
#सिमडेगा #सामाजिक_न्याय : आईक्यूएसी के तत्वावधान में आयोजित व्याख्यान में विशेषज्ञों ने सामाजिक विकास और संवैधानिक अधिकारों पर जागरूकता बढ़ाई
- संत जेवियर्स कॉलेज सिमडेगा के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा अतिथि व्याख्यान का आयोजन।
- मुख्य अतिथि अधिवक्ता एलेक्स जॉनसन केरकेट्टा ने सामाजिक न्याय की अवधारणा पर दिया व्याख्यान।
- संविधान के न्याय, समानता और स्वतंत्रता के सिद्धांतों पर विस्तार से चर्चा।
- विद्यार्थियों को मौलिक अधिकार, कानून और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति जागरूक रहने का संदेश।
- कार्यक्रम में आईक्यूएसी समन्वयक डॉ. जयंन्त कुमार कश्यप सहित कई शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं रहे उपस्थित।
विश्व सामाजिक न्याय दिवस के अवसर पर सिमडेगा स्थित संत जेवियर्स कॉलेज में एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें सामाजिक न्याय और सामाजिक विकास जैसे समसामयिक विषयों पर गहन चर्चा हुई। राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा आईक्यूएसी के तत्वावधान में आयोजित इस अतिथि व्याख्यान का विषय “सामाजिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए नवीनीकृत प्रतिबद्धता” रखा गया था। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों के बीच संवैधानिक मूल्यों, अधिकारों और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित अधिवक्ता एलेक्स जॉनसन केरकेट्टा ने सामाजिक न्याय की अवधारणा पर विस्तृत और सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने भारतीय संविधान में निहित न्याय, समानता एवं स्वतंत्रता के सिद्धांतों की व्याख्या करते हुए बताया कि एक समतामूलक समाज के निर्माण के लिए इन मूल्यों का पालन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक सतत प्रक्रिया है, जिसे समाज और शासन दोनों के सामूहिक प्रयास से साकार किया जा सकता है।
सामाजिक न्याय और भारतीय संविधान पर विशेष चर्चा
अपने संबोधन में मुख्य अतिथि ने भारतीय संविधान में वर्णित मौलिक अधिकारों और राज्य के नीति निर्देशक तत्वों की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संविधान समाज के सभी वर्गों को समान अवसर प्रदान करने की दिशा में मार्गदर्शक है।
उन्होंने अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, महिला संरक्षण कानून, श्रम कानून तथा शिक्षा का अधिकार अधिनियम जैसे महत्वपूर्ण प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये कानून समाज के कमजोर, वंचित और हाशिए पर खड़े वर्गों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति सजग रहने और समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने की प्रेरणा दी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जागरूक नागरिक ही सामाजिक न्याय की स्थापना में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं।
विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता और संवाद
व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया और सामाजिक न्याय, अधिकारों तथा वर्तमान सामाजिक चुनौतियों से जुड़े प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। यह संवादात्मक सत्र विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायी रहा।
कार्यक्रम में आईक्यूएसी समन्वयक डॉ. जयंन्त कुमार कश्यप ने अपने संबोधन में सामाजिक न्याय को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया और कहा कि जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय नहीं पहुंचेगा, तब तक वास्तविक विकास संभव नहीं है।
शिक्षकों ने सामाजिक उत्तरदायित्व पर दिया जोर
राजनीति विज्ञान के सहायक प्राध्यापक रोशन किशोर गिद्ध ने सामाजिक न्याय के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही समाज में समानता और जागरूकता लाई जा सकती है।
कार्यक्रम में सहायक प्राध्यापक अजय कुमार एवं डॉ. निशा रानी धनवार की भी सक्रिय उपस्थिति रही। उन्होंने विद्यार्थियों को सामाजिक संवेदनशीलता और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम का सफल संचालन राजनीति विज्ञान की छात्रा प्रतिभा मिंज द्वारा किया गया, जिन्होंने पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाया।
सामाजिक जागरूकता बढ़ाने की दिशा में प्रभावी पहल
यह अतिथि व्याख्यान विद्यार्थियों के लिए न केवल शैक्षणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत उपयोगी साबित हुआ। कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों को सामाजिक न्याय, संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व की गहरी समझ प्राप्त हुई।
अंत में धन्यवाद ज्ञापन के पश्चात राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन किया गया।
न्यूज़ देखो: सामाजिक न्याय से ही मजबूत होगा समाज
विश्व सामाजिक न्याय दिवस जैसे अवसर विद्यार्थियों को संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं। ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम न केवल ज्ञान का विस्तार करते हैं, बल्कि युवाओं में जागरूक नागरिक बनने की भावना भी विकसित करते हैं। सामाजिक न्याय की समझ ही समतामूलक समाज की नींव है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जागरूक युवा ही बनाएंगे न्यायपूर्ण समाज
सामाजिक न्याय की शुरुआत जागरूकता से होती है।
अपने अधिकारों को जानना और दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना ही सच्ची नागरिकता है।
शिक्षा, समानता और संवेदनशीलता से ही समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है।
ऐसे कार्यक्रमों में भाग लें, जागरूक बनें और समाज को बेहतर दिशा देने में अपनी भूमिका निभाएं।
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