
#विश्रामपुर #होली_तिथि : भद्रा और ग्रहण के कारण तिथि में बदलाव।
पलामू के विश्रामपुर में ज्योतिषाचार्य पंडित रामनिवास तिवारी ने इस वर्ष होलिकादहन और होली की तिथि स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि भद्रा काल और चंद्र ग्रहण के कारण होलिकादहन 2 मार्च की मध्यरात्रि में किया जाएगा। वहीं सूतक के प्रभाव को देखते हुए रंगों का पर्व 4 मार्च को मनाया जाएगा। यह जानकारी श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
- 2 मार्च की मध्यरात्रि 1:16 से 2:24 के बीच होगा होलिकादहन।
- पूर्णिमा 2 मार्च शाम 4:48 बजे से प्रारंभ।
- भद्रा काल 5:42 बजे से 12:58 बजे तक प्रभावी।
- 3 मार्च शाम 6:00 से 6:48 तक चंद्र ग्रहण।
- सूतक प्रभाव के कारण होली 4 मार्च को मनाई जाएगी।
पलामू प्रमंडल के चर्चित पत्रकार सह ज्योतिषाचार्य पंडित रामनिवास तिवारी ने इस वर्ष होलिकादहन और होली की तिथि को लेकर विस्तृत जानकारी दी है। उन्होंने खगोलीय गणना और पंचांग के आधार पर बताया कि भद्रा काल और चंद्र ग्रहण के कारण पारंपरिक समय में बदलाव किया गया है। श्रद्धालुओं को शुभ मुहूर्त में ही पर्व मनाने की सलाह दी गई है ताकि धार्मिक मान्यताओं का पालन सुनिश्चित हो सके।
मध्यरात्रि में होगा होलिकादहन
ज्योतिषाचार्य पंडित रामनिवास तिवारी के अनुसार इस वर्ष पूर्णिमा तिथि 2 मार्च को संध्या 4 बजकर 48 मिनट से प्रारंभ होगी। इसके कुछ समय बाद भद्रा काल भी शुरू हो जाएगा।
उन्होंने बताया कि भद्रा काल संध्या 5 बजकर 42 मिनट से प्रारंभ होकर रात्रि 12 बजकर 58 मिनट तक प्रभावी रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा में होलिकादहन करना शुभ नहीं माना जाता है।
पंडित रामनिवास तिवारी ने कहा: “भद्रा समाप्ति के बाद मध्यरात्रि 1 बजकर 16 मिनट से 2 बजकर 24 मिनट के बीच होलिकादहन करना श्रेयस्कर रहेगा।”
उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे इसी शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से होलिकादहन करें।
चंद्र ग्रहण और सूतक का प्रभाव
ज्योतिषाचार्य तिवारी ने आगे बताया कि 3 मार्च को संध्या 6 बजे से 6 बजकर 48 मिनट तक चंद्र ग्रहण लगेगा। धार्मिक परंपरा के अनुसार ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल प्रारंभ हो जाता है।
सूतक काल में किसी भी प्रकार का शुभ कार्य या पर्व नहीं मनाया जाता। यही कारण है कि 3 मार्च को रंगों का त्योहार नहीं मनाया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया: “सूतक काल के प्रभाव को देखते हुए होली का उत्सव 4 मार्च को ही मनाना उचित रहेगा।”
होलिकादहन में क्या डालना होता है शुभ
पंडित रामनिवास तिवारी ने होलिकादहन से जुड़े पारंपरिक उपायों की भी जानकारी दी। उनके अनुसार होलिका दहन में गेहूं की बाली डालना अत्यंत शुभ माना जाता है।
उन्होंने बताया कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और घर में अन्न का भंडार भरा रहता है। नारियल अर्पित करना और भी शुभ फलदायक माना गया है। वहीं हल्दी डालने से वर्षभर रोगों से मुक्ति मिलती है, ऐसी मान्यता है।
परिवार की सुख-समृद्धि के लिए टोटका
ज्योतिषाचार्य तिवारी ने पारंपरिक मान्यता का उल्लेख करते हुए बताया कि होलिकादहन के समय परिवार के सभी सदस्यों के सिर के ऊपर से चावल घुमाकर अग्नि में डालने से नूतन वर्ष खुशियों से भरा रहता है और पुरानी समस्याओं से छुटकारा मिलता है।
उन्होंने रंगों के पर्व होली पर सभी क्षेत्रवासियों को शुभकामनाएं देते हुए समाज में प्रेम और सौहार्द बनाए रखने की अपील की।
धार्मिक मान्यता और सामाजिक आस्था
विश्रामपुर सहित पलामू जिले में होली का त्योहार बड़े उत्साह से मनाया जाता है। तिथि और मुहूर्त को लेकर लोगों में उत्सुकता बनी रहती है। ऐसे में ज्योतिषाचार्य द्वारा दी गई जानकारी श्रद्धालुओं के लिए मार्गदर्शक साबित होती है।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार पर्व मनाने से सामाजिक एकता भी मजबूत होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी पंचांग और मुहूर्त के आधार पर ही बड़े पर्व-त्योहार आयोजित किए जाते हैं।
न्यूज़ देखो: परंपरा और खगोलीय गणना का संतुलन
होलिकादहन और होली की तिथि को लेकर इस बार खगोलीय घटनाओं ने विशेष स्थिति उत्पन्न की है। भद्रा और चंद्र ग्रहण के कारण समय निर्धारण में सावधानी बरतना आवश्यक था। ज्योतिषाचार्य द्वारा दी गई स्पष्ट जानकारी से लोगों की दुविधा दूर हुई है। अब प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है कि पर्व शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हो। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
रंगों का पर्व बने सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश
होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। सही मुहूर्त में होलिकादहन कर हम परंपराओं का सम्मान कर सकते हैं और सामाजिक एकता को मजबूत बना सकते हैं। जरूरत है कि हम धार्मिक आस्था के साथ जिम्मेदारी भी निभाएं और पर्यावरण का भी ध्यान रखें।
आप अपने क्षेत्र में होलिकादहन किस समय करेंगे, अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें। खबर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं ताकि सभी सही तिथि और मुहूर्त से अवगत हो सकें और सुरक्षित, सौहार्दपूर्ण होली मना सकें।






