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गिरिडीह की बेटी अनुराधा ने रचा इतिहास – मात्र 3.5 वर्षों में IIT इंदौर से पूरी की Machine Learning में PhD

#गिरिडीह #शिक्षामेंकीर्तिमान – कृष्णा नगर की अनुराधा बनीं पूरे जिले के लिए प्रेरणा, Machine Learning जैसे जटिल विषय में रचा नया कीर्तिमान

  • गिरिडीह की अनुराधा ने 3.5 वर्षों में पूरी की PhD
  • IIT इंदौर से Machine Learning में शोध कार्य कर हासिल की उपलब्धि
  • BHU से B.Sc. और IIT गुवाहाटी से M.Sc. की पढ़ाई
  • GATE और NET जैसी कठिन परीक्षाएं कीं उत्तीर्ण
  • प्रोफेसर बनने का सपना, समाज में ज्ञान प्रसार का लक्ष्य

शिक्षा में समर्पण और मेहनत की मिसाल बनी अनुराधा कुमारी

गिरिडीह जिले की कृष्णा नगर निवासी अनुराधा कुमारी, पिता श्री मनोज कुमार कंधवे की सुपुत्री ने IIT इंदौर से मात्र 3.5 वर्षों में Machine Learning जैसे अत्याधुनिक विषय में PhD पूरी कर इतिहास रच दिया है। उनकी इस असाधारण उपलब्धि ने न केवल परिवार, बल्कि पूरे गिरिडीह जिले का नाम रोशन कर दिया है।

BHU से शुरू हुई शैक्षणिक उड़ान

अनुराधा ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से स्नातक (B.Sc.) की पढ़ाई की, जहाँ उन्होंने गणित और कंप्यूटर साइंस में गहरी रुचि के साथ अपनी बौद्धिक यात्रा की नींव रखी। इसके बाद IIT JAM जैसी कठिन प्रतियोगिता में सफलता पाकर उन्होंने IIT गुवाहाटी से M.Sc. की डिग्री प्राप्त की।

IIT इंदौर में PhD की उड़ान

Machine Learning जैसे गहन और जटिल विषय में अनुराधा ने IIT इंदौर में शोध करते हुए मात्र साढ़े तीन साल में PhD की उपाधि प्राप्त की, जो किसी भी छात्रा के लिए एक बड़ा कीर्तिमान है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि निष्ठा, समय प्रबंधन और गहरी समझ से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।

प्रतियोगी परीक्षाओं में भी रही अव्वल

अनुराधा ने अपनी शिक्षा के दौरान GATE और UGC-NET जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाएं उत्तीर्ण कर यह भी सिद्ध कर दिया कि वह शैक्षणिक और शोध स्तर पर उच्चतम योग्यता रखती हैं।

प्रोफेसर बनने का सपना, समाज को देना चाहती हैं ज्ञान

अनुराधा का सपना है कि वह देश के किसी टियर-वन कॉलेज में प्रोफेसर बनें, जहाँ वे शिक्षण और शोध के माध्यम से समाज की युवा पीढ़ी को नई दिशा दें। उनके अनुसार, यह केवल एक करियर नहीं, बल्कि समाज और देश को शिक्षित करने का माध्यम है।

न्यूज़ देखो : शिक्षा की ऊँचाई छूती बेटियाँ, समाज की असली ताकत

न्यूज़ देखो ऐसे प्रेरणादायक चेहरों की कहानियों को सामने लाता है जो समाज की सोच को बदलते हैं। अनुराधा की यह यात्रा गिरिडीह ही नहीं, पूरे झारखंड के युवाओं के लिए संदेश है कि लगन, परिश्रम और सही मार्गदर्शन से कोई भी शिखर छू सकता है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अनुराधा की उपलब्धि यह सिखाती है कि गांव या छोटे शहर की पृष्ठभूमि भी बड़ी उड़ान का आधार बन सकती है। अगर आपके पास सपना और समर्पण है, तो आप इतिहास रच सकते हैं।

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Surendra Verma

डुमरी, गिरिडीह

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