सहिजना में होगी भव्य गंगा आरती, विश्व पर्यावरण दिवस और गंगा दशहरा की पूर्व संध्या पर आयोजन

सहिजना में होगी भव्य गंगा आरती, विश्व पर्यावरण दिवस और गंगा दशहरा की पूर्व संध्या पर आयोजन

author News देखो Team
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#गढ़वा #सहिजनागंगाआरती – संस्कृति और प्रकृति के संगम पर जनमानस से जुड़ने का पावन निमंत्रण

  • 5 जून को सहिजना नदी तट पर होगा विशेष गंगा आरती कार्यक्रम
  • विश्व पर्यावरण दिवस और गंगा दशहरा की पूर्व संध्या को किया जा रहा समर्पित
  • डॉ. पतंजलि की अगुवाई में हो रहा आयोजन, श्रद्धालुओं को आमंत्रण
  • कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और संस्कृति के प्रति जागरूकता
  • स्थानीय नागरिकों में आयोजन को लेकर उत्साह और भागीदारी का आह्वान

प्रकृति और परंपरा के साक्षी बनें सहिजना में

विश्व पर्यावरण दिवस और गंगा दशहरा की पूर्व संध्या को एक खास अवसर के रूप में मनाने के लिए 5 जून 2025, गुरुवार को शाम 5 बजे, सहिजना नदी तट पर एक भव्य गंगा आरती का आयोजन किया जा रहा है। इस पावन कार्यक्रम में सभी श्रद्धालुजनों को सपरिवार सादर आमंत्रित किया गया है।

आयोजक की अपील: चलिए मिलकर बढ़ाएं प्रकृति का मान

डॉ. पतंजलि केशरी ने बताया कि यह आयोजन केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि पर्यावरणीय जागरूकता का भी प्रतीक है। गंगा आरती के माध्यम से लोगों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और हमारी परंपरागत आस्थाओं के महत्व से अवगत कराया जाएगा।

“आइए, मिलकर पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक परंपरा का सम्मान करें।” – डॉ. पतंजलि

स्थानीय सहभागिता की उम्मीद

इस आयोजन को लेकर स्थानीय नागरिकों में उत्साह देखने को मिल रहा है। कई सामाजिक संगठनों और सांस्कृतिक संस्थाओं ने भी सहयोग देने की इच्छा जताई है। आयोजन समिति का मानना है कि इस प्रकार के कार्यक्रम सामाजिक समरसता, धार्मिक आस्था और प्राकृतिक चेतना को एक साथ जोड़ने का माध्यम बनते हैं।

न्यूज़ देखो: संस्कृति और प्रकृति की साझी विरासत का उत्सव

‘न्यूज़ देखो’ आपको आमंत्रित करता है उस पावन क्षण का साक्षी बनने, जब सहिजना में बहती धारा और आरती की लौ मिलकर प्रकृति और परंपरा का अद्भुत संगम रचेंगी। ऐसे आयोजनों से ही समाज में सकारात्मक ऊर्जा और जागरूक नागरिकता का संचार होता है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

गंगा की गूंज और पर्यावरण का प्रण – जुड़िए इस मुहिम से

आइए, इस 5 जून को सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि एक संकल्प बनाएं — प्रकृति के प्रति प्रेम और उसकी रक्षा का। सहिजना की यह आरती सांस्कृतिक चेतना और पर्यावरणीय समर्पण का प्रतीक बनेगी। आपका एक कदम, आने वाली पीढ़ियों के लिए वरदान बन सकता है।

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