गढ़वा: रामकथा अमृतवर्षा में संत बालस्वामी ने कहा – शिव कृपा बिना अधूरी है रामभक्ति

गढ़वा: रामकथा अमृतवर्षा में संत बालस्वामी ने कहा – शिव कृपा बिना अधूरी है रामभक्ति

author Sonu Kumar
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#गढ़वा : रामावतार के रहस्यों पर संत बालस्वामी का प्रवचन:

  • नरगिर आश्रम में रामकथा अमृतवर्षा के दूसरे दिन रामावतार के कारणों पर विस्तार से चर्चा।
  • संत बालस्वामी प्रपन्नाचार्य जी ने कहा – शिव कृपा के बिना रामभक्ति संभव नहीं।
  • भगवान शिव को ‘आदि वैष्णव’ बताया, जो नित्य रामनाम के जप में लीन रहते हैं।
  • श्रवण कुमार के माता-पिता के श्राप समेत अन्य कारणों से हुआ श्रीराम का अवतार।

रामकथा में हुआ भगवान शिव की भक्ति का उल्लेख

गढ़वा के गढ़देवी मुहल्ला स्थित नरगिर आश्रम में चैत नवरात्र के अवसर पर रामकथा अमृतवर्षा का आयोजन किया गया। कथा के दूसरे दिन अयोध्या से पधारे परम पूज्य बालस्वामी प्रपन्नाचार्य जी ने रामकथा के महत्व और भगवान श्रीराम के अवतार के कारणों पर प्रकाश डाला

उन्होंने बताया कि महर्षि याज्ञवल्क्य ने भारद्वाज मुनि को रामकथा सुनाते हुए कहा था कि बिना भगवान शिव की कृपा के रामभक्ति अधूरी है
भगवान शिव को नित्य रामनाम जप में लीन रहने के कारण ‘आदि वैष्णव’ कहा गया है

“राम कथा का श्रवण फल प्राप्ति के लिए नहीं, बल्कि निष्काम भाव से करना चाहिए। जब तक व्यक्ति अपने ज्ञान, तर्क, संशय और प्रतिष्ठा का त्याग नहीं करता, तब तक कथा का वास्तविक प्रभाव नहीं पड़ता।” – संत बालस्वामी प्रपन्नाचार्य जी

रामावतार के विभिन्न कारणों की विस्तृत व्याख्या

बालस्वामी जी ने भगवान श्रीराम के अवतार के कारणों पर गहन चर्चा की। उन्होंने बताया कि जब-जब अधर्म, अन्याय, अनीति और असत्य का विस्तार होता है, तब परमब्रह्म किसी न किसी रूप में अवतरित होकर धरती का उद्धार करते हैं

इस दौरान उन्होंने श्रवण कुमार के माता-पिता के श्राप, नारद मुनि के शाप, जय-विजय के शाप और मनु-शतरूपा को मिले वरदान जैसे कारणों का उल्लेख किया, जिनके फलस्वरूप भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में अवतार लिया

रामकथा आयोजन समिति का योगदान और श्रद्धालुओं की सहभागिता

रामकथा आयोजन समिति के अध्यक्ष चंदन जायसवाल ने गढ़वा एसडीएम संजय पांडेय को सम्मानित किया और कथा में शामिल श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया

कथा के सफल आयोजन में जगजीवन बघेल, दीनानाथ बघेल, जयशंकर बघेल, गुड्डू हरि, विकास ठाकुर, भरत केशरी, गौतम शर्मा, धर्मनाथ झा, अजय राम, गौतम चंद्रवंशी, सोनू बघेल, पवन बघेल, सुमित लाल, अजय सिंह, राकेश चंद्रा, सूरज सिंह, शांतनु केशरी, मुन्ना बघेल, शुभम चंद्रवंशी, सोनू, सुंदरम, शिवा सहित कई भक्तों ने विशेष योगदान दिया।

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गढ़वा

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