केतार पीएचसी में स्वास्थ्य मेला समय से पहले बंद, ग्रामीणों को बिना इलाज लौटना पड़ा

केतार पीएचसी में स्वास्थ्य मेला समय से पहले बंद, ग्रामीणों को बिना इलाज लौटना पड़ा

author Shamsher Ansari
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#गढ़वा #स्वास्थ्य_व्यवस्था : तय समय से पहले कैंप बंद होने पर ग्रामीणों में नाराजगी।

गढ़वा जिले के केतार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित स्वास्थ्य मेला शुक्रवार को विवाद का कारण बन गया, जब यह निर्धारित समय से पहले बंद कर दिया गया। आसपास के ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में लोग इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे थे। दोपहर करीब तीन बजे स्वास्थ्य कर्मियों के चले जाने से कई मरीज बिना जांच और उपचार के लौटने को मजबूर हुए। घटना ने स्वास्थ्य मेले की प्रभावशीलता और प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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  • केतार पीएचसी में शुक्रवार को स्वास्थ्य मेला आयोजित।
  • ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में मरीज पहुंचे।
  • दोपहर करीब 3 बजे कैंप बंद होने का आरोप।
  • कई मरीज बिना इलाज लौटे।
  • ग्रामीणों में नाराजगी और शिकायत।

गढ़वा जिले के केतार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में शुक्रवार को आयोजित स्वास्थ्य मेला ग्रामीणों के लिए राहत की बजाय परेशानी का कारण बन गया। स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित इस मेले में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग जांच, दवा और चिकित्सकीय परामर्श की उम्मीद लेकर पहुंचे थे। सुबह से ही पीएचसी परिसर में मरीजों की भीड़ देखी गई, जिनमें बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे शामिल थे।

ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य मेला का उद्देश्य गरीब और दूरदराज के लोगों को एक ही स्थान पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना होता है। इसी उम्मीद के साथ वे समय निकालकर पीएचसी पहुंचे थे। लेकिन उनकी यह उम्मीद उस समय टूट गई, जब दोपहर के समय ही कैंप बंद कर दिया गया।

तय समय से पहले बंद हुआ स्वास्थ्य मेला

ग्रामीणों के अनुसार स्वास्थ्य मेला निर्धारित समय तक चलना था, लेकिन दोपहर करीब 3 बजे स्वास्थ्य कर्मी कैंप बंद कर चले गए। इसके बाद जो मरीज इलाज के लिए कतार में खड़े थे या दूर-दराज से पहुंचे थे, उन्हें बिना जांच और दवा के ही वापस लौटना पड़ा।

कई ग्रामीणों ने बताया कि वे सुबह से इंतजार कर रहे थे, लेकिन उनकी बारी आने से पहले ही डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी चले गए। इससे खासकर बुजुर्गों और महिलाओं को काफी परेशानी उठानी पड़ी।

इलाज के लिए पहुंचे ग्रामीणों में नाराजगी

कैंप बंद होने की खबर फैलते ही पीएचसी परिसर में मौजूद लोगों में नाराजगी देखी गई। ग्रामीणों का कहना था कि स्वास्थ्य मेला केवल औपचारिकता बनकर रह गया है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस तरह के आयोजन कागजों में तो बड़े दिखते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका लाभ जरूरतमंदों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाता। कई लोगों ने यह भी कहा कि यदि समय का सही ढंग से पालन नहीं किया जा सकता, तो ऐसे मेले का कोई अर्थ नहीं रह जाता।

दूरदराज से आए मरीज हुए परेशान

केतार पीएचसी में आयोजित स्वास्थ्य मेला आसपास के कई गांवों के लिए था। कुछ ग्रामीणों ने बताया कि वे कई किलोमीटर दूर से पैदल या साधन से यहां पहुंचे थे। इलाज न मिलने पर उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ा।

ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार इस तरह की लापरवाही से लोगों का स्वास्थ्य विभाग पर भरोसा कमजोर होता है। खासकर वे लोग, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और निजी इलाज का खर्च नहीं उठा सकते, उनके लिए ऐसे मेले बेहद जरूरी होते हैं।

प्रशासन से उठी सख्त मांग

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि भविष्य में इस तरह के आयोजनों में तय समय तक डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की मौजूदगी सुनिश्चित की जाए।

उनका कहना है कि स्वास्थ्य मेला तभी सफल माना जाएगा, जब अंतिम व्यक्ति तक उसका लाभ पहुंचे। समय से पहले कैंप बंद करना न केवल लापरवाही है, बल्कि आम जनता के साथ अन्याय भी है।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि अगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर आयोजित कार्यक्रम ही इस तरह से अधूरे रहेंगे, तो ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा का उद्देश्य कैसे पूरा होगा।

लोगों ने यह भी मांग की कि स्वास्थ्य मेले की निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को मौके पर मौजूद रहना चाहिए, ताकि इस तरह की स्थिति उत्पन्न न हो।

जिम्मेदारों की भूमिका पर नजर

ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य मेला आयोजित करने की जिम्मेदारी केवल डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की ही नहीं, बल्कि प्रशासन की भी होती है। यदि समय से पहले कैंप बंद किया गया है, तो इसकी जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।

न्यूज़ देखो: सिर्फ आयोजन नहीं, समय पालन भी जरूरी

केतार पीएचसी का यह मामला बताता है कि स्वास्थ्य मेले केवल आयोजित कर देना ही पर्याप्त नहीं है। जब तक तय समय, निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक ऐसे आयोजनों का उद्देश्य अधूरा रहेगा। प्रशासन को चाहिए कि वह इस तरह की शिकायतों को गंभीरता से ले और व्यवस्था में सुधार करे। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

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स्वास्थ्य सुविधा हर नागरिक का अधिकार है। यदि कहीं लापरवाही हो, तो आवाज उठाना जरूरी है। अपनी बात साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए जागरूकता फैलाएं।

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Written by

मेराल, गढ़वा

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