Garhwa

गढ़वा पुलिस कप्तान ने डंडई थाना में लंबित कांडों की समीक्षा की, माओवादी परिजन से की आत्मसमर्पण की अपील

#गढ़वा #पुलिस_रिव्यू : अपराध नियंत्रण और शांति व्यवस्था के लिए सख्त निर्देश
  • SP अमन कुमार और SDPO नीरज कुमार ने डंडई थाना का दौरा किया।
  • सभी पुलिस पदाधिकारियों को लंबित कांडों के शीघ्र निष्पादन का निर्देश।
  • माओवादी सदस्य राजू भुइयां के परिजनों से मुलाकात कर किया आत्मसमर्पण की अपील
  • गश्त और गुप्तचर तंत्र को और अधिक मजबूत करने का आदेश।
  • थाना परिसर की साफ-सफाई और बैरक रखरखाव पर विशेष जोर।

गढ़वा। पुलिस अधीक्षक श्री अमन कुमार (भा.पु.से.) एवं अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी श्री नीरज कुमार ने मंगलवार को डंडई थाना का निरीक्षण कर वहां लंबित मामलों की गहन समीक्षा की। इस मौके पर उन्होंने सभी अनुसंधानकर्ताओं को स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी पुराने मामलों का निष्पादन जल्द से जल्द सुनिश्चित किया जाए

अपराधियों पर पैनी नजर

SP ने आदेश दिया कि थाना क्षेत्र में सक्रिय वारंटियों और आपराधिक प्रवृत्ति वाले व्यक्तियों पर विशेष नजर रखी जाए। इसके लिए गश्ती व्यवस्था मजबूत करने और गुप्तचर तंत्र को सक्रिय रखने पर बल दिया गया। उन्होंने कहा कि अपराध पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करना ही पुलिस की प्राथमिकता है।

माओवादी परिजनों को आत्मसमर्पण का संदेश

निरीक्षण के दौरान पुलिस अधीक्षक अमन कुमार और SDPO नीरज कुमार माओवादी संगठन के सक्रिय सदस्य राजू भुइयां (पिता स्व. छोटेलाल भुइयां, निवासी लवाही कला, थाना डंडई) के घर पहुंचे। वहां परिजनों को राज्य सरकार की आत्मसमर्पण नीति की जानकारी दी गई और राजू भुइयां को आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया।

थाना प्रबंधन और साफ-सफाई पर भी ध्यान

कांड समीक्षा के बाद SP ने थाना के विभिन्न पंजी का अवलोकन किया और उन्हें तुरंत अद्यतन करने का निर्देश दिया। उन्होंने थाना परिसर की साफ-सफाई, आवासन हेतु बैरकों की देखभाल और रखरखाव पर भी जोर दिया।

इस मौके पर थाना प्रभारी डंडई सहित सभी पुलिस पदाधिकारी उपस्थित रहे।

न्यूज़ देखो: पुलिस की सख्ती और नरमी का संतुलन

गढ़वा पुलिस का यह कदम बताता है कि प्रशासन अपराध और माओवाद दोनों पर सख्ती बरतते हुए भी सुधार और आत्मसमर्पण का रास्ता खुला रख रहा है। यह रणनीति समाज में शांति और विश्वास कायम करने में सहायक साबित हो सकती है।

हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

बदलाव की राह आत्मसमर्पण से होकर जाती है

अब समय है कि समाज और पुलिस मिलकर माओवाद जैसी समस्या का समाधान खोजें। आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटना न केवल व्यक्तिगत जीवन को सुरक्षित करता है, बल्कि परिवार और समाज को भी उजाले की ओर ले जाता है। अपनी राय कमेंट करें और इस खबर को शेयर करें ताकि जागरूकता फैले।

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Shashi Bhushan Mehta

डंडई, गढ़वा

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