Giridih

गिरिडीह: ज़मीन पर जबरन कब्जे से पीड़ित नेमचंद कुमार की गुहार—न्याय नहीं मिला तो आत्मदाह करेंगे

#गिरिडीह #भूमि_विवाद : धनवार थाना क्षेत्र के चादगर निवासी ने लगाया आरोप — वर्षों से भूमि पर अवैध कब्जा, शिकायतों के बाद भी प्रशासन मौन
  • 2023 से भूमि पर अवैध कब्जे का मामला, अब तक नहीं हुई कार्रवाई
  • पुलिस और अंचल कार्यालय तक दर्ज कराई गई शिकायतें बेअसर
  • विरोध करने पर हुई मारपीट, थाना में रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई नहीं
  • मानसिक तनाव से जूझ रहे नेमचंद ने जताया आत्मदाह का इरादा
  • प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार, पर सुनवाई नहीं

वर्षों से अपनी ही जमीन से बेदखल हैं नेमचंद

गिरिडीह जिले के धनवार थाना क्षेत्र अंतर्गत चादगर गांव निवासी नेमचंद कुमार ने भूमि विवाद को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि साल 2023 से ही कुछ लोगों ने उनकी निजी भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। नेमचंद का दावा है कि उन्होंने थाना, अंचल कार्यालय और जिला प्रशासन तक गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई

विरोध पर हुई मारपीट, पुलिस भी मौन

नेमचंद कुमार ने बताया कि जब उन्होंने कब्जे का विरोध किया तो उन्हें मारपीट कर डराया गया। इस घटना की शिकायत भी धनवार थाना में दर्ज कराई गई, लेकिन पुलिस की ओर से कोई संज्ञान नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि लगातार अनदेखी के कारण उनकी मानसिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी है।

नेमचंद कुमार ने चेतावनी दी: “अगर जल्द मुझे न्याय नहीं मिला तो मैं आत्मदाह करने के लिए मजबूर हो जाऊंगा।”

प्रशासनिक उदासीनता बनी चिंता का विषय

नेमचंद का मामला स्थानीय प्रशासनिक उदासीनता की एक गंभीर मिसाल बनता जा रहा है। एक नागरिक बार-बार शिकायत करने के बावजूद अपनी ही जमीन से बेदखल है, और कानून के दरवाजे बंद से प्रतीत हो रहे हैं। मामले में राज्य स्तर तक शिकायतें भेजी गईं, लेकिन कहीं से राहत नहीं मिली।

न्यूज़ देखो: पीड़ित की पुकार, कब सुनेगा सिस्टम?

जब एक आम आदमी अपने अधिकार के लिए दर-दर की ठोकर खाता है और प्रशासन निष्क्रिय बना रहता है, तब सवाल उठता है कि जन सरोकारों के लिए संवेदनशीलता कहाँ है? नेमचंद कुमार की चेतावनी व्यवस्था की संवेदनहीनता पर करारा तमाचा है। प्रशासन को चाहिए कि वह इस मामले में तत्काल जांच कर निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करे
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

आइए, आवाज़ उठाएं अन्याय के खिलाफ

हर नागरिक को न्याय और सम्मान के साथ जीने का हक है। जब कोई अपनी जमीन के लिए न्याय की भीख मांग रहा हो, तो समाज को उसकी आवाज़ में आवाज़ मिलानी चाहिए। इस खबर को पढ़ने के बाद कमेंट करें, अपनी राय दें और इसे ज्यादा से ज्यादा साझा करें, ताकि जिम्मेदारों तक पीड़ित की पुकार पहुंचे।

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Surendra Verma

डुमरी, गिरिडीह

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