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गढ़वा: रात के अंधेरे में हुई मनमानी सड़क मापी पर बवाल, व्यापारियों ने जताया आक्रोश — उपायुक्त से लगाई गुहार

#गढ़वा #विवाद : शिवालय कंस्ट्रक्शन द्वारा रातोंरात की गई सड़क मापी से व्यापारियों में उबाल, डीसी से हस्तक्षेप की मांग
  • गढ़वा शहर में सड़क मापी को लेकर व्यापारियों और निर्माण एजेंसी के बीच बढ़ा विवाद।
  • शिवालय कंस्ट्रक्शन पर बिना अनुमति रात में नापी कार्य करने का आरोप।
  • दुकानदारों के मकानों पर लाल और पीले निशान, लोगों में फैला डर और गुस्सा।
  • गढ़वा चैंबर ऑफ कॉमर्स ने उपायुक्त दिनेश कुमार यादव से मिलकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की।
  • व्यापारियों ने कहा — “मनमानी मापी से बाजार उजड़ जाएगा, आंदोलन की चेतावनी।”

गढ़वा शहर के व्यापारिक गलियारों में सड़क मापी को लेकर इस समय असंतोष की लहर दौड़ गई है। स्थानीय व्यापारियों ने निर्माण एजेंसी शिवालय कंस्ट्रक्शन पर मनमानी और बिना अनुमति के कार्रवाई करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि कंपनी के कर्मियों ने रात के अंधेरे में दुकानों और मकानों पर लाल व पीले निशान लगा दिए, जिससे पूरे शहर में अफरातफरी का माहौल बन गया। यह घटना शनिवार की सुबह तब सामने आई जब लोगों ने अपने-अपने भवनों पर रंगे हुए निशान देखे।

प्रशासनिक अनुमति के बिना रात में हुई नापी, बढ़ा विवाद

गढ़वा के मुख्य बाजार में यह मापी कार्य देर रात किया गया, जिससे सुबह पूरे इलाके में भ्रम और गुस्सा दोनों फैल गया। व्यापारियों का कहना है कि इस नापी का कोई स्पष्ट मानक नहीं बताया गया और यह प्रशासनिक निगरानी के बिना की गई। गढ़वा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रतिनिधिमंडल ने इस संदर्भ में उपायुक्त दिनेश कुमार यादव से मुलाकात कर शिवालय कंस्ट्रक्शन की मनमानी पर रोक लगाने की मांग की।

बबलू कुमार पटवा (अध्यक्ष, गढ़वा चैंबर ऑफ कॉमर्स) ने कहा: “बिना अनुमति के रातों-रात मकानों पर लाल निशान लगाना सरासर अनुचित है। प्रशासन को चाहिए कि नापी की प्रक्रिया दोबारा और पारदर्शी तरीके से कराई जाए।”

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि पूर्व में भी प्रशासन द्वारा सड़क मापी की जा चुकी है और तब किसी भी मकान में स्थायी अतिक्रमण नहीं पाया गया था। केवल कुछ जगहों पर मामूली संरचनाएं, जैसे सीढ़ियां या छज्जे हटाए गए थे।

सड़क चौड़ाई को लेकर उठा सवाल

व्यापारियों ने तकनीकी तथ्यों का हवाला देते हुए कहा कि गढ़वा कचहरी से लेकर बिजली ऑफिस तक की मेन रोड की स्वीकृत चौड़ाई 55 फीट है, जबकि वर्तमान में सड़क 52 फीट चौड़ी है। ऐसे में दो से चार मीटर तक अतिक्रमण बताना पूरी तरह से अव्यवहारिक है। उनका कहना है कि इस मापी के आधार पर यदि मकान तोड़े गए तो पूरा बाजार बर्बाद हो जाएगा।

अजय कुमार केशरी (चैंबर प्रतिनिधि) ने कहा: “हम विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन यह मापी पूरी तरह से भ्रामक और गैरकानूनी है। प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।”

व्यापारियों ने यह भी कहा कि जब गढ़वा शहर के बाहर बाईपास सड़क पहले से ही बन चुकी है, तब मुख्य मार्ग पर चौड़ीकरण का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई केवल जनता को परेशान करने के उद्देश्य से की जा रही है।

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उपायुक्त से हस्तक्षेप और पारदर्शिता की मांग

उपायुक्त से मिलकर चैंबर प्रतिनिधिमंडल ने एक लिखित मांगपत्र भी सौंपा जिसमें स्पष्ट किया गया है कि शिवालय कंस्ट्रक्शन की इस कार्रवाई ने शहर में अविश्वास और असंतोष का माहौल बना दिया है। व्यापारियों ने मांग की कि सड़क मापी को प्रशासनिक देखरेख में पुनः किया जाए ताकि जनता का भरोसा बहाल हो सके।

प्रतिनिधिमंडल में अजय कुमार केशरी, आदित्य प्रकाश, ज्योति प्रकाश, पूनमचंद कांस्यकार, मनीष कमलापुरी और राजकुमार सोनी शामिल थे। सभी ने एक स्वर में कहा कि शहर के विकास के नाम पर जनता को परेशान करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

आंदोलन की चेतावनी, बढ़ती जनभावना

गढ़वा के व्यापारियों ने स्पष्ट कहा है कि यदि इस मनमानी नापी पर रोक नहीं लगाई गई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। स्थानीय नागरिकों ने भी व्यापारियों का समर्थन करते हुए कहा कि प्रशासन को जल्द ही इस विवाद का समाधान निकालना चाहिए। शहर के लोगों का कहना है कि यह मुद्दा अब सिर्फ व्यापारियों का नहीं, बल्कि पूरे गढ़वा की जनसामान्य चिंता बन गया है।

गढ़वा चैंबर ऑफ कॉमर्स के उपाध्यक्ष ज्योति प्रकाश ने कहा कि यदि प्रशासन पारदर्शी जांच नहीं करता है, तो चैंबर शांतिपूर्ण धरना और ज्ञापन अभियान शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि शहर की व्यावसायिक गतिविधियाँ पहले से ही मंदी के दौर में हैं, ऐसे में ऐसी कार्रवाइयाँ व्यापारियों की आर्थिक स्थिति को और बिगाड़ देंगी।

न्यूज़ देखो: सड़क विकास के नाम पर मनमानी नहीं, पारदर्शिता जरूरी

गढ़वा में सड़क मापी विवाद यह स्पष्ट करता है कि विकास योजनाओं में पारदर्शिता और जन-सहमति कितनी आवश्यक है। बिना अनुमति और रातोंरात की गई कार्रवाई न केवल प्रशासनिक लापरवाही दर्शाती है, बल्कि जनता के भरोसे को भी कमजोर करती है। प्रशासन को चाहिए कि निर्माण एजेंसियों को जवाबदेह बनाए और जनता के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दे।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सजग व्यापारी, जिम्मेदार प्रशासन — तभी बनेगा संतुलित शहर

गढ़वा की यह घटना हमें याद दिलाती है कि शहर का विकास केवल सड़कों से नहीं, बल्कि संवाद और सहयोग से होता है। यदि प्रशासन और व्यापारी मिलकर काम करें, तो न केवल विवाद सुलझेंगे बल्कि एक आदर्श नगर की तस्वीर भी बनेगी। अब समय है कि हम सब अपनी जिम्मेदारी निभाएं — प्रशासन पारदर्शी बने, नागरिक जागरूक रहें, और व्यापारी एकजुट होकर शहर की पहचान बचाएं।
अपनी राय कमेंट करें, खबर को साझा करें और गढ़वा की आवाज़ दूर तक पहुंचाएं ताकि हर नागरिक अपने हक और शहर की शांति के लिए खड़ा हो सके।

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