
#गिरिडीह #प्रवासी_मजदूर : नाइजर में अगवा हुए बगोदर के पांच मजदूर सुरक्षित रिहा होकर वतन लौटे।
गिरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड के पांच प्रवासी मजदूरों की नाइजर से सुरक्षित रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। 25 अप्रैल 2025 को वेस्ट अफ्रीका के देश नाइजर में अगवा किए गए इन मजदूरों को केंद्र सरकार के सतत प्रयासों से मुक्त कराया गया। विदेश मंत्रालय, जनप्रतिनिधियों और परिजनों के निरंतर संपर्क व दबाव के बाद यह बड़ी सफलता मिली है। इस घटना ने प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चिंता और संवेदनशीलता को उजागर किया।
- बगोदर प्रखंड के पांच मजदूर नाइजर में हुए थे अगवा।
- 25 अप्रैल 2025 को वेस्ट अफ्रीका में हुई थी घटना।
- नागेंद्र महतो और अन्नपूर्णा देवी ने परिजनों को दिया था भरोसा।
- विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की निगरानी में चला प्रयास।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की पहल से रिहाई संभव।
गिरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड क्षेत्र के ग्राम दोंदलो और मुंडरो से ताल्लुक रखने वाले पांच प्रवासी मजदूरों की सकुशल रिहाई की खबर से पूरे क्षेत्र में राहत और खुशी का माहौल है। ये मजदूर रोजगार के सिलसिले में वेस्ट अफ्रीका के देश नाइजर गए थे, जहां 25 अप्रैल 2025 को उन्हें अगवा कर लिया गया था। घटना के बाद से ही परिजनों में भय और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ था।
कौन-कौन थे अगवा किए गए मजदूर
इस गंभीर घटना में जिन मजदूरों को अगवा किया गया था, उनमें फलजीत महतो, राजू महतो, चंद्रिका महतो, संजय महतो और उत्तम महतो शामिल हैं। सभी मजदूर बगोदर प्रखंड के ग्रामीण इलाकों से संबंध रखते हैं और बेहतर रोजगार की तलाश में विदेश गए थे। अगवा किए जाने की सूचना मिलते ही क्षेत्र में हड़कंप मच गया था।
जनप्रतिनिधियों ने संभाली मोर्चा
घटना के तुरंत बाद बगोदर विधायक नागेंद्र महतो और केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री सह कोडरमा सांसद श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने पीड़ित परिजनों से मुलाकात की थी। दोनों जनप्रतिनिधियों ने परिजनों को आश्वस्त किया था कि यह मामला केंद्र सरकार के संज्ञान में है और इसे सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ देखा जा रहा है।
विधायक नागेंद्र महतो ने परिजनों से कहा कि सरकार प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है और हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
विदेश मंत्रालय से लगातार संपर्क
इस पूरे मामले को लेकर संबंधित जनप्रतिनिधि लगातार विदेश मंत्रालय और संबंधित कंपनी के संपर्क में रहे। मामला विधानसभा पटल पर भी जोरदार तरीके से उठाया गया, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर इस पर ध्यान जाए। इसके साथ ही विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर प्रवासी मजदूरों की सुरक्षित रिहाई और वतन वापसी की मांग की जाती रही।
अन्नपूर्णा देवी की अहम भूमिका
केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने स्वयं विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मुलाकात कर नाइजर में अगवा मजदूरों की स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने इन सभी मजदूरों की सकुशल रिहाई के लिए ठोस और त्वरित कदम उठाने की पुरजोर मांग की। इस पहल के बाद मामला और तेजी से आगे बढ़ा।
केंद्र सरकार के प्रयासों से मिली सफलता
लगातार कूटनीतिक प्रयासों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संपर्क के बाद आखिरकार इन सभी मजदूरों की सुरक्षित रिहाई संभव हो सकी। यह सफलता केंद्र की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार और विदेश मंत्रालय की सक्रियता का परिणाम मानी जा रही है।
इस रिहाई ने न केवल परिजनों को राहत दी, बल्कि पूरे गिरिडीह और बगोदर क्षेत्र में भरोसा भी जगाया कि संकट की घड़ी में सरकार अपने नागरिकों के साथ खड़ी रहती है।
परिजनों और क्षेत्र में खुशी की लहर
मजदूरों की सकुशल रिहाई की खबर मिलते ही परिजनों ने राहत की सांस ली। लंबे समय से भय और चिंता में जी रहे परिवारों के चेहरे पर खुशी लौट आई। ग्रामीणों ने इसे सामूहिक प्रयास और जनप्रतिनिधियों की सक्रियता का परिणाम बताया।

न्यूज़ देखो: प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
नाइजर की यह घटना बताती है कि विदेशों में काम कर रहे भारतीय मजदूरों की सुरक्षा कितनी अहम है। समय पर हस्तक्षेप और कूटनीतिक प्रयासों से जान बचाई जा सकती है। अब जरूरत है कि प्रवासी मजदूरों के लिए सुरक्षा तंत्र और मजबूत किया जाए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
संकट में एकजुटता ही सबसे बड़ी ताकत
यह घटना सिखाती है कि जब सरकार, जनप्रतिनिधि और समाज एकजुट होते हैं, तो बड़ी से बड़ी चुनौती का सामना किया जा सकता है। प्रवासी मजदूर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, उनकी सुरक्षा हम सबकी जिम्मेदारी है। इस खबर पर अपनी राय साझा करें, इसे आगे पहुंचाएं और जागरूकता फैलाने में अपनी भूमिका निभाएं।





