
#गिरिडीह #बगोदर #प्रवासी_मजदूर : मलेशिया में काम के दौरान मौत की सूचना से मातम।
गिरिडीह जिले के बगोदर थाना क्षेत्र के अडवारा पंचायत निवासी 36 वर्षीय प्रवासी मजदूर वकील सिंह की मलेशिया में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। वे पिछले दो वर्षों से एल एंड टी कंपनी में कार्यरत थे। गुरुवार देर शाम परिजनों को उनकी मृत्यु की सूचना मिली, लेकिन मौत के कारणों की स्पष्ट जानकारी अब तक नहीं दी गई है। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है और परिवार गहरे सदमे में है।
- अडवारा पंचायत निवासी वकील सिंह (36) की मलेशिया में मौत।
- दो वर्षों से एल एंड टी कंपनी में थे कार्यरत।
- परिजनों को गुरुवार शाम मिली सूचना।
- मौत के कारणों को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं।
- पत्नी मुन्नी देवी और चार बच्चों को छोड़ गए।
- सामाजिक कार्यकर्ता सिकन्दर अली ने परिजनों से की मुलाकात।
गिरिडीह जिले के बगोदर थाना क्षेत्र अंतर्गत अडवारा पंचायत में उस समय मातम छा गया जब 36 वर्षीय प्रवासी मजदूर वकील सिंह की मलेशिया में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर गांव पहुंची। वकील सिंह स्वर्गीय झमन सिंह के पुत्र थे और पिछले दो वर्षों से मलेशिया में कार्यरत थे। गुरुवार देर शाम परिजनों को उनकी मौत की सूचना मिली, जिसके बाद परिवार में कोहराम मच गया।
दो वर्षों से कर रहे थे विदेश में काम
परिजनों के अनुसार, वकील सिंह मलेशिया में निर्माण क्षेत्र की प्रमुख कंपनी Larsen & Toubro Limited (एल एंड टी) में कार्यरत थे। बेहतर आजीविका की तलाश में वे विदेश गए थे और परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे।
हालांकि उनकी मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसे लेकर परिवार को अब तक स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है। परिजन प्रशासन और संबंधित कंपनी से विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
वकील सिंह अपने पीछे पत्नी मुन्नी देवी समेत चार बच्चों—रूपा कुमारी (20), सुजीत (18), काजल कुमारी (17) और नीतू कुमारी (13)—को छोड़ गए हैं। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है।
ग्रामीणों ने बताया कि वकील सिंह परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनकी मौत से परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से गहरे संकट में आ गया है। गांव के लोग शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता ने उठाए सवाल
घटना की सूचना मिलते ही सामाजिक कार्यकर्ता सिकन्दर अली मृतक के घर पहुंचे और परिजनों से मुलाकात कर सांत्वना दी। उन्होंने प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की।
सिकन्दर अली ने कहा: “गिरिडीह, बोकारो और हजारीबाग सहित आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में युवा रोजगार के लिए विदेश जाते हैं। वहां कार्य के दौरान दुर्घटनाओं और संदिग्ध मौतों की खबरें आती रहती हैं। सरकार को इस दिशा में ठोस पहल करनी चाहिए।”
उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार से मांग की कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी रोजगार के अवसर सृजित किए जाएं ताकि युवाओं को विदेश जाने की मजबूरी कम हो।
प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा पर चिंता
इस घटना ने एक बार फिर प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि विदेश में कार्यरत मजदूरों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाना चाहिए। साथ ही ऐसी घटनाओं में पारदर्शी जानकारी और मुआवजा प्रक्रिया सुनिश्चित की जानी चाहिए।
परिवार और ग्रामीण अब संबंधित दूतावास और प्रशासन से स्पष्ट जानकारी और आवश्यक सहायता की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
न्यूज़ देखो: रोजगार की मजबूरी और सुरक्षा की चुनौती
अडवारा गांव की यह घटना केवल एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि ग्रामीण रोजगार व्यवस्था की हकीकत भी उजागर करती है। जब स्थानीय स्तर पर पर्याप्त अवसर नहीं मिलते, तब युवा विदेश जाने को मजबूर होते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा, बीमा और कानूनी संरक्षण सुनिश्चित करना सरकार और कंपनियों दोनों की जिम्मेदारी है। अब आवश्यक है कि इस मामले में पारदर्शिता बरती जाए और परिवार को उचित सहायता मिले।
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गांव में रोजगार, तभी सुरक्षित भविष्य
हर युवा अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए मेहनत करता है। लेकिन जब रोजगार की तलाश उसे हजारों किलोमीटर दूर ले जाती है, तो जोखिम भी बढ़ जाते हैं।
स्थानीय स्तर पर उद्योग, कौशल विकास और रोजगार सृजन ही इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है। समाज और सरकार दोनों को मिलकर ऐसी नीतियां बनानी होंगी जो युवाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक रोजगार दें।
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