गढ़वा: नरगिर आश्रम में रामकथा के तीसरे दिन श्रीराम जन्म के रहस्यों पर बालस्वामी प्रपन्नाचार्य का प्रवचन

गढ़वा: नरगिर आश्रम में रामकथा के तीसरे दिन श्रीराम जन्म के रहस्यों पर बालस्वामी प्रपन्नाचार्य का प्रवचन

author Sonu Kumar
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#गढ़वा – रामकथा में श्रीराम जन्म के आध्यात्मिक कारणों पर विस्तार से व्याख्यान:

  • नरगिर आश्रम, गढ़वा में चैत्र नवरात्र के अवसर पर रामकथा का आयोजन।
  • बालस्वामी प्रपन्नाचार्य ने श्रीराम जन्म के मूल कारणों पर किया गहन प्रकाश।
  • जय-विजय का श्राप और नारद मोह प्रसंग से जुड़ी घटनाओं का हुआ विस्तृत वर्णन।
  • भव्य झांकी और भजन संध्या में श्रद्धालुओं ने जमकर किया उत्सव का आनंद

जय-विजय का श्राप और श्रीराम जन्म का कारण

बालस्वामी प्रपन्नाचार्य जी ने कथा के तीसरे दिन श्रीराम जन्म के कारणों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भगवान विष्णु के अवतारों का मुख्य कारण श्राप और वरदानों का संयोग रहा है। जय-विजय, जो भगवान विष्णु के द्वारपाल थे, सनकादि मुनियों के श्राप के कारण तीन जन्मों तक राक्षस योनि में जन्म लेने के लिए बाध्य हुए।

  • पहले जन्म में जय हिरण्याक्ष और विजय हिरण्यकशिपु बने, जिनका वध भगवान वराह और नरसिंह अवतार ने किया।
  • दूसरे जन्म में जय रावण और विजय कुंभकर्ण बने, जिनका वध श्रीराम और लक्ष्मण के हाथों हुआ।
  • तीसरे जन्म में जय शिशुपाल और विजय दंतवक्त्र बने, जिनका अंत भगवान श्रीकृष्ण ने किया।

नारद मोह प्रसंग और श्रीराम जन्म की कड़ी

कथावाचक बालस्वामी प्रपन्नाचार्य ने नारद मोह प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि अहंकार व्यक्ति के पतन का कारण बनता है। नारद मुनि ने जब कामदेव पर विजय प्राप्त की, तो उन्हें इस पर गर्व हो गया। भगवान विष्णु ने नारद मुनि का अभिमान दूर करने के लिए एक काल्पनिक लोक की रचना की, जहां राजकुमारी विश्वमोहिनी के स्वयंवर का आयोजन किया गया।

  • नारद मुनि राजकुमारी से विवाह करने के लिए भगवान विष्णु से हरि रूप मांगते हैं
  • भगवान विष्णु उन्हें वानर का रूप प्रदान कर देते हैं, जिससे नारद क्रोधित हो जाते हैं।
  • इस घटना से आहत होकर नारद मुनि भगवान विष्णु को श्राप देते हैं, जिससे भगवान को राम रूप में जन्म लेना पड़ा

श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब, झांकी और भजन संध्या में भक्त झूम उठे

राम जन्मोत्सव के मौके पर आकर्षक झांकी निकाली गई, जिसमें श्रद्धालुओं ने भावपूर्ण श्रद्धा प्रकट की। बधाई भजन के दौरान श्रद्धालु झूमते और भक्ति में लीन होते नजर आए

कथा समिति के अध्यक्ष चन्दन जायसवाल ने इस भव्य आयोजन में उमड़ी भारी भीड़ को लेकर सभी भक्तों का आभार व्यक्त किया और कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है

आयोजन को सफल बनाने में इनका रहा योगदान

इस आयोजन को सफल बनाने में जगजीवन बघेल, दीनानाथ बघेल, जयशंकर बघेल, गुड्डू हरि, विकास ठाकुर, भरत केशरी, दिलीप पाठक, गौतम शर्मा, धर्मनाथ झा, अजय राम, गौतम चंद्रवंशी, सोनू बघेल, पवन बघेल, सुमित लाल, अजय सिंह, राकेश चंद्रा, सूरज सिंह, शांतनु केशरी, शुभम् चंद्रवंशी, सोनू, सुन्दरम्, शिवा सहित अन्य लोगों का विशेष योगदान रहा।

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धार्मिक आयोजनों से हमें आध्यात्मिक शांति और जीवन के गहरे रहस्यों को समझने का अवसर मिलता है। इस भव्य कथा में श्रद्धालुओं की भागीदारी ने इसे और भी दिव्य बना दिया। ‘न्यूज़ देखो’ आपके लिए ऐसे ही धार्मिक और प्रेरणादायक समाचार लाता रहेगाहर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

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