
#महुआडांड़ #स्वास्थ्य_संकट : स्थानीय अस्पताल में डॉक्टरों की भारी कमी के कारण इलाज ठप—ग्रामीणों ने महिला और पुरुष सीनियर डॉक्टर की तत्काल नियुक्ति की मांग उठाई
- महुआडांड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में केवल एक सीनियर डॉक्टर तैनात।
- करीब 1 लाख आबादी वाले क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएँ बुरी तरह प्रभावित।
- कुछ महीने पहले तक कार्यरत 3–4 डॉक्टरों का सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा स्थानांतरण।
- ग्रामीणों ने उपायुक्त उत्कर्ष गुप्ता से महिला एवं पुरुष दोनों सीनियर डॉक्टर की नियुक्ति की मांग की।
- सिविल सर्जन डॉ. राज मोहन खलखो ने कहा—नई पोस्टिंग के लिए राज्यस्तर से निर्णय की प्रतीक्षा।
लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था इन दिनों चरमराई हुई है। प्रखंड मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में केवल एक सीनियर डॉक्टर की उपलब्धता से बड़ी आबादी इलाज के लिए दर–दर भटकने को मजबूर है। करीब 1 लाख की आबादी वाले विशाल क्षेत्र की जिम्मेदारी एकमात्र डॉक्टर पर निर्भर होने से मरीजों की समस्या गंभीर हो गई है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार कुछ महीने पहले तक अस्पताल में 3–4 डॉक्टर कार्यरत थे, लेकिन सभी को सिविल सर्जन कार्यालय के निर्देश पर स्थानांतरित कर दिया गया। इन स्थानांतरणों के बाद अस्पताल की स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई और अब उपचार के लिए मरीजों की लंबी कतारें दिखाई देती हैं। वहीं, नेतरहाट पंचायत जैसी छोटी आबादी वाले क्षेत्र में एक पुरुष और एक महिला डॉक्टर तैनात हैं, जबकि महुआडांड़ जैसे बड़े प्रखंड में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी लोगों के गुस्से का कारण बनी हुई है।
डॉक्टरों की कमी से बढ़ी ग्रामीणों की समस्याएँ
ग्रामीण बताते हैं कि अस्पताल की उपेक्षा से लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ भी उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। गर्भवती महिलाओं, गंभीर मरीजों और दुर्घटना पीड़ितों को इलाज के लिए लातेहार या डालटनगंज भेजना पड़ रहा है, जिसके चलते कई बार जान जोखिम में पड़ जाती है।
स्थानीय लोगों ने कहा: “एक लाख आबादी का जिम्मा सिर्फ एक डॉक्टर कैसे संभालेंगे? रात में इमरजेंसी आने पर डॉक्टर पर अत्यधिक दबाव पड़ता है और कई लोग समय पर इलाज न मिलने से परेशान हो जाते हैं।”
ग्रामीणों ने उपायुक्त से उठाई मांग
ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं की अनदेखी से बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों पर खासा असर पड़ रहा है। उन्होंने उपायुक्त उत्कर्ष गुप्ता से मांग की है कि महुआडांड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक सीनियर पुरुष डॉक्टर और एक महिला सीनियर डॉक्टर की तत्काल नियुक्ति की जाए, ताकि गंभीर मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही राहत मिल सके।
सिविल सर्जन ने माना संकट, कहा—नई पोस्टिंग की प्रतीक्षा
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी इस समस्या से इंकार नहीं कर रहे हैं।
सिविल सर्जन डॉ. राज मोहन खलखो ने स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
डॉ. राज मोहन खलखो ने बताया: “महुआडांड़ स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की कमी काफी गंभीर है। राज्य स्तर से नई पोस्टिंग आएगी, तभी स्थिति सुधरेगी। हम लगातार प्रस्ताव भेज रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि विभाग डॉक्टरों की उपलब्धता के बाद ही बदहाल व्यवस्था को सुधार पाएगा। ग्रामीणों ने उपायुक्त से अनुरोध किया है कि इस मुद्दे को प्राथमिकता में रखते हुए शीघ्र निर्णय ले जाए ताकि लोगों को राहत मिल सके।
महुआडांड़ की स्वास्थ्य चुनौतियाँ: स्थिति कितनी गंभीर?
स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में उपलब्ध संसाधन भी अपर्याप्त बताए गए हैं।
- इमरजेंसी सेवाएँ सीमित
- प्रसूति सेवाओं में भारी दिक्कत
- एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड जैसी सुविधाएँ अक्सर बंद
- दवाइयों की सीमित उपलब्धता
- रात में इलाज के लिए स्टाफ की कमी
इन परिस्थितियों में एकमात्र सीनियर डॉक्टर के लिए पूरे प्रखंड का भार संभालना बेहद कठिन हो रहा है।
ग्रामीणों में बढ़ता असंतोष
गांवों में रहने वाले लोग बताते हैं कि चिकित्सा सेवाएँ पूरी तरह ठप होने से जिंदगियाँ खतरे में पड़ रही हैं। लोगों का कहना है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं पर करोड़ों खर्च करने की बात तो करती है, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है।
महिला समूह सदस्य सुनीता कुमारी ने कहा: “हमारे क्षेत्र में डॉक्टर नहीं, सुविधाएँ नहीं, एंबुलेंस समय पर नहीं। सरकार को जल्द कार्रवाई करनी चाहिए।”
न्यूज़ देखो: स्वास्थ्य ढाँचे की खामियों पर बड़ा सवाल
महुआडांड़ की यह स्थिति राज्य के स्वास्थ्य ढांचे पर गंभीर प्रश्न खड़ा करती है। 1 लाख आबादी के लिए केवल एक डॉक्टर का होना प्रशासनिक चूक और संसाधन प्रबंधन की कमी को उजागर करता है। यह मामला उन दूरस्थ क्षेत्रों की हकीकत भी सामने लाता है जहाँ स्वास्थ्य अधिकार आज भी कागज़ पर सिमटा हुआ है।
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