरनाथ मंदिर प्रांगण में 21 अनाथ बेटियों का विधि-विधान से विवाह संपन्न हुआ।
21 फरवरी की रात गढ़वा के बाबा खोनहरनाथ मंदिर प्रांगण में जानकी सामूहिक विवाह फाउंडेशन द्वारा 21 अनाथ व असहाय बेटियों का विधि-विधान से सामूहिक विवाह कराया गया। इस आयोजन का उद्घाटन पूर्व मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर ने किया। कार्यक्रम सामाजिक सहयोग, करुणा और जिम्मेदारी का प्रतीक बनकर उभरा। इससे बेटियों के सम्मान और सामाजिक समरसता का मजबूत संदेश गया।
- 21 फरवरी 2026 को बाबा खोनहरनाथ मंदिर, गढ़वा में भव्य सामूहिक विवाह।
- जानकी सामूहिक विवाह फाउंडेशन द्वारा 21 अनाथ बेटियों की शादी।
- उद्घाटन पूर्व मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर ने फीता काटकर किया।
- संरक्षक सत्येंद्र चौबे उर्फ पांडेय बाबा का विशेष योगदान।
- कुल 21 जोड़ों ने वैदिक मंत्रों के बीच सात फेरे लिए।
- कई गणमान्य अतिथि व समाजसेवियों ने नवदंपतियों को दिया आशीर्वाद।
गढ़वा की पावन धरती पर 21 फरवरी की रात एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने मानवता, संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत किया। बाबा खोनहरनाथ मंदिर का प्रांगण सिर्फ एक विवाह स्थल नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक चेतना और करुणा का केंद्र बन गया, जहां 21 अनाथ और असहाय बेटियों का सामूहिक विवाह पूरे सम्मान और विधि-विधान के साथ संपन्न कराया गया। इस आयोजन ने न केवल बेटियों को नया जीवन दिया, बल्कि समाज को बेटियों के प्रति संवेदनशील बनने का संदेश भी दिया।
मंदिर प्रांगण बना मानवता और करुणा का केंद्र
कार्यक्रम की शुरुआत पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुई। मंदिर परिसर में घंटियों की गूंज, शंखनाद और मंगल गीतों ने वातावरण को आध्यात्मिक और भावुक बना दिया। जैसे ही 21 बेटियां दुल्हन के रूप में सजीं, पूरे प्रांगण में खुशी और भावनाओं का अनोखा संगम दिखाई दिया। हर चेहरे पर मुस्कान और हर आंखों में भविष्य के सपनों की चमक स्पष्ट झलक रही थी।
जानकी सामूहिक विवाह फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में हर बेटी को सम्मानपूर्वक विवाह के सभी आवश्यक रीति-रिवाजों के साथ विदा किया गया। आयोजन में सामाजिक गरिमा और परंपरा का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे यह विवाह सिर्फ एक आयोजन नहीं बल्कि सामाजिक उत्सव बन गया।
मुख्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस भव्य आयोजन का उद्घाटन झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर ने फीता काटकर किया। उनके संबोधन ने कार्यक्रम को और अधिक भावनात्मक बना दिया।
मिथिलेश कुमार ठाकुर ने कहा: “आज इन बेटियों के चेहरे की मुस्कान ही हमारे समाज की सबसे बड़ी उपलब्धि है, कन्यादान से बड़ा कोई दान नहीं, जानकी फाउंडेशन ने जो किया है, वह केवल विवाह नहीं, बल्कि 21 घरों में नई रोशनी जलाने का कार्य है।”
उनके शब्दों ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया और तालियों की गूंज के बीच कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
नवविवाहित जोड़ों की भावुक प्रतिक्रिया
कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया जब नवविवाहित बेटियों और वरों ने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। एक बेटी ने भावुक स्वर में अपनी जीवन यात्रा साझा करते हुए कहा—
एक नवविवाहित बेटी ने कहा: “हमें लगता था हमारी शादी शायद कभी नहीं होगी, माता-पिता नहीं हैं, सहारा नहीं था लेकिन आज इस फाउंडेशन ने हमें नया जीवन दिया है, हम सब इनके ऋणी रहेंगे।”
वहीं एक वर ने समाज के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा—
एक वर ने कहा: “आज हमें सिर्फ जीवनसाथी नहीं मिला, बल्कि समाज का आशीर्वाद मिला है, हम वचन देते हैं कि अपनी पत्नी को हर सुख देंगे और इस सम्मान को हमेशा बनाए रखेंगे।”
इन शब्दों में जिम्मेदारी, सम्मान और नए जीवन की सच्ची भावना स्पष्ट दिखाई दी।
आयोजन में फाउंडेशन की महत्वपूर्ण भूमिका
इस विशाल आयोजन को सफल बनाने में संरक्षक सत्येंद्र चौबे उर्फ पांडेय बाबा की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। उनके मार्गदर्शन और सहयोग से यह कार्यक्रम व्यवस्थित और गरिमामयी तरीके से संपन्न हुआ।
फाउंडेशन के सचिव रितेश तिवारी उर्फ महाकाल तिवारी ने अपने संबोधन में कहा—
रितेश तिवारी ने कहा: “हमारा उद्देश्य केवल शादी कराना नहीं है, बल्कि इन बेटियों को सम्मान के साथ जीवन देना है, जब तक समाज में एक भी बेटी असहाय है, हमारा प्रयास जारी रहेगा।”
वहीं अध्यक्ष संजीव दुबे ने कहा—
संजीव दुबे ने कहा: “जब एक बेटी का घर बसता है, तो पूरा समाज बसता है, आज 21 बेटियों के जीवन में नई सुबह आई है, यही हमारे फाउंडेशन की सबसे बड़ी सफलता है।”
गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति और आशीर्वाद
इस पावन अवसर पर कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे और नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया। कार्यक्रम में महा मंत्री प्रियांशु दुबे, सदस्य चंदन धर दुबे, सदस्य अजीत उपाध्याय, शुभम पासवान, शिवम् दुबे, विशाल सिंह, पिंटू तिवारी एवं सह संरक्षक आलोक पाण्डे सहित अनेक समाजसेवी एवं स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
सभी ने एक स्वर में इस आयोजन की सराहना की और इसे समाज के लिए प्रेरणादायी पहल बताया।
सात फेरों के साथ 21 घरों में जली नई रोशनी
जब 21 जोड़ों ने एक साथ वैदिक मंत्रों के बीच सात फेरे लिए, तो पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो एक साथ 21 घरों में दीप प्रज्ज्वलित हो उठे हों। मंगल गीत, शंखनाद और तालियों की गूंज ने इस ऐतिहासिक क्षण को और भी अविस्मरणीय बना दिया।
मेले जैसा माहौल, सजे मंडप, पारंपरिक रीति-रिवाज और सामूहिक आशीर्वाद ने इस आयोजन को सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण बना दिया।
न्यूज़ देखो: सामाजिक जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण बना गढ़वा का सामूहिक विवाह
गढ़वा में आयोजित यह सामूहिक विवाह कार्यक्रम समाज की संवेदनशीलता और सहयोग की शक्ति को दर्शाता है। यह पहल बताती है कि यदि समाज संगठित होकर आगे बढ़े, तो असहाय बेटियों के जीवन में भी नई उम्मीद जगाई जा सकती है। ऐसे आयोजन प्रशासन और समाज दोनों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। क्या भविष्य में ऐसे प्रयासों को और व्यापक रूप दिया जाएगा, यह देखने योग्य होगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
बेटियों के सम्मान की जिम्मेदारी समाज की, सहयोग से बदलती हैं किस्मत
समाज तभी सशक्त बनता है जब वह अपने कमजोर वर्गों का हाथ थामता है। अनाथ और असहाय बेटियों को सम्मानपूर्वक जीवन देना सिर्फ दान नहीं, बल्कि सामाजिक कर्तव्य है।
ऐसे आयोजनों से यह संदेश मिलता है कि बेटियां बोझ नहीं, बल्कि समाज की अमूल्य धरोहर हैं।
जरूरत है कि हर क्षेत्र में ऐसे मानवीय प्रयासों को बढ़ावा दिया जाए और सामूहिक सहयोग की भावना मजबूत हो।
आइए, हम सब मिलकर बेटियों के सम्मान और सुरक्षा का संकल्प लें, समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में अपनी भागीदारी निभाएं।
आपकी एक जागरूक सोच कई जिंदगियों को नई दिशा दे सकती है। अपनी राय कमेंट करें, खबर को ज्यादा से ज्यादा साझा करें और समाज में जागरूकता फैलाने में सहभागी बनें।






