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गिरिडीह: धरमपुर के जवान संजय मुर्मू का ड्यूटी के दौरान शहादत: बादल फटने की आपदा में वीरगति

#गिरिडीह #शहादत : सीआईएसएफ के जवान संजय मुर्मू का कर्तव्य पालन के दौरान निधन
  • गिरिडीह जिले के धरमपुर निवासी संजय मुर्मू का 15 अगस्त को निधन।
  • जम्मू-कश्मीर किश्तवाड़ में बादल फटने की आपदा में गई जान।
  • सीआईएसएफ में तैनात थे और ड्यूटी के दौरान हुए शहीद।
  • क्षेत्र और परिवार में गहरा शोक, लोगों ने श्रद्धांजलि दी।
  • कर्तव्य पालन के दौरान सर्वोच्च बलिदान, हमेशा रहेगा याद।

15 अगस्त को जब देशभर में स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाया जा रहा था, उसी दिन गिरिडीह जिले के बिरनी थाना क्षेत्र के धरमपुर गांव में मातम छा गया। गांव के बेटे और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में तैनात जवान संजय मुर्मू ड्यूटी पर तैनात रहते हुए जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में बादल फटने की प्राकृतिक आपदा में शहीद हो गए। इस घटना की खबर मिलते ही पूरे परिवार, गांव और जिले में गहरा शोक फैल गया।

संजय मुर्मू का बलिदान

संजय मुर्मू हमेशा अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित रहे। जिस दिन वे शहीद हुए, वह दिन भी पूरे देश के लिए गर्व का दिन था, लेकिन उनके परिवार और इलाके के लिए वह कभी न भूलने वाला दुख लेकर आया। उनकी शहादत इस बात का प्रमाण है कि देश की रक्षा और सेवा में लगे जवान हर परिस्थिति में अपना सर्वोच्च बलिदान देने को तैयार रहते हैं।

गांव और जिले में शोक की लहर

धरमपुर गांव में जैसे ही यह खबर पहुंची, पूरा इलाका शोक में डूब गया। लोग संजय मुर्मू को श्रद्धांजलि देने उनके घर पहुंचने लगे। हर किसी की जुबान पर सिर्फ यही था कि “संजय मुर्मू ने अपने कर्तव्य पथ पर जो बलिदान दिया है, वह हमेशा हमारी स्मृतियों में जीवित रहेगा।”

प्रशासन और समाज का सम्मान

स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों ने भी संजय मुर्मू की वीरता और कर्तव्यनिष्ठा को नमन किया है। उनकी शहादत को पूरे सम्मान के साथ याद किया जा रहा है। साथ ही प्रशासन ने उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है और सहयोग का आश्वासन भी दिया है।

स्थानीय ग्रामीणों ने कहा: “संजय मुर्मू जैसे जवानों की शहादत ही हमारी आज़ादी की असली कीमत है। उनका बलिदान हमें हमेशा प्रेरित करेगा।”

न्यूज़ देखो: बलिदान की अमर गाथा

संजय मुर्मू की शहादत सिर्फ धरमपुर या गिरिडीह जिले की नहीं, बल्कि पूरे देश की शहादत है। जब भी देश में शांति और सुरक्षा की बात होगी, उनका नाम श्रद्धा से लिया जाएगा। उनके बलिदान ने हमें यह याद दिलाया है कि स्वतंत्रता और सुरक्षा हमें सहज रूप से नहीं मिली, इसके पीछे जवानों का त्याग और संघर्ष छुपा है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अब वक्त है शहीदों की स्मृतियों को संजोने का

आज आवश्यकता है कि हम सब मिलकर शहीद जवानों के परिवारों के साथ खड़े हों, उनकी यादों को संजोएं और आने वाली पीढ़ी को यह प्रेरणा दें कि देश सेवा सबसे बड़ा धर्म है। अपनी राय कॉमेंट करें और इस खबर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं ताकि संजय मुर्मू जैसे वीर जवानों की गाथा सबके दिलों तक पहुंचे।

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Surendra Verma

डुमरी, गिरिडीह

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