गढ़वा के रंजीत कुमार ने बॉडीबिल्डिंग में जीता कांस्य पदक, अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ाया जिले का मान

गढ़वा के रंजीत कुमार ने बॉडीबिल्डिंग में जीता कांस्य पदक, अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ाया जिले का मान

author Sonu Kumar
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#गढ़वा #बॉडीबिल्डिंगगौरव : सीमित संसाधनों में रंजीत कुमार ने WFF प्रतियोगिता में जीता कांस्य पदक।

गढ़वा जिले के टंडवा गांव के रंजीत कुमार ने ओडिशा में आयोजित WFF AARC प्रो-एएम बॉडीबिल्डिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर जिले का नाम रोशन किया है। साधारण परिवार से आने वाले रंजीत की यह उपलब्धि युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

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  • रंजीत कुमार ने WFF AARC प्रो-एएम चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता
  • प्रतियोगिता 15 मार्च 2026 को ओडिशा में आयोजित हुई।
  • मेंस फिजिक बॉडीबिल्डिंग कैटेगरी में शानदार प्रदर्शन।
  • सीमित संसाधनों के बावजूद कड़ी मेहनत से हासिल की सफलता
  • युवाओं के लिए बने प्रेरणा स्रोत

गढ़वा जिले के टंडवा गांव निवासी रंजीत कुमार ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए जिले का नाम रोशन किया है। उन्होंने 15 मार्च 2026 को ओडिशा में आयोजित WFF (World Fitness Federation) AARC प्रो-एएम चैंपियनशिप में मेंस फिजिक बॉडीबिल्डिंग प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया।

इस उपलब्धि के बाद गढ़वा सहित पूरे क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों और खेल प्रेमियों ने रंजीत की इस सफलता को बड़ी उपलब्धि बताया है।

साधारण परिवार से निकलकर बनाई पहचान

रंजीत कुमार की सफलता इसलिए और भी खास मानी जा रही है क्योंकि वे एक साधारण परिवार से आते हैं। सीमित संसाधनों और चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कभी अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया।

टंडवा गांव के निवासी रंजीत ने कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को जिंदा रखा और लगातार मेहनत, अनुशासन और समर्पण के साथ अपनी तैयारी जारी रखी।

माता-पिता का मिला पूरा सहयोग

रंजीत की इस सफलता के पीछे उनके परिवार का भी बड़ा योगदान रहा है। उनके पिता दुदुन महतो और माता रेखा देवी ने हर परिस्थिति में उनका मनोबल बढ़ाया।

आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद परिवार ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया, जिसका परिणाम आज सबके सामने है।

कोच का भी अहम योगदान

रंजीत की इस उपलब्धि में उनके कोच प्रीतम यातन की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने रंजीत को सही मार्गदर्शन देते हुए प्रतियोगिता के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार किया।

रंजीत ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, कोच और सभी शुभचिंतकों को दिया है, जिन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक का लक्ष्य

रंजीत कुमार ने अपनी इस सफलता को यात्रा की शुरुआत बताते हुए कहा कि उनका अगला लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है।

रंजीत कुमार ने कहा: “अगर लक्ष्य के प्रति समर्पण और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होती।”

युवाओं के लिए बने प्रेरणा

रंजीत की कहानी यह साबित करती है कि सफलता केवल संसाधनों पर नहीं, बल्कि मेहनत, लगन और आत्मविश्वास पर निर्भर करती है। उनकी उपलब्धि आज युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

न्यूज़ देखो: मेहनत और जुनून से बनती है पहचान

गढ़वा के रंजीत कुमार की यह सफलता उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। यह उपलब्धि बताती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो हर मुश्किल को पार किया जा सकता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सपनों को हकीकत में बदलने की प्रेरणा

हर सफलता के पीछे संघर्ष की लंबी कहानी होती है। रंजीत कुमार ने यह साबित कर दिया कि मेहनत और समर्पण से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

अगर आपके अंदर भी कुछ करने का जुनून है, तो आज से ही शुरुआत करें।

अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें, इस खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं और प्रेरणा को आगे बढ़ाएं।

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Written by

गढ़वा

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