
#लातेहार #रोजगार_पहल : केचकी में महिलाओं को मिला रोजगार का नया केंद्र।
केचकी, बरवाडीह प्रखंड में वन विभाग की पहल से जनभागीदारी आजीविका केंद्र का उद्घाटन किया गया। इस केंद्र का शुभारंभ मंगलवार को पलामू टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर पीके जेना द्वारा किया गया। हुनर से रोजगार योजना के तहत प्रशिक्षित महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए यह केंद्र स्थापित हुआ है। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
- केचकी में वन विभाग द्वारा स्थापित आजीविका केंद्र का उद्घाटन।
- उद्घाटनकर्ता पीके जेना, डिप्टी डायरेक्टर, पलामू टाइगर रिजर्व।
- केंद्र में सिलाई मशीन और कंप्यूटर सुविधा उपलब्ध।
- प्रशिक्षित महिलाओं को सीधे रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य।
- आसपास के ग्रामीणों को डिजिटल सेवाओं का भी मिलेगा लाभ।
बरवाडीह प्रखंड के केचकी गांव में महिलाओं की आर्थिक मजबूती के उद्देश्य से जनभागीदारी आजीविका केंद्र की शुरुआत की गई है। इस केंद्र का उद्घाटन मंगलवार को पलामू टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर पीके जेना ने किया। कार्यक्रम में विभागीय अधिकारी, प्रशिक्षक और स्थानीय ग्रामीण बड़ी संख्या में मौजूद रहे। यह केंद्र महिलाओं के लिए आजीविका का स्थायी माध्यम बनेगा।
उद्घाटन समारोह में क्या बोले पीके जेना
उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर पीके जेना ने कहा कि वन विभाग का यह प्रयास ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए समर्पित है। उन्होंने बताया कि जिन महिलाओं ने सिलाई और अन्य कौशल का प्रशिक्षण प्राप्त किया है, उन्हें अब इस केंद्र के माध्यम से नियमित आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा।
डिप्टी डायरेक्टर ने कहा:
“सरकार और वन विभाग की योजनाओं का असली मकसद गांव की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाना है। यह आजीविका केंद्र महिलाओं को स्वरोजगार के लिए उचित मंच देगा। हमें विश्वास है कि यहां प्रशिक्षण प्राप्त महिलाएं बेहतर कार्य कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार सकेंगी।”
उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र में आधुनिक सिलाई मशीनों के साथ कंप्यूटर सिस्टम लगाए गए हैं, जिससे महिलाएं नई तकनीक सीखकर अपने काम को प्रोफेशनल स्तर तक ले जा सकेंगी।
प्रशिक्षण और रोजगार को जोड़ने की रणनीति
केंद्र के शुभारंभ के पीछे मुख्य उद्देश्य हुनर से रोजगार अभियान के तहत तैयार की गई महिलाओं को बाजार से जोड़ना है। विभागीय प्रशिक्षक मनीष बक्शी, अनुज सक्सेना और तुलसी पवार ने महिलाओं को लगातार मार्गदर्शन देने का संकल्प दोहराया।
प्रशिक्षकों ने कहा कि महिलाओं को केवल सिलाई-कढ़ाई सिखाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें उत्पादन, डिज़ाइन और विपणन की समझ भी दी जाएगी। इसके लिए समूह आधारित कार्यप्रणाली अपनाने की सलाह दी गई है, ताकि महिलाएं सामूहिक रूप से ऑर्डर लेकर काम कर सकें।
ग्रामीणों के लिए डिजिटल सुविधा केंद्र
यह आजीविका केंद्र केवल महिलाओं के प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि केचकी और आसपास के गांवों के लोगों को डिजिटल सेवाओं का लाभ भी देगा। अब ग्रामीणों को छोटे-मोटे ऑनलाइन कार्यों के लिए बरवाडीह या लातेहार शहर का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।
केंद्र संचालिका पुष्पांजली ने बताया कि यहां से फॉर्म भरने, ऑनलाइन आवेदन, प्रिंटआउट, स्कैनिंग और अन्य जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे गांव में ही एक मिनी सुविधा हब तैयार हो गया है।
कार्यक्रम में शामिल अधिकारियों और कर्मियों के नाम
उद्घाटन समारोह में वन विभाग और स्थानीय प्रशासन के कई प्रतिनिधि उपस्थित रहे। मौके पर मुख्य रूप से:
- रेंजर उमेश दूबे
- वनपाल संतोष सिंह
- वनरक्षी दीपक मिश्रा
- सहयोगी प्रकाश कुमार
- विशाल तिवारी
- सुधीर तिवारी
- रवि राम
इसके अलावा केंद्र से जुड़ी महिलाएं रुपांजली, महिमा, गीता, महिमा और महिमा सहित अन्य प्रशिक्षण प्राप्त लाभार्थी भी मौजूद रहीं।
स्थानीय जनता में खुशी का माहौल
केचकी गांव में इस केंद्र के खुलने से ग्रामीणों और खासकर महिलाओं में उत्साह देखने को मिला। स्थानीय खेल प्रेमी रवि डालमिया ने कहा कि यह पहल गांव की महिलाओं को आगे बढ़ने का हौसला देगी। ग्रामीणों का मानना है कि इससे क्षेत्र में स्वरोजगार की संस्कृति विकसित होगी।
महिलाओं ने कहा कि वन विभाग की यह योजना उनके लिए सम्मानजनक आजीविका का माध्यम बनेगी। अब वे अपने पैरों पर खड़ी होकर परिवार का सहारा बन सकेंगी।

न्यूज़ देखो: महिलाओं के सशक्तिकरण का आधार
केचकी में शुरू हुआ यह आजीविका केंद्र प्रशासनिक प्रयासों की सकारात्मक झलक प्रस्तुत करता है। यह साबित करता है कि यदि योजनाओं को सही दिशा में लागू किया जाए तो ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं भी मुख्यधारा में आ सकती हैं। अब देखना होगा कि इस केंद्र से कितनी महिलाएं स्थायी रूप से रोजगार से जुड़ पाती हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सजग पहल से बदलेगी तस्वीर
सिमराडीह जैसे गांवों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत केवल सही मार्गदर्शन और समय पर सहयोग की होती है। यह आजीविका केंद्र उसी सोच का परिणाम है।
क्षेत्र की महिलाओं और ग्रामीणों को चाहिए कि वे इस केंद्र का अधिकतम लाभ उठाएं। प्रशासन भी नियमित मॉनिटरिंग कर इसे सफल मॉडल के रूप में विकसित करे।
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