#चैनपुरप्रखंड #विद्यालयउत्सव : शिशु मंदिर में तिलक और गुलाल संग मनाया होली मिलन।
चैनपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित मनोरमा सरस्वती शिशु मंदिर में रविवार को होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। बच्चों और आचार्यों ने तिलक लगाकर कार्यक्रम की शुरुआत की और अबीर-गुलाल के साथ उत्सव मनाया। प्रधानाचार्य बबुलाल आइंद समेत शिक्षक-शिक्षिकाएं समारोह में मौजूद रहे। आयोजन के दौरान प्रेम, भाईचारे और सुरक्षित होली का संदेश दिया गया।
- मनोरमा सरस्वती शिशु मंदिर, चैनपुर में होली मिलन समारोह।
- बच्चों और आचार्यों ने तिलक लगाकर की कार्यक्रम की शुरुआत।
- प्रधानाचार्य बबुलाल आइंद सहित कई शिक्षक-शिक्षिकाएं रहीं उपस्थित।
- पारंपरिक गीतों और गुलाल के बीच उल्लासपूर्ण माहौल।
- शांतिपूर्ण और सुरक्षित होली मनाने का संदेश।
चैनपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित मनोरमा सरस्वती शिशु मंदिर के प्रांगण में रविवार को होली मिलन समारोह हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। विद्यालय परिसर रंग-बिरंगे अबीर-गुलाल से सराबोर नजर आया। कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने भैया-बहनों और आचार्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। समारोह का उद्देश्य बच्चों को भारतीय संस्कृति और त्योहारों के सामाजिक महत्व से अवगत कराना था।
तिलक और पारंपरिक गीतों से हुई शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत बच्चों और आचार्यों द्वारा एक-दूसरे को तिलक लगाकर की गई। इसके बाद भैया-बहनों ने पारंपरिक गीतों की धुन पर एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाया और होली की अग्रिम शुभकामनाएं दीं।
विद्यालय का पूरा वातावरण उल्लास और ऊर्जा से भरा हुआ था। छोटे-छोटे बच्चों की मुस्कान और उत्साह ने समारोह को और भी खास बना दिया।
शिक्षकों ने बताया होली का महत्व
समारोह के दौरान शिक्षकों ने बच्चों को होली के पर्व का महत्व समझाया। उन्होंने बताया कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, भाईचारे और सद्भाव का प्रतीक है।
प्रधानाचार्य बबुलाल आइंद ने अपने संबोधन में कहा:
“होली हमें आपसी मतभेद भुलाकर प्रेम और सद्भाव के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। सभी बच्चे सुरक्षित और शांतिपूर्ण तरीके से त्योहार मनाएं।”
उन्होंने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें अनुशासन और संस्कार के साथ जीवन में आगे बढ़ने का संदेश दिया।
शिक्षक-शिक्षिकाओं की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रधानाचार्य बबुलाल आइंद, रेखा तिर्की, संगीता कुमारी, रिजरेन टोप्पो, पझरेंन बेक, दुर्गावती शाय, अलका कुमारी तथा आचार्य अजय साय सहित विद्यालय परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं ने बच्चों के साथ मिलकर रंगों का उत्सव मनाया और उन्हें सकारात्मक संदेश दिए। विद्यालय के समस्त भैया-बहन और कर्मचारी भी समारोह में शामिल रहे।
उत्सव के साथ संस्कार का संदेश
कार्यक्रम के दौरान यह भी सुनिश्चित किया गया कि उत्सव मर्यादित और अनुशासित तरीके से मनाया जाए। बच्चों को प्राकृतिक रंगों के उपयोग और पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी जागरूक किया गया।
समारोह ने यह संदेश दिया कि विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों का भी संवाहक है।
न्यूज़ देखो: विद्यालयों में संस्कृति का रंग
मनोरमा सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित यह होली मिलन समारोह दर्शाता है कि शिक्षा के साथ संस्कार का समन्वय कितना महत्वपूर्ण है। जब बच्चे त्योहारों के सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व को समझते हैं, तो उनमें जिम्मेदारी और संवेदनशीलता विकसित होती है। ऐसे आयोजन विद्यालयों को केवल पढ़ाई का स्थान नहीं, बल्कि संस्कार निर्माण का केंद्र बनाते हैं। उम्मीद है कि यह सकारात्मक पहल भविष्य में भी जारी रहेगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
रंगों के साथ संस्कार भी जरूरी
त्योहार हमें जोड़ने का काम करते हैं, तोड़ने का नहीं।
बच्चों में प्रेम, सहयोग और सम्मान की भावना विकसित करना हम सबकी जिम्मेदारी है।
आइए, इस होली पर हम सकारात्मकता और सद्भाव का संदेश फैलाएं।
आप भी अपने विद्यालय या मोहल्ले में मर्यादित और सुरक्षित तरीके से त्योहार मनाएं। अपनी राय कमेंट में साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और सकारात्मक पहल का हिस्सा बनें।