
#गढ़वा #राजनीतिक_विवाद : महिलाओं के प्रति अमर्यादित बयान का आरोप—संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में जताया कड़ा विरोध।
गढ़वा में महिलाओं पर कथित अमर्यादित टिप्पणी को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। जिला परिषद अध्यक्ष शांति देवी और मेराल प्रखंड प्रमुख दीप माला ने गढ़वा विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी पर महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक सोच और बयान देने का आरोप लगाया। गुरुवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों ने विधायक के बयानों को निंदनीय बताते हुए भाजपा नेतृत्व से कार्रवाई की मांग की। मामला महिला सम्मान, राजनीतिक मर्यादा और सार्वजनिक आचरण से जुड़ा होने के कारण जिले में व्यापक चर्चा का विषय बन गया है।
- शांति देवी और दीप माला ने संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जताया विरोध।
- विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी पर महिलाओं के प्रति अमर्यादित टिप्पणी का आरोप।
- पहले पोस्टर पर कालिख, अब प्रतीकात्मक विरोध की चेतावनी।
- भाजपा नेतृत्व से अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग।
- महिला जनप्रतिनिधियों और आम महिलाओं के सम्मान का मुद्दा उठा।
गढ़वा में गुरुवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस ने स्थानीय राजनीति को तीखे मोड़ पर ला खड़ा किया। जिला परिषद अध्यक्ष शांति देवी और मेराल प्रखंड प्रमुख दीप माला ने होटल पद्मावती में संयुक्त रूप से मीडिया को संबोधित करते हुए गढ़वा विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी पर महिलाओं के खिलाफ लगातार अमर्यादित टिप्पणी करने का गंभीर आरोप लगाया। दोनों महिला जनप्रतिनिधियों ने विधायक के बयानों को न केवल महिलाओं का अपमान बताया, बल्कि इसे सामाजिक मूल्यों और लोकतांत्रिक मर्यादा के खिलाफ करार दिया।
महिलाओं के प्रति सोच पर उठे सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शांति देवी ने कहा कि विधायक की टिप्पणियां यह दर्शाती हैं कि उनकी महिलाओं के प्रति सोच “काफी घटिया” है। उन्होंने सवाल उठाया कि राजनीति में सक्रिय महिलाओं को जिस तरह के शब्दों से संबोधित किया गया, वह न केवल आपत्तिजनक है बल्कि पूरे समाज को शर्मसार करने वाला है। उन्होंने कहा कि यदि महिलाएं जनप्रतिनिधि बनकर जनता की सेवा कर रही हैं, तो उन्हें इस तरह के आरोपों और शब्दों से अपमानित करना अस्वीकार्य है।
पहले पोस्टर पर कालिख, अब और कड़ा विरोध
मेराल प्रखंड प्रमुख दीप माला ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यह पहला मौका नहीं है जब महिलाओं ने विधायक के बयान का विरोध किया हो। उन्होंने कहा कि पिछली बार महिलाओं ने विरोध स्वरूप पोस्टर पर कालिख पोती थी, लेकिन यदि इस तरह की भाषा और सोच जारी रही तो महिलाएं और भी कड़े प्रतीकात्मक विरोध के लिए मजबूर होंगी। उन्होंने इसे महिलाओं के आत्मसम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया।
परिवार और पार्टी पर भी उठे सवाल
प्रेस वार्ता में यह सवाल भी उठाया गया कि जब विधायक स्वयं चुनाव लड़ रहे थे, तब उनकी पत्नी और बेटी भी प्रचार में सक्रिय थीं। ऐसे में क्या वे उनके लिए भी वही शब्द प्रयोग करेंगे जो उन्होंने अन्य राजनीतिक महिलाओं के लिए किए। शांति देवी ने यह भी पूछा कि क्या भाजपा की महिला कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के प्रति भी विधायक की यही सोच है। उन्होंने कहा कि “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे अभियानों की बात करने वाली पार्टी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह इस तरह के बयानों से सहमत है।
कार्रवाई की मांग, चुप्पी पर सवाल
दोनों महिला नेताओं ने आरोप लगाया कि अब तक विधायक के खिलाफ कोई ठोस अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि मुद्दों और जनसमस्याओं पर बात करने के बजाय महिलाओं पर टिप्पणी करना एक जनप्रतिनिधि के पद की गरिमा के खिलाफ है। उन्होंने भाजपा के प्रदेश नेतृत्व से यह स्पष्ट करने की मांग की कि क्या पार्टी इस तरह के बयानों का समर्थन करती है या नहीं।
पूर्व मंत्री और महिला जनप्रतिनिधियों का संदर्भ
प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी कहा गया कि गढ़वा की कई जागरूक और सक्रिय महिलाएं अपनी समस्याओं को लेकर पूर्व मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर से मिलती हैं। इस पर सवाल उठाया गया कि क्या विधायक की नजर में ऐसी सभी महिलाएं भी उसी श्रेणी में आती हैं, जैसा उनके बयान से प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि विधायक को सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करना चाहिए कि वे किस संदर्भ में ऐसे शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं।
महिला की भूमिका पर अपमानजनक दृष्टिकोण का आरोप
शांति देवी और दीप माला ने कहा कि विधायक की भाषा से ऐसा प्रतीत होता है मानो वे महिलाओं को केवल घरेलू भूमिकाओं तक सीमित देखना चाहते हों। उन्होंने सवाल किया कि पंचायत, वार्ड, प्रखंड और जिला स्तर पर चुनी गई महिला प्रतिनिधियों को क्या उसी नजर से देखा जा रहा है। यह न केवल महिलाओं का अपमान है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करता है।
शांति देवी ने कहा: “महिला सम्मान और सामाजिक मर्यादा के खिलाफ दिए गए ऐसे बयान अत्यंत निंदनीय हैं और इन्हें किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।”
आम जनता से अपील
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में दोनों नेताओं ने गढ़वा की आम जनता से अपील की कि वे इस तरह की सोच और भाषा के खिलाफ आवाज उठाएं। उन्होंने कहा कि यदि आज इसका विरोध नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियां भी ऐसे ही जनप्रतिनिधियों को आदर्श मानने लगेंगी, जो समाज के लिए घातक होगा।
न्यूज़ देखो: महिला सम्मान और राजनीति की मर्यादा
यह पूरा मामला केवल एक राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिला सम्मान, सार्वजनिक भाषा और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी से जुड़ा है। सवाल यह है कि क्या राजनीतिक दल अपने नेताओं के बयानों पर समय रहते लगाम लगाएंगे। गढ़वा की राजनीति में यह विवाद आगे क्या मोड़ लेता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
नारी सम्मान पर खामोशी नहीं, सवाल जरूरी
समाज तभी आगे बढ़ेगा जब महिला सम्मान पर कोई समझौता न हो। लोकतंत्र में सवाल उठाना नागरिकों का अधिकार है। अपनी राय साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और जिम्मेदार राजनीति के लिए आवाज बुलंद करें।







