बरवाडीह में सरस्वती पूजा से पहले तेज हुई मूर्ति निर्माण की रफ्तार, 59 प्रतिमाएं पहले से बुक

बरवाडीह में सरस्वती पूजा से पहले तेज हुई मूर्ति निर्माण की रफ्तार, 59 प्रतिमाएं पहले से बुक

author Akram Ansari
37 Views Download E-Paper (19)
#बरवाडीह #सरस्वती_पूजा : पूजा तिथि नजदीक आते ही मूर्तिकार दिन रात प्रतिमाएं तैयार करने में जुटे।

बरवाडीह प्रखंड क्षेत्र में सरस्वती पूजा को लेकर मूर्ति निर्माण कार्य ने रफ्तार पकड़ ली है। पूजा की तिथि नजदीक होने के कारण स्थानीय मूर्तिकार दिन-रात मेहनत कर मां सरस्वती की प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं। इस वर्ष अब तक 59 प्रतिमाओं की अग्रिम बुकिंग हो चुकी है, जिससे बाजार में खासा उत्साह देखा जा रहा है। बदलते मौसम और सीमित समय के बावजूद मूर्तिकार समय पर प्रतिमाएं तैयार करने में जुटे हुए हैं।

Join WhatsApp
  • बरवाडीह प्रखंड में सरस्वती पूजा को लेकर मूर्ति निर्माण कार्य तेज।
  • अब तक 59 सरस्वती प्रतिमाओं की हो चुकी है अग्रिम बुकिंग।
  • ललित कुमार, दिनेश और श्याम किशोर प्रजापति कर रहे हैं प्रतिमा निर्माण।
  • 23 जनवरी को होगी मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापना।
  • मौसम में बदलाव से मूर्तियों को सुखाने में हो रही परेशानी।

बरवाडीह प्रखंड क्षेत्र में विद्या की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की पूजा को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। पूजा की तिथि जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे मूर्तिकारों की व्यस्तता भी बढ़ती जा रही है। प्रखंड मुख्यालय में स्थित मूर्ति निर्माण स्थलों पर दिन-रात काम चल रहा है, जहां कारीगर पूरी निष्ठा और कला कौशल के साथ मां सरस्वती की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। इस वर्ष भी विद्यालयों, शिक्षण संस्थानों, पूजा समितियों और मोहल्लों में भव्य रूप से सरस्वती पूजा मनाने की तैयारी है।

मूर्तिकारों की मेहनत और कला का संगम

बरवाडीह में वर्षों से मूर्ति निर्माण से जुड़े मूर्तिकार ललित कुमार, दिनेश और श्याम किशोर प्रजापति ने बताया कि इस वर्ष सरस्वती पूजा को लेकर काफी मांग है। अब तक 59 प्रतिमाओं की अग्रिम बुकिंग हो चुकी है, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि पूजा को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह है। मूर्तिकारों ने बताया कि प्रत्येक प्रतिमा को पारंपरिक शैली और धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप तैयार किया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं की आस्था पूरी तरह संतुष्ट हो सके।

समय की चुनौती और मौसम की मार

मूर्तिकारों के सामने इस बार सबसे बड़ी चुनौती समय और मौसम दोनों को लेकर है। लगातार मौसम में हो रहे बदलाव के कारण कच्ची मिट्टी से बनी प्रतिमाओं को सुखाने में अतिरिक्त समय लग रहा है। मूर्तिकार ललित कुमार ने कहा:

“पूजा की तिथि करीब है और मौसम भी बार-बार बदल रहा है। ऐसे में प्रतिमाओं को सही तरीके से सुखाना और समय पर तैयार करना चुनौतीपूर्ण हो गया है, लेकिन हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि किसी भी श्रद्धालु को निराश न होना पड़े।”

23 जनवरी को होगी विधिवत पूजा-अर्चना

मूर्तिकारों के अनुसार 23 जनवरी को क्षेत्र में मां सरस्वती की प्रतिमाएं स्थापित कर विधिवत पूजा-अर्चना की जाएगी। इसे लेकर श्रद्धालुओं और पूजा समितियों ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। पंडाल निर्माण, सजावट, विद्युत व्यवस्था और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा भी बनाई जा रही है। स्कूलों और कॉलेजों में भी छात्र-छात्राएं सरस्वती पूजा को लेकर खासे उत्साहित नजर आ रहे हैं।

बाजार और समाज में दिख रहा उत्साह

सरस्वती पूजा को लेकर केवल मूर्तिकार ही नहीं, बल्कि पूरे बाजार में रौनक देखने को मिल रही है। पूजा सामग्री, फूल, सजावटी सामान और लाइटिंग से जुड़े दुकानदारों के चेहरे भी खिल उठे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि सरस्वती पूजा न केवल धार्मिक आस्था का पर्व है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है।

परंपरा और आस्था का प्रतीक सरस्वती पूजा

बरवाडीह और आसपास के ग्रामीण इलाकों में सरस्वती पूजा वर्षों से परंपरागत तरीके से मनाई जाती रही है। खासकर युवाओं और विद्यार्थियों के लिए यह पर्व विशेष महत्व रखता है। मां सरस्वती को विद्या, बुद्धि और विवेक की देवी माना जाता है, इसलिए पूजा के दौरान शिक्षा से जुड़े हर वर्ग की भागीदारी देखने को मिलती है।

स्वच्छता और अनुशासन पर भी रहेगा जोर

स्थानीय पूजा समितियों ने इस वर्ष पूजा के दौरान स्वच्छता और अनुशासन बनाए रखने का भी संकल्प लिया है। पूजा समाप्ति के बाद प्रतिमाओं के विसर्जन को लेकर भी प्रशासनिक दिशा-निर्देशों का पालन करने की बात कही जा रही है, ताकि पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।

न्यूज़ देखो: सरस्वती पूजा से पहले बढ़ी कारीगरों की व्यस्तता

यह खबर दर्शाती है कि बरवाडीह में सरस्वती पूजा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि स्थानीय कारीगरों की आजीविका और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ी हुई है। अग्रिम बुकिंग की संख्या यह बताती है कि लोगों की आस्था मजबूत बनी हुई है। मौसम की चुनौती के बावजूद मूर्तिकारों की मेहनत सराहनीय है। अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन और समाज मिलकर पूजा को कितनी सुव्यवस्थित और पर्यावरण-संवेदनशील तरीके से संपन्न कराते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

आस्था, कला और जिम्मेदारी का संगम

सरस्वती पूजा जैसे पर्व हमें अपनी परंपराओं से जोड़ते हैं और स्थानीय कलाकारों के श्रम का सम्मान करना सिखाते हैं। ऐसे आयोजनों में भाग लेते समय स्वच्छता, अनुशासन और पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी भी हमारी ही है। अगर आप भी अपने क्षेत्र में पूजा की तैयारी कर रहे हैं, तो सकारात्मक पहल का हिस्सा बनें। अपनी राय कमेंट में साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और दूसरों को भी जागरूक करें ताकि परंपरा और जिम्मेदारी साथ-साथ निभाई जा सके।

📥 Download E-Paper

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 5 / 5. कुल वोट: 1

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!

Written by

बरवाडीह, लातेहार

🔔

Notification Preferences

error: