
#गढ़वा #स्वास्थ्य_सेवा : सदर अस्पताल में टूटा कुल्हा का सफल ऑपरेशन।
गढ़वा सदर अस्पताल में सीमित संसाधनों के बीच 52 वर्षीय सरस्वती देवी का टूटा कुल्हा का सफल ऑपरेशन किया गया। निजी क्लिनिक में महंगा इलाज संभव न होने पर परिजन सरकारी अस्पताल पहुंचे। डॉ. नौशाद आलम के नेतृत्व में सर्जरी सफल रही। मरीज की स्थिति फिलहाल स्थिर बताई गई है।
- सरस्वती देवी (52 वर्ष) का हिप ऑपरेशन सफल।
- निजी क्लिनिक में 80 हजार रुपये खर्च का अनुमान।
- ऑपरेशन किया डॉ. नौशाद आलम ने।
- मरीज लतदाग गांव, मेराल थाना क्षेत्र की निवासी।
- सदर अस्पताल में सीमित संसाधनों के बीच सर्जरी।
गढ़वा जिले के मेराल थाना क्षेत्र अंतर्गत लतदाग गांव निवासी रामजी चौधरी के परिवार के लिए उस समय बड़ी राहत मिली, जब आर्थिक तंगी के बावजूद उनकी 52 वर्षीय परिजन सरस्वती देवी का टूटा हुआ कुल्हा (हिप) का सफल ऑपरेशन सदर अस्पताल में कर दिया गया। यह सर्जरी सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. नौशाद आलम ने अपनी टीम के साथ संपन्न की।
बताया गया कि कुछ दिन पूर्व गिरने से सरस्वती देवी का कुल्हा टूट गया था। दर्द और चलने-फिरने में असमर्थता के कारण परिजन उन्हें तत्काल इलाज के लिए एक निजी क्लिनिक ले गए। वहां चिकित्सकों ने ऑपरेशन के लिए लगभग 80 हजार रुपये खर्च होने की बात कही। इतनी बड़ी राशि सुनकर परिवार चिंतित हो गया, क्योंकि वे साधारण किसान परिवार से हैं और इतनी रकम जुटाना उनके लिए आसान नहीं था।
आर्थिक संकट के बीच सदर अस्पताल की ओर रुख
निजी अस्पताल में महंगा इलाज संभव नहीं होने पर परिजन सरस्वती देवी को लेकर सदर अस्पताल गढ़वा पहुंचे। यहां उन्होंने डॉ. नौशाद आलम से मुलाकात कर पूरी स्थिति बताई और आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए अस्पताल में ही ऑपरेशन करने का अनुरोध किया।
मामले की गंभीरता को समझते हुए डॉ. आलम ने मरीज की विस्तृत जांच की। हिप फ्रैक्चर जैसी जटिल स्थिति में सर्जरी आवश्यक थी। संसाधन सीमित होने के बावजूद उन्होंने ऑपरेशन करने का निर्णय लिया, ताकि मरीज को समय पर उपचार मिल सके।
सावधानी और दक्षता से सफल सर्जरी
चिकित्सक टीम ने पूरी सावधानी और तकनीकी दक्षता के साथ ऑपरेशन को अंजाम दिया। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार सर्जरी सफल रही और फिलहाल मरीज की स्थिति स्थिर है। उन्हें आवश्यक निगरानी में रखा गया है तथा धीरे-धीरे स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है।
डॉ. नौशाद आलम ने कहा:
“मरीज की स्थिति को देखते हुए समय पर सर्जरी जरूरी थी। सीमित संसाधनों के बावजूद हमने पूरी सावधानी बरती और ऑपरेशन सफल रहा। अब मरीज की रिकवरी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।”
परिजनों ने जताया आभार
ऑपरेशन सफल होने के बाद सरस्वती देवी के परिजनों ने चिकित्सक और अस्पताल प्रबंधन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी अस्पताल में यह सुविधा नहीं मिलती, तो आर्थिक तंगी के कारण उनका इलाज संभव नहीं हो पाता।
परिजनों ने कहा:
“निजी क्लिनिक में 80 हजार रुपये का खर्च बताया गया था, जो हमारे लिए असंभव था। सदर अस्पताल में इलाज मिलना हमारे लिए किसी राहत से कम नहीं है।”
उन्होंने डॉ. नौशाद आलम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे समर्पित डॉक्टर ही गरीब परिवारों के लिए उम्मीद की किरण साबित होते हैं।
स्थानीय लोगों ने भी की सराहना
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने भी सदर अस्पताल की पहल की प्रशंसा की है। उनका कहना है कि यदि सरकारी अस्पतालों में इसी तरह संवेदनशीलता और समर्पण के साथ इलाज मिलता रहे, तो गरीब और जरूरतमंद मरीजों को बड़ी राहत मिल सकती है।
लोगों का मानना है कि संसाधनों की कमी के बावजूद चिकित्सकों का सकारात्मक रवैया और पेशेवर दक्षता ही सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की असली ताकत है। इससे न केवल मरीजों को राहत मिलती है, बल्कि सरकारी संस्थानों के प्रति विश्वास भी मजबूत होता है।
न्यूज़ देखो: सीमित संसाधनों में भी मजबूत इरादा बना सहारा
यह घटना दिखाती है कि इच्छाशक्ति और समर्पण से सरकारी अस्पताल भी जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दे सकते हैं। सवाल यह है कि यदि संसाधन और बेहतर हों, तो ऐसे अस्पताल कितने और जीवन बचा सकते हैं? जरूरत है कि स्वास्थ्य ढांचे को और सशक्त किया जाए ताकि हर जरूरतमंद को समय पर इलाज मिल सके। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा बढ़ाएं, जिम्मेदारी भी निभाएं
सरकारी अस्पताल तभी मजबूत होंगे जब हम उनका सही उपयोग करें और सकारात्मक पहल को पहचानें।
चिकित्सकों का मनोबल बढ़ाना भी समाज की जिम्मेदारी है।
यदि आपके क्षेत्र में भी ऐसी प्रेरक पहल हुई है, तो हमें बताएं।
अपनी राय कमेंट में साझा करें और खबर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं, ताकि सकारात्मक बदलाव की कहानियां समाज तक पहुंचे।







