
#लातेहार #वन्यजीव_संरक्षण : PTR में प्रशिक्षु IFS अधिकारियों ने फील्ड प्रबंधन, संरक्षण मॉडल और आजीविका पहलों का किया गहन अध्ययन।
पलामू टाइगर रिज़र्व में भारतीय वन सेवा बैच 2024 के प्रशिक्षु अधिकारियों का दो दिवसीय प्रशिक्षण भ्रमण आयोजित किया गया। इस दौरान अधिकारियों ने बाघ संरक्षण, एंटी-पोचिंग व्यवस्था, इको-टूरिज़्म और सामुदायिक सहभागिता से जुड़ी गतिविधियों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। प्रशिक्षण का उद्देश्य भावी वन अधिकारियों को जमीनी स्तर पर संरक्षण प्रबंधन की समझ देना रहा। यह भ्रमण PTR के संरक्षण प्रयासों और सतत विकास मॉडल की महत्ता को रेखांकित करता है।
- IFS बैच–2024 के प्रशिक्षु अधिकारियों का दो दिवसीय फील्ड प्रशिक्षण भ्रमण संपन्न।
- एम-स्ट्राइप पेट्रोलिंग और एंटी-पोचिंग कैंप में जमीनी कार्यप्रणाली का अवलोकन।
- बोमा साइट पर बाघ संरक्षण और पुनर्स्थापन प्रयासों की जानकारी।
- हुनर से रोजगार योजना के तहत महिलाओं के सिलाई प्रशिक्षण केंद्र का निरीक्षण।
- पोलपोल प्रवासी गांव और पुनर्वास व्यवस्था पर समुदाय संवाद।
देश के महत्वपूर्ण वन्यजीव संरक्षण क्षेत्रों में शामिल पलामू टाइगर रिज़र्व (PTR) में भारतीय वन सेवा (IFS) बैच–2024 के प्रशिक्षु अधिकारियों का दो दिवसीय शैक्षणिक एवं फील्ड प्रशिक्षण भ्रमण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह भ्रमण भावी वन अधिकारियों को संरक्षण, प्रबंधन और समुदाय आधारित विकास की व्यवहारिक समझ देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों ने PTR की कार्यप्रणाली को नजदीक से देखा और स्थानीय स्तर पर हो रहे प्रयासों को समझा।
एम-स्ट्राइप पेट्रोलिंग और एंटी-पोचिंग व्यवस्था का अवलोकन
प्रशिक्षण भ्रमण की शुरुआत एम-स्ट्राइप पेट्रोलिंग से की गई। इस दौरान प्रशिक्षु अधिकारियों ने एंटी-पोचिंग कैंप का दौरा किया और ट्रैकर्स व फील्ड स्टाफ से संवाद किया। अधिकारियों को बताया गया कि किस प्रकार नियमित गश्ती, तकनीकी निगरानी और फील्ड इंटेलिजेंस के माध्यम से अवैध शिकार पर नियंत्रण रखा जाता है। जमीनी अनुभव के माध्यम से उन्हें वन्यजीव सुरक्षा की चुनौतियों और समाधान की जानकारी मिली।
PTR ओवरव्यू सत्र में संरक्षण रणनीतियों की प्रस्तुति
इसके बाद आयोजित PTR ओवरव्यू सत्र में पलामू टाइगर रिज़र्व की दीर्घकालिक संरक्षण रणनीतियों, प्रबंधन मॉडल और तकनीकी नवाचारों की विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों को कैमरा ट्रैप, डेटा विश्लेषण, गश्ती योजना और मानव–वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन की प्रक्रिया समझाई गई, जिससे संरक्षण कार्यों की प्रभावशीलता बढ़ाई जा रही है।
बोमा साइट में बाघ संरक्षण प्रयासों का अध्ययन
प्रशिक्षु अधिकारियों ने बोमा साइट का दौरा कर बाघ संरक्षण और पुनर्स्थापन से जुड़े वैज्ञानिक प्रयासों को देखा। यहां उन्हें बाघों के व्यवहार, स्वास्थ्य निगरानी और पुनर्वास प्रक्रिया की जानकारी दी गई। यह बताया गया कि किस प्रकार इन प्रयासों से बाघ संरक्षण को मजबूती मिलती है और जैव विविधता संतुलित रहती है।
‘हुनर से रोजगार’ योजना से समुदाय सशक्तिकरण
भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने ‘हुनर से रोजगार’ सिलाई प्रशिक्षण केंद्र का निरीक्षण किया। यहां स्थानीय महिलाओं से संवाद कर उन्हें प्रोत्साहित किया गया। अधिकारियों ने माना कि इस प्रकार की पहलें स्थानीय समुदायों को आजीविका के अवसर प्रदान करती हैं और संरक्षण के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करती हैं।
ग्रासलैंड विकास और पोलपोल प्रवासी गांव का भ्रमण
प्रशिक्षु अधिकारियों ने ग्रासलैंड विकास क्षेत्र एवं पोलपोल प्रवासी गांव का दौरा किया। इस दौरान समुदाय सहभागिता, संरक्षण जागरूकता, जल संकट, रोजगार, मानव–वन्यजीव संघर्ष और इको-टूरिज़्म आधारित सस्टेनेबल लाइवलीहुड पर विस्तार से चर्चा की गई। ग्रामीणों से बातचीत कर पुनर्वास की स्थिति और उनकी समस्याओं को समझा गया।
इको-टूरिज़्म ब्रीफिंग और संवाद सत्र
शाम के समय आयोजित इको-टूरिज़्म ब्रीफिंग, बोनफायर और संवाद सत्र में सतत पर्यटन मॉडल पर चर्चा की गई। अधिकारियों को बताया गया कि जिम्मेदार पर्यटन कैसे स्थानीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ-साथ संरक्षण को भी मजबूती देता है।
दूसरे दिन बेतला राष्ट्रीय उद्यान और अन्य क्षेत्रों का दौरा
दूसरे दिन प्रशिक्षु अधिकारियों की टीम ने बेतला राष्ट्रीय उद्यान, किला ग्रास प्लॉट, हिरणडेगवा, छिपादोहर और पोलपोल वन क्षेत्रों का भ्रमण किया। पोलपोल में रिलोकेट किए गए गांवों का निरीक्षण कर पुनर्वास की प्रगति, मूलभूत सुविधाओं और ग्रामीणों की चुनौतियों की जानकारी ली गई।
रेस्क्यू वैन और ट्रीटमेंट सेंटर का निरीक्षण
छिपादोहर वन कार्यालय में अधिकारियों ने रेस्क्यू वैन एवं ट्रीटमेंट सेंटर का निरीक्षण किया। यहां वन्यजीवों के उपचार, आपातकालीन प्रतिक्रिया और बचाव व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई। साथ ही सिलाई प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।
प्रशिक्षु अधिकारियों ने PTR मॉडल की सराहना की
प्रशिक्षण में शामिल IFS अधिकारी राजेश सिन्हा, ऋत्विका पांडेय, लावा कुमार और राहुल कुमार ने PTR की समन्वित कार्यप्रणाली, प्रशिक्षित फील्ड स्टाफ, तकनीकी दक्षता और सामुदायिक सहभागिता की सराहना की। उन्होंने इसे देश के अन्य संरक्षित क्षेत्रों के लिए एक प्रभावी और अनुकरणीय मॉडल बताया।
यह प्रशिक्षण भ्रमण फील्ड डायरेक्टर श्री एस. आर. नटेश एवं डिप्टी डायरेक्टर श्री प्रजेश जेना के निर्देशन में संपन्न हुआ। पूरे कार्यक्रम के दौरान लातेहार पुलिस बल द्वारा सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई।

न्यूज़ देखो: संरक्षण और आजीविका का संतुलित मॉडल
पलामू टाइगर रिज़र्व में आयोजित यह प्रशिक्षण भ्रमण दर्शाता है कि संरक्षण और समुदाय विकास को साथ लेकर चलना संभव है। PTR का मॉडल यह सवाल भी उठाता है कि क्या अन्य संरक्षित क्षेत्रों में भी इसी तरह की समन्वित रणनीति अपनाई जा सकती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जंगल सुरक्षित तो भविष्य सुरक्षित
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