गिरीडीह : आपसी विवाद में फंसा दिव्यांग का प्रधानमंत्री आवास, न्याय के लिए दर-दर भटक रहा परिवार

गिरीडीह : आपसी विवाद में फंसा दिव्यांग का प्रधानमंत्री आवास, न्याय के लिए दर-दर भटक रहा परिवार

author Surendra Verma
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#गिरीडीह #प्रधानमंत्रीआवास – तिसरी के हीरालाल साव की गुहार सुनने वाला नहीं, बैशाखी के सहारे कार्यालय पहुंचा परिवार

  • तिसरी प्रखंड के पलमरुआ पंचायत का मामला
  • दिव्यांग हीरालाल साव का पीएम आवास वर्षों से अधूरा
  • आपसी बंटवारे के विवाद में फंसा निर्माण कार्य
  • न्याय की उम्मीद में ब्लॉक और अनुमंडल का कर चुका है चक्कर
  • सोमवार को पत्नी-बेटे संग प्रखंड कार्यालय पहुंचा
  • प्रशासनिक उपेक्षा से गहरा रहा है पीड़ित का संकट

न्याय से दूर, व्यवस्था से हारा हीरालाल साव

गिरीडीह जिला के तिसरी प्रखंड अंतर्गत पलमरुआ पंचायत में एक दिव्यांग परिवार वर्षों से प्रधानमंत्री आवास योजना के अधूरे निर्माण को लेकर संघर्ष कर रहा है। हीरालाल साव, जो चलने-फिरने में असमर्थ हैं, का घर आपसी बंटवारे के विवाद में फंसकर अधूरा रह गया है, और आज तक उन्हें किसी भी स्तर पर राहत नहीं मिल पाई है।

सोमवार को हीरालाल अपनी पत्नी और बेटे के साथ बैशाखी के सहारे तिसरी प्रखंड सह अंचल कार्यालय पहुंचे, ताकि अधिकारी उनकी समस्या पर ध्यान दें। लेकिन बदले में उन्हें सिर्फ निराशा और इंतजार मिला।

“मैं कई बार ब्लॉक और एसडीओ ऑफिस गया, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। मेरी आर्थिक स्थिति खराब है, कैसे बनाऊं अधूरा मकान?”
हीरालाल साव (दिव्यांग)

प्रशासनिक उपेक्षा बना बड़ी चुनौती

दिव्यांग हितधारकों को लाभ पहुंचाने के लिए चलाई जा रही योजनाएं जमीनी स्तर पर कई बार व्यवस्था की लापरवाही की भेंट चढ़ जाती हैं। हीरालाल साव का मामला भी उसी का उदाहरण है, जहां शारीरिक अक्षमता के बावजूद लगातार प्रयासों के बाद भी उन्हें सिर्फ आश्वासन और बेरुखी मिल रही है।

प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे कल्याणकारी योजना का उद्देश्य सभी जरूरतमंदों को सुरक्षित आवास मुहैया कराना है, लेकिन जब दिव्यांग लाभुक को ही उसका हक नहीं मिले, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजमी है।

पंचायत विवाद में उलझा निर्माण कार्य

स्थानीय जानकारी के अनुसार, हीरालाल का आवास परिवारिक संपत्ति के आपसी बंटवारे में अटक गया है, जिससे निर्माण कार्य रुक गया। उन्होंने प्रखंड से लेकर अनुमंडल स्तर तक गुहार लगाई, लेकिन कहीं से कोई सुनवाई नहीं हुई। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी इस समस्या को और जटिल बना रही है।

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Written by

डुमरी, गिरिडीह

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