#पलामू #उर्स_समारोह : दो दिवसीय उर्स में उमड़ी आस्था और सूफियाना रंग की झलक।
पलामू जिले के दूधी बागीचा बभनडीह में हजरत मखदूम सैयद अब्दुल लतीफ शाह दाता के सालाना उर्स का आयोजन 29 से 30 अप्रैल तक श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। कार्यक्रम में दूर-दराज से बड़ी संख्या में जायरीन पहुंचे। कव्वाली और जलसा-ए-पाक जैसे धार्मिक आयोजनों ने माहौल को आध्यात्मिक बनाया। इस आयोजन ने क्षेत्र में भाईचारे और एकता का संदेश दिया।
- दूधी बागीचा, बभनडीह (पलामू) में 29-30 अप्रैल को दो दिवसीय उर्स का आयोजन हुआ।
- अहमद कमाल उर्फ आदिल कमाल और अब्दुल मनान अंसारी ने फीता काटकर उद्घाटन किया।
- शरीफ परवाज़ कव्वाल और शिवा परवीन कव्वाला के बीच हुआ शानदार मुकाबला।
- जलसा-ए-पाक में उलेमाओं ने इस्लामी शिक्षाओं पर तकरीर पेश की।
- आयोजन में जहांगीर अंसारी, याद अली, भोला अंसारी समेत कई लोगों का योगदान।
- बड़ी संख्या में जायरीन ने दरगाह पर पहुंचकर अमन-चैन और खुशहाली की दुआ मांगी।
पलामू जिले के दूधी बागीचा स्थित बभनडीह गांव में हजरत मखदूम सैयद अब्दुल लतीफ शाह दाता रहमतुल्लाह अलैह का दो दिवसीय सालाना उर्स पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस धार्मिक आयोजन में क्षेत्र ही नहीं, बल्कि दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। उर्स के दौरान दरगाह परिसर में भक्ति, सूफियाना संगीत और आध्यात्मिक वातावरण का अनूठा संगम देखने को मिला।
उद्घाटन समारोह में दिखा उत्साह
उर्स कार्यक्रम का शुभारंभ समाजसेवी अहमद कमाल उर्फ आदिल कमाल और अब्दुल मनान अंसारी ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। इस अवसर पर उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में आपसी भाईचारे, प्रेम और एकता को मजबूत करते हैं।
अहमद कमाल उर्फ आदिल कमाल ने कहा: “यह दरगाह केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सद्भाव का प्रतीक है।”
जलसा-ए-पाक में दी गई धार्मिक सीख
कार्यक्रम के पहले दिन 28 अप्रैल को जलसा-ए-पाक का आयोजन किया गया, जिसमें उलेमा-ए-कराम ने इस्लामी शिक्षाओं और नेक रास्ते पर चलने की नसीहत दी। उन्होंने लोगों को समाज में शांति, भाईचारा और नैतिकता बनाए रखने का संदेश दिया।
कव्वाली मुकाबले ने बांधा समां
29 अप्रैल की रात आयोजित कव्वाली कार्यक्रम इस उर्स का मुख्य आकर्षण रहा। उत्तर प्रदेश के कानपुर से आए मशहूर कव्वाल शरीफ परवाज़ कव्वाल एंड पार्टी और शिवा परवीन कव्वाला एंड पार्टी के बीच शानदार मुकाबला हुआ। दोनों पक्षों ने अपने सूफियाना कलाम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
महफिल में मौजूद लोगों ने देर रात तक कव्वाली का आनंद लिया और सूफी संगीत के रंग में डूबे नजर आए।
बड़ी संख्या में पहुंचे जायरीन
उर्स के दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालु दरगाह पहुंचे। लोगों ने दरगाह पर चादरपोशी कर अपने परिवार और समाज की खुशहाली के लिए दुआ मांगी। आयोजन के दौरान पूरे परिसर में अनुशासन बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया गया।
आयोजन में कई लोगों की रही अहम भूमिका
इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में कई लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम की सरपरस्ती याद अली साहब ने की, जबकि अध्यक्षता भोला अंसारी और आजम अंसारी ने निभाई। आयोजन के संचालन में सचिव मो. जहांगीर अंसारी सहित पूरी उर्स कमेटी ने सक्रिय भूमिका निभाई।
कार्यक्रम में मो. याद अली, भोला अंसारी, आजम अंसारी, मो. जहांगीर अंसारी समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
अनुशासन और व्यवस्था पर रहा विशेष ध्यान
उर्स कमेटी द्वारा आयोजन को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। नशे की हालत में प्रवेश पर रोक लगाई गई, जिसका सभी ने पालन किया। स्वयंसेवकों की टीम लगातार व्यवस्था संभालती रही।
सामाजिक एकता का बना संदेश
यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज में एकता, भाईचारे और आपसी सौहार्द का भी संदेश देने में सफल रहा। विभिन्न समुदायों के लोगों ने मिलकर इस आयोजन को सफल बनाया।

न्यूज़ देखो: आस्था के साथ सामाजिक एकता का मजबूत संदेश
दूधी बागीचा का यह उर्स बताता है कि धार्मिक आयोजन केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होते, बल्कि समाज को जोड़ने का मजबूत माध्यम भी बनते हैं। जिस तरह से विभिन्न वर्गों के लोगों ने इसमें भाग लिया, वह सामाजिक समरसता का उदाहरण है। प्रशासन और आयोजन समिति की भूमिका भी सराहनीय रही। ऐसे आयोजनों से क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आस्था के साथ जुड़ाव ही समाज की असली ताकत
जब समाज एक मंच पर आकर एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल होता है, तभी असली एकता दिखाई देती है। ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन हमें अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और आपसी विश्वास को मजबूत करते हैं।
आइए, हम भी ऐसे आयोजनों में भाग लेकर समाज में प्रेम और भाईचारे का संदेश फैलाएं।
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