
#हुसैनाबाद #मकरसंक्रांतिमेला : देवरी कला में प्रशासनिक मौजूदगी के बीच पारंपरिक मेले का आयोजन।
पलामू जिले के हुसैनाबाद प्रखंड अंतर्गत देवरी कला में मकर संक्रांति के अवसर पर पारंपरिक मेले का भव्य शुभारंभ किया गया। मेले का उद्घाटन एसडीओ गोरांग महतो ने फीता काटकर किया, जिसमें स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधि और समाज के विभिन्न वर्गों की सहभागिता रही। यह मेला ग्रामीण सांस्कृतिक परंपराओं, सामाजिक मेलजोल और लोकआस्था का प्रतीक है। आयोजन से क्षेत्र में उत्सव और उल्लास का वातावरण देखने को मिला।
- देवरी कला मकर संक्रांति मेला का औपचारिक उद्घाटन।
- एसडीओ गोरांग महतो ने फीता काटकर किया शुभारंभ।
- हुसैनाबाद थाना प्रभारी सोनू चौधरी की रही मौजूदगी।
- देवरी ओपी प्रभारी बबलू कुमार ने सुरक्षा व्यवस्था संभाली।
- मुखिया और पत्रकार प्रतिनिधि भी उद्घाटन समारोह में शामिल।
पलामू जिले के हुसैनाबाद अनुमंडल क्षेत्र में मकर संक्रांति का पर्व हर वर्ष पारंपरिक उल्लास और सामाजिक एकजुटता के साथ मनाया जाता है। इसी क्रम में देवरी कला गांव में आयोजित मकर संक्रांति मेला इस बार भी आकर्षण का केंद्र बना। ग्रामीण परिवेश में लगने वाला यह मेला न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि स्थानीय संस्कृति, परंपरा और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का माध्यम भी है।
प्रशासनिक उपस्थिति में हुआ मेले का उद्घाटन
मेले का उद्घाटन हुसैनाबाद एसडीओ गोरांग महतो ने फीता काटकर किया। उद्घाटन के दौरान उन्होंने मकर संक्रांति पर्व और ग्रामीण मेलों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे आयोजन ग्रामीण समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं। उनके साथ मंच पर हुसैनाबाद इंस्पेक्टर सह थाना प्रभारी सोनू चौधरी, देवरी ओपी प्रभारी बबलू कुमार, देवरी कला के मुखिया तथा प्रगतिशील पत्रकार मंच के अध्यक्ष नौशाद उर्फ गुड्डू मौजूद रहे।
मकर संक्रांति और देवरी कला मेले की परंपरा
देवरी कला में लगने वाला यह मेला वर्षों पुरानी परंपरा का हिस्सा है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य के उत्तरायण होने की मान्यता के साथ लोग इसे नई शुरुआत, खुशहाली और सामाजिक समरसता का पर्व मानते हैं। गांव के लोग इस दिन स्नान-दान, पूजा-पाठ के साथ मेले में शामिल होकर आपसी मेलजोल बढ़ाते हैं। यह मेला खासतौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और लोकसंस्कृति को जीवंत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।
सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम
मेले में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। हुसैनाबाद थाना प्रभारी सोनू चौधरी और देवरी ओपी प्रभारी बबलू कुमार के नेतृत्व में पुलिस बल की तैनाती की गई, ताकि मेला शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके। अधिकारियों ने मेले का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा भी लिया।
ग्रामीणों और बच्चों में दिखा खास उत्साह
मेले में ग्रामीणों के साथ-साथ बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला। खिलौनों, घरेलू उपयोग की वस्तुओं, मिठाइयों और खान-पान की दुकानों पर लोगों की भीड़ लगी रही। बच्चों के लिए झूले और खेल-तमाशे मेले का मुख्य आकर्षण बने। ग्रामीण महिलाओं ने भी पारंपरिक खरीदारी कर मेले का आनंद लिया।
सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
देवरी कला मकर संक्रांति मेला केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक संवाद और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का मंच भी है। इस तरह के मेलों के माध्यम से लोक परंपराएं पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती हैं। ग्रामीणों का मानना है कि ऐसे आयोजन गांवों में सामाजिक समरसता और आपसी सहयोग को बढ़ावा देते हैं।
जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों की भागीदारी
मेले के उद्घाटन अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आयोजन समिति की सराहना की। प्रगतिशील पत्रकार मंच के अध्यक्ष नौशाद उर्फ गुड्डू ने कहा कि ग्रामीण मेलों की निरंतरता बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि यही हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं। वहीं मुखिया ने प्रशासन और ग्रामीणों के सहयोग से मेले को सफल बनाने की बात कही।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिलता है संबल
ऐसे मेलों से स्थानीय दुकानदारों, कारीगरों और छोटे व्यापारियों को भी लाभ मिलता है। मेले के दौरान ग्रामीण उत्पादों और घरेलू सामानों की बिक्री से स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलती है। यह मेला रोजगार और स्वरोजगार के छोटे-छोटे अवसर भी उपलब्ध कराता है।
न्यूज़ देखो: ग्रामीण परंपरा और प्रशासन का सकारात्मक समन्वय
देवरी कला मकर संक्रांति मेला यह दर्शाता है कि जब प्रशासन, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण समाज मिलकर कार्य करते हैं, तो परंपराएं और आयोजन और भी सशक्त बनते हैं। इस मेले में प्रशासनिक उपस्थिति ने सुरक्षा और विश्वास दोनों को मजबूत किया है। ऐसे आयोजन ग्रामीण संस्कृति को जीवित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
परंपराओं को सहेजना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी
ग्रामीण मेले हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं।
इन्हें जीवित रखने के लिए समाज और प्रशासन दोनों की भूमिका अहम है।
ऐसे आयोजन आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करते हैं।
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