
#बरवाडीह #वन_अपराध : रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में बिना अनुमति चल रहे ईंट भट्ठे पर्यावरण के लिए खतरा बने।
लातेहार जिले के छिपादोहर थाना क्षेत्र अंतर्गत रिजर्व फॉरेस्ट इलाके में अवैध रूप से बंगला ईंट भट्ठों का संचालन खुलेआम किया जा रहा है। जंगल की जमीन पर बिना किसी वैध अनुमति के मिट्टी की खुदाई कर ईंट निर्माण हो रहा है, जिससे पर्यावरण और वन्य जीवन को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। इसके बावजूद अब तक प्रशासन या संबंधित विभागों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इस स्थिति ने प्रशासनिक सक्रियता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- छिपादोहर रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में अवैध ईंट भट्ठों का संचालन।
- बिना अनुमति जंगल की मिट्टी की खुदाई कर किया जा रहा ईंट निर्माण।
- सरकार को भारी राजस्व नुकसान और पर्यावरण को गंभीर क्षति।
- वन्य जीवों के आवास पर मंडरा रहा खतरा।
- स्थानीय लोगों की शिकायतों के बावजूद कार्रवाई शून्य।
लातेहार जिले के बरवाडीह अनुमंडल अंतर्गत छिपादोहर थाना क्षेत्र से एक गंभीर पर्यावरणीय और प्रशासनिक लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां के रिजर्व फॉरेस्ट इलाके में अवैध रूप से बंगला ईंट भट्ठों का कारोबार जोरों पर है। जंगल की जमीन पर खुलेआम भट्ठे लगाए जा रहे हैं और मिट्टी की अवैध कटाई कर ईंटों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे वन क्षेत्र की प्राकृतिक संरचना लगातार नष्ट हो रही है।
जंगल की जमीन पर अवैध कब्जा और कारोबार
सूत्रों के अनुसार छिपादोहर रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में कई स्थानों पर बिना किसी वैध अनुमति के ईंट भट्ठे संचालित किए जा रहे हैं। इन भट्ठों के लिए जंगल की जमीन पर गड्ढे खोदकर मिट्टी निकाली जा रही है, जो सीधे तौर पर वन संरक्षण अधिनियम और पर्यावरण नियमों का उल्लंघन है। इसके बावजूद संबंधित विभागों की ओर से कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया है, जिससे अवैध कारोबारियों के हौसले और बुलंद होते जा रहे हैं।
पर्यावरण और वन्य जीवों पर गंभीर असर
वन क्षेत्र में लगातार हो रही मिट्टी की कटाई से जंगल की प्राकृतिक संरचना को भारी नुकसान पहुंच रहा है। पेड़-पौधों की जड़ों को क्षति पहुंचने के कारण उनका अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। इसके साथ ही इस क्षेत्र में रहने वाले वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास भी प्रभावित हो रहे हैं।
ईंट भट्ठों से निकलने वाला धुआं और राख आसपास के वातावरण को प्रदूषित कर रहे हैं, जिससे न केवल जंगल बल्कि आस-पास के गांवों के लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
सरकार को राजस्व का नुकसान
अवैध रूप से संचालित ईंट भट्ठों के कारण सरकार को भी भारी राजस्व नुकसान हो रहा है। न तो इन भट्ठों के पास वैध लाइसेंस हैं और न ही किसी प्रकार का कर या शुल्क अदा किया जा रहा है। इसके बावजूद ईंटों का उत्पादन और बिक्री धड़ल्ले से की जा रही है। यह स्थिति प्रशासनिक नियंत्रण व्यवस्था की कमजोरी को उजागर करती है।
स्थानीय लोगों ने उठाए गंभीर सवाल
स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण से जुड़े लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार वन विभाग, जिला प्रशासन और अन्य संबंधित अधिकारियों को इस अवैध गतिविधि की जानकारी दी है। बावजूद इसके अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
ग्रामीणों का कहना है कि जब बार-बार शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं होती, तो यह संदेह पैदा होना स्वाभाविक है कि कहीं यह सब प्रशासनिक मिलीभगत के कारण तो नहीं चल रहा।
संयुक्त कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि वन विभाग, जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड संयुक्त रूप से पूरे मामले की जांच करें। अवैध ईंट भट्ठों को तत्काल बंद कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही जंगल को हुए नुकसान का आकलन कर पुनर्स्थापन की योजना बनाई जाए, ताकि पर्यावरण संतुलन को बचाया जा सके।
न्यूज़ देखो: जंगल बचाने की जिम्मेदारी किसकी
छिपादोहर रिजर्व फॉरेस्ट में चल रहा यह अवैध कारोबार प्रशासन की निष्क्रियता को उजागर करता है। जंगलों का संरक्षण केवल कागजी दावों से नहीं, बल्कि सख्त और समयबद्ध कार्रवाई से संभव है। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो इसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा। सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार विभाग अब भी जागेंगे या जंगल यूं ही मिट्टी और धुएं में तब्दील होते रहेंगे।
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जंगल बचेगा तभी भविष्य सुरक्षित रहेगा
वन और पर्यावरण केवल सरकारी संपत्ति नहीं, बल्कि समाज की साझा धरोहर हैं। अवैध गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। जब तक हम सजग नहीं होंगे, तब तक ऐसे कारोबार फलते-फूलते रहेंगे।





